बजट में विज्ञान-आधारित विकास हेतु बड़े आवंटन, किंतु मूलभूत वित्तपोषण में अंतराल यथावत

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • संघीय बजट 2026–27 विज्ञान-आधारित विकास में सुदृढ़ महत्वाकांक्षा प्रदर्शित करता है, किंतु विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर वित्तपोषण, संस्थागत स्वायत्तता और पारदर्शी नवाचार वित्तपोषण पर निर्भर करेगी।

परिचय 

  • 2023-24 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग का आवंटन ₹2,683.86 करोड़ से घटाकर ₹1,607.32 करोड़ किया गया, और वास्तविक व्यय भी कम होकर ₹1,467.34 करोड़ पर आ गया।
  • इसी प्रकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का आवंटन ₹7,931.05 करोड़ से घटाकर ₹4,891.78 करोड़ किया गया और वास्तविक व्यय ₹4,002.67 करोड़ रहा।
  • विज्ञान में मिशन-आधारित प्रोत्साहन: बजट सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, CCUS, महत्त्वपूर्ण खनिज, और जैव-निर्माण केंद्र जैसे प्रमुख मिशनों को समर्थन देता है, किंतु नीति घोषणाओं से परे दीर्घकालिक, स्थिर वित्तपोषण को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।

भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय

  • भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) GDP का केवल 0.6% से 0.7% के बीच रहा, जो वैश्विक औसत से कम है और चीन, दक्षिण कोरिया तथा अमेरिका जैसे देशों से भी नीचे है।
  • इसका एक कारण निजी क्षेत्र का अपेक्षाकृत कम निवेश है, जो केवल लगभग 36% है, जबकि उपर्युक्त देशों में निजी क्षेत्र का योगदान 70% से अधिक है।
  • केंद्रीय सरकार कुल R&D व्यय का 43.7% योगदान करती है।

R&D में वित्तपोषण की आवश्यकता

  • आर्थिक विकास: नए उद्योगों को बढ़ावा देता है, उत्पादकता सुधारता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है।
  • प्रौद्योगिकीय प्रगति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रगति को संभव बनाता है।
  • सामाजिक चुनौतियाँ: गरीबी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसी समस्याओं का समाधान करने में सहायक।
  • रोज़गार सृजन: नवाचार से रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है।
  • वैश्विक स्थिति: भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और ज्ञान में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करता है।
  • निवेश आकर्षण: अनुसंधान-आधारित क्षेत्रों में विदेशी और घरेलू निवेश को बढ़ावा देता है।

अपर्याप्त वित्तपोषण के प्रभाव

  • निवेश संबंधी चिंताएँ: सार्वजनिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास में सीमित निवेश।
  • अवसंरचना अंतराल: अनेक संस्थानों में अपर्याप्त अनुसंधान सुविधाएँ और संसाधन।
  • ब्रेन ड्रेन: बेहतर अवसरों के कारण प्रतिभा का अन्य देशों की ओर पलायन।
  • उद्योग सहयोग की कमी: अकादमिक जगत और उद्योग के बीच व्यावहारिक नवाचार हेतु सीमित साझेदारी।
  • कौशल अंतराल: कुशल शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के प्रशिक्षण एवं विकास की कमी।

सरकारी पहल

  • अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना: ₹1 लाख करोड़ के कोष के साथ स्वीकृत यह योजना निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा डीप-टेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखती है।
    • यह दीर्घकालिक, कम या शून्य ब्याज दर पर ऋण, इक्विटी निवेश उपलब्ध कराती है तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से एक नए डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स को वित्तपोषित करती है।
  • अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF): वर्ष 2023 में स्थापित ANRF विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता हेतु उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
    • फाउंडेशन का लक्ष्य 2023–28 के दौरान ANRF फंड, इनोवेशन फंड, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च फंड तथा विशेष प्रयोजन कोष सहित विभिन्न माध्यमों से ₹50,000 करोड़ की राशि जुटाना है।
  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022: इसका उद्देश्य वर्ष 2035 तक भारत को भू-स्थानिक क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में स्थापित करना है।
    • यह नीति भू-स्थानिक आंकड़ों तक पहुंच को उदार बनाती है तथा शासन, व्यवसाय और अनुसंधान में उनके उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह वर्ष 2020 में आरंभ किए गए अंतरिक्ष सुधारों पर आधारित है, जिनके अंतर्गत इस क्षेत्र को गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए समग्र सहभागिता हेतु खोला गया।
    • इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमताओं को सुदृढ़ करना, एक सशक्त वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग को प्रोत्साहित करना तथा सार्वजनिक एवं निजी संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: वर्ष 2023–31 के लिए ₹6,003.65 करोड़ आवंटित किए गए हैं, ताकि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों को उन्नत किया जा सके।
  • बायोई3 नीति, 2024: यह बायोमैन्युफैक्चरिंग एवं बायो-एआई हब्स के सृजन तथा राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, जिससे प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यीकरण की प्रक्रिया को गति मिल सके।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): वर्ष 2015 में आरंभ किया गया यह पहल विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा सरकारी एजेंसियों को राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से परस्पर जुड़े अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग तंत्रों से सशक्त बनाती है।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): वर्ष 2021 में स्थापित इस मिशन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले निर्माण हेतु एक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
    • भारत ने छह राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है, जिनमें ओडिशा में प्रथम वाणिज्यिक सिलिकॉन कार्बाइड निर्माण सुविधा भी शामिल है।
  • इंडिया एआई मिशन: इंडिया एआई मिशन “भारत में एआई का निर्माण तथा भारत के लिए एआई को प्रभावी बनाना” की परिकल्पना को मूर्त रूप देता है।
    • यह तीव्र गति से प्रगति कर रहा है तथा प्रारंभिक 10,000 जीपीयू के लक्ष्य से बढ़ाकर 38,000 जीपीयू तक कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि कर चुका है, जिससे स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और उद्योगों हेतु सुलभ एआई अवसंरचना सुनिश्चित की जा सके।
  • अटल नवाचार मिशन (AIM): छात्रों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को समर्थन प्रदान कर जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु स्थापित।
  • उच्च उपज बीजों पर राष्ट्रीय मिशन: यह अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा उच्च उपज, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु बीजों के विकास पर केंद्रित होगा, जो कृषि जैव-प्रौद्योगिकी में डीबीटी के प्रयासों के अनुरूप है।
  • सीवीड मिशन तथा लर्न एंड अर्न कार्यक्रम: ये पहल महिला उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए आर्थिक समावेशन को प्रोत्साहित करती हैं।

आगे की राह

  • R&D व्यय बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को बढ़ाना आवश्यक है।
  • उद्योग, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि अनुसंधान गतिविधि तथा उसे समर्थन देने वाले कोष दोनों का विस्तार हो सके।
  • संघीय वित्त मंत्री ने कई नई पहलें भी घोषित की हैं, जिनमें परमाणु ऊर्जा मिशन, स्वच्छ प्रौद्योगिकी पहलें, अटल टिंकरिंग लैब्स और शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उत्कृष्टता केंद्र शामिल हैं।

स्रोत: TH

 

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