पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में एक प्रमुख नीतिगत परिवर्तन रेखांकित किया गया है, जो वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVCs) में ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ पर केंद्रित है। यह तीव्रता से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत को औद्योगिक विकास के प्रति नए दृष्टिकोण से सोचने की आवश्यकता पर बल देता है।
वैश्विक मूल्य शृंखला (GVCs) के बारे में
- GVCs उत्पादन प्रक्रियाओं के अंतर्राष्ट्रीय विखंडन को संदर्भित करती हैं, जहाँ किसी वस्तु या सेवा के निर्माण के विभिन्न चरण अनेक देशों में संपन्न होते हैं।
- एक देश द्वारा उत्पाद को आरंभ से अंत तक बनाने के बजाय, डिज़ाइन, घटक निर्माण, असेंबली, लॉजिस्टिक्स, विपणन और बिक्री-पश्चात सेवाएँ वैश्विक स्तर पर वितरित होती हैं।
- उदाहरण: एक स्मार्टफोन अमेरिका में डिज़ाइन किया जा सकता है, ताइवान या दक्षिण कोरिया से चिप्स, जापान और जर्मनी से घटक, भारत या वियतनाम में असेंबली एवं विश्वभर में बिक्री।
- प्रत्येक देश उत्पादन नेटवर्क में एक विशिष्ट कार्य का योगदान करता है।
GVCs क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- GVCs में भागीदारी देशों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँच, विदेशी निवेश आकर्षित करने, प्रौद्योगिकी एवं कौशल हस्तांतरण, रोजगार सृजन और पैमाने की अर्थव्यवस्था प्राप्त करने का अवसर देती है।
- विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए GVC एकीकरण प्रायः औद्योगिकीकरण का सबसे तेज़ मार्ग रहा है।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विकास रणनीतियों का विकास
- आयात प्रतिस्थापन (प्रारंभिक लाभ, संरचनात्मक सीमाएँ): युद्धोत्तर दशकों में ब्राज़ील, भारत और मेक्सिको जैसे देशों ने आयात-प्रतिस्थापन औद्योगिकीकरण (ISI) अपनाया।
- उन्होंने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाकर प्रारंभिक औद्योगिक क्षमता का निर्माण किया।
- वैश्विक एकीकरण और GVC भागीदारी: 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से नया दृष्टिकोण उभरा—FDI आकर्षित करना, GVCs में एकीकृत होना और सीखने के अवसरों का लाभ उठाना।
- वैश्वीकरण का प्रभाव:
- प्रथम विखंडन: उत्पादन को उपभोग से अलग किया गया।
- द्वितीय विखंडन: उत्पादन के चरण सीमाओं के पार वितरित हुए।
- वर्तमान चरण: उद्योग नहीं, बल्कि कार्य वैश्विक स्तर पर विखंडित हैं।
GVCs में प्रमुख चिंताएँ और मुद्दे
- असमान मूल्य वितरण: सभी उत्पादन चरण समान मूल्य उत्पन्न नहीं करते। उच्च-मूल्य गतिविधियाँ (R&D, डिज़ाइन, ब्रांडिंग, IP) लाभ का बड़ा हिस्सा प्राप्त करती हैं, जबकि निम्न-मूल्य गतिविधियाँ (असेंबली, मूल प्रसंस्करण) कम मार्जिन देती हैं।
- सीमित उन्नयन अवसर: भागीदारी स्वतः तकनीकी प्रगति नहीं लाती। बाधाओं में बौद्धिक संपदा प्रतिबंध, विदेशी कंपनियों पर निर्भरता, कमजोर घरेलू आपूर्तिकर्ता नेटवर्क और कमजोर R&D क्षमताएँ शामिल हैं।
- आपूर्ति शृंखला की कमजोरियाँ: COVID-19 व्यवधान, सेमीकंडक्टर की कमी, अमेरिका–चीन व्यापार संघर्ष और ऊर्जा/लॉजिस्टिक्स पर युद्धों ने GVCs की संवेदनशीलता उजागर की।
- भू-राजनीतिक विखंडन: प्रौद्योगिकी नियंत्रण, निर्यात प्रतिबंध और रणनीतिक ‘रीशोरिंग’ तथा ‘फ्रेंड-शोरिंग’ GVCs को पुनः आकार दे रहे हैं।
- कमजोर घरेलू संबंध: कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में आयातित मध्यवर्ती वस्तुएँ निर्यात उत्पादन पर प्रभुत्वशाली हैं, घरेलू आपूर्तिकर्ता नेटवर्क उथले हैं और स्थानीय मूल्य संवर्धन सीमित है।
- श्रम बाज़ार व्यवधान:
- निम्न-कौशल असेंबली रोजगार स्वचालन के प्रति संवेदनशील हैं।
- एआई और रोबोटिक्स श्रम तीव्रता को कम करते हैं।
- अनौपचारिक श्रमिक औपचारिक आपूर्ति शृंखलाओं से बाहर रह सकते हैं।
- यदि पुनः कौशल विकास प्रणाली कमजोर है तो एआई–विनिर्माण अभिसरण विस्थापन जोखिम बढ़ा सकता है।
- पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताएँ: उत्पादन विखंडन प्रायः पर्यावरणीय भार विकासशील देशों पर डालता है—कार्बन-गहन विनिर्माण, खराब श्रम मानक, संसाधन क्षय और अपशिष्ट प्रबंधन चुनौतियाँ।
- व्यापार असंतुलन और बाहरी निर्भरता: गहन GVC एकीकरण स्थायी व्यापार घाटे, मुद्रा असुरक्षा और बाहरी ऋण संचय का कारण बन सकता है।
- नीतिगत समन्वय चुनौतियाँ: GVC भागीदारी हेतु व्यापार नीति, औद्योगिक नीति, अवसंरचना योजना, कौशल विकास और नियामक ढाँचे में सामंजस्य आवश्यक है।
- विखंडित नीतिनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकता है और उन्नयन में विलंब कर सकता है।
केस स्टडी: एप्पल की सप्लाई चेन
- एप्पल का वैश्विक उत्पादन नेटवर्क :एप्पल का उत्पादन नेटवर्क 748 विनिर्माण स्थलों, 28 देशों और 188 सप्लायर कंपनियों में फैला हुआ है।
- 2013 में भारत इस नेटवर्क से अनुपस्थित था। लेकिन 2023 तक भारत में 10 से अधिक परिचालन सुविधाएँ सक्रिय हो गईं और 20 से अधिक अतिरिक्त सुविधाएँ पाइपलाइन में थीं।
- इस विस्तार को फर्म-स्तरीय रणनीतिक विविधीकरण, भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण और नीतिगत इरादों ने प्रेरित किया।
आगे की राह: वैल्यू चेन में ऊपर जाने के पाँच स्तंभ
- कार्य-केंद्रित औद्योगिक नीति: पारंपरिक औद्योगिक नीति क्षेत्रों को लक्षित करती है।
- लेकिन विखंडित उत्पादन की दुनिया में नीति को कार्यों को लक्षित करना चाहिए।
- मूल्य अब सिस्टम इंटीग्रेशन, बौद्धिक संपदा, महत्वपूर्ण घटकों और तकनीकी नियंत्रण बिंदुओं में निहित है।
- नीति उपकरणों में निर्यात प्रोत्साहन, क्षमता-आधारित खरीद, सीखने को प्रेरित करने वाले मानक, और जटिल कार्यों को आत्मसात करने से जुड़ा सशर्त समर्थन शामिल होना चाहिए।
- बैकवर्ड जीवीसी भागीदारी को गहरा करना: वैश्विक विनिर्माण मूल्य में भारत की मामूली हिस्सेदारी कमजोर बैकवर्ड लिंक के कारण है।
- विशेष रूप से, निर्यात उत्पादन के लिए मध्यवर्ती आयातों में सीमित एकीकरण।
- क्लस्टर-आधारित पैमाना और पारिस्थितिकी तंत्र विकास: ज्ञान-गहन उत्पादन निकटता पर फलता-फूलता है।
- चीन के ग्रेटर बे एरिया और वियतनाम के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों जैसे सफल उदाहरण दिखाते हैं कि औद्योगिक सफलता भौगोलिक एकाग्रता, अवसंरचना कनेक्टिविटी एवं घने सप्लायर पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है।
- भारत में क्लस्टरों को अलग-थलग औद्योगिक एस्टेट से आगे बढ़ना होगा।
- इन्हें आवास और शहरी योजना, परिवहन नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा, तथा समन्वित क्षेत्रीय शासन की आवश्यकता है।
- एआई–सेवाएँ–विनिर्माण अभिसरण: आधुनिक विनिर्माण डिजाइन और इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, वित्त, सॉफ्टवेयर एवं डेटा सिस्टम जैसी सेवाओं से अलग नहीं है।
- उन्नयन के लिए सेवाओं को औद्योगिक रणनीति के मूल स्तंभ के रूप में एकीकृत करना आवश्यक है।
- आर्थिक राज्यकला और संस्थागत क्षमता: पूंजी की लागत को कम करना उत्पादकता वृद्धि, निर्यात प्रदर्शन और अधिशेष सृजन पर निर्भर करता है।
- इसके लिए नियामक सामंजस्य, व्यापार सुविधा, लॉजिस्टिक्स दक्षता, अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल में सतत निवेश आवश्यक है।
- औद्योगिक नीति को सतत समस्या-समाधान होना चाहिए—अनुकूली राज्य क्षमता पर आधारित, न कि एक बार का हस्तक्षेप।
निष्कर्ष
- वैश्विक अर्थव्यवस्था में जहाँ उत्पादन कार्यों में विभाजित है और मूल्य असमान रूप से संचित होता है, वहाँ शक्ति उन लोगों के पास होती है जो महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
- भारत के लिए चुनौती केवल अधिक उत्पादन करना नहीं है, बल्कि सही चीज़ों का उत्पादन करना है—और उन्हें बेहतर तथा स्मार्ट तरीके से करना है।
- वैल्यू चेन में ऊपर जाना न तो स्वतः होता है और न ही सुनिश्चित। इसके लिए रणनीतिक कार्य चयन, गहरा एकीकरण, क्लस्टर-आधारित विस्तार, एआई-सक्षम अभिसरण और संस्थागत सुदृढ़ता आवश्यक है।
| मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न:]आप वैश्विक मूल्य शृंखला (Global Value Chain) से क्या समझते हैं? विखंडित उत्पादन और भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण के युग में भारत की रणनीति पर चर्चा कीजिए कि वह किस प्रकार वैश्विक मूल्य शृंखला में उन्नति कर सकता है। |
स्रोत : BL
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