भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का पुनर्मूल्यांकन

पाठ्यक्रम: GS2/ भारत और उसके पड़ोस; क्षेत्रीय समूह; विदेश नीति

संदर्भ

  • भारत की ‘पड़ोसी प्रथम नीति (NFP)’ ने हाल ही में एक दशक पूरा किया है। इस उपलब्धि ने यह परिचर्चा शुरू कर दी है कि क्या इस नीति ने भारत की क्षेत्रीय नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ किया है या संरचनात्मक एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों ने इसकी सफलता को सीमित कर दिया है।

‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के बारे में

  • पड़ोसी प्रथम नीति (NFP) 2014 से भारत की विदेश नीति का केंद्रबिंदु रही है, जिसका उद्देश्य स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध पड़ोस का निर्माण करना है।
  • यह भारत की वृद्धि को उसके निकटवर्ती पड़ोसियों—अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका—के विकास से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ मानती है।

नीति की उपलब्धियाँ

  • प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता की स्थिति: 2022 में श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा $4 बिलियन की सहायता और नेपाल भूकंप के समय मानवीय सहायता ने भारत की विश्वसनीय पड़ोसी की भूमिका को सुदृढ़ किया।
  • वैक्सीन मैत्री: कोविड-19 वैक्सीन भूटान, मालदीव और अन्य देशों को वैश्विक शक्तियों से पहले उपलब्ध कराना।
  • ऊर्जा ग्रिड एकीकरण: 2024 का त्रिपक्षीय समझौता, जिसके अंतर्गत बांग्लादेश भारत के ग्रिड के माध्यम से नेपाल से जलविद्युत आयात कर सकता है, क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में एक ऐतिहासिक कदम है।
  • कनेक्टिविटी उपलब्धियाँ: 2024 में मोंगला और चटगांव बंदरगाहों तक पहुँच ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए लॉजिस्टिक लागत को उल्लेखनीय रूप से कम किया।

क्यों इसे “अधिकांशतः विफल” माना जाता है (5–6 बिंदु उदाहरण सहित)

  • हस्तक्षेपवाद की धारणा: भारत को प्रायः पड़ोसी देशों की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करने वाला माना जाता है।
    • उदाहरण: 2015 का नेपाल नाकाबंदी और बांग्लादेश में पूर्व अवामी लीग शासन के प्रति भारत का खुला समर्थन दीर्घकालिक असंतोष का कारण बना।
  • भारत-विरोधी भावना (“इंडिया आउट” प्रवृत्ति): पड़ोसी देशों में घरेलू आंदोलनों द्वारा “भारत-विरोधी” बयानबाज़ी को राजनीतिक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
    • उदाहरण: मालदीव में राष्ट्रपति मुज्जू के नेतृत्व में “”इंडिया आउट” अभियान ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी को प्रेरित किया।
  • घरेलू आवश्यकताओं का अधीनता: भारत की घरेलू राजनीति (जैसे प्रवासन या अल्पसंख्यक अधिकारों पर विमर्श) प्रायः द्विपक्षीय विश्वास को हानि पहुँचाती है।
    • उदाहरण: भारत में CAA/NRC पर बयानबाज़ी ने बांग्लादेश के साथ महत्वपूर्ण राजनयिक तनाव उत्पन्न किया।
  • चीन कारक (ऋण बनाम अवसंरचना): भारत $15 बिलियन+ की ऋण रेखाएँ (LoC) प्रदान करता है, लेकिन चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) तीव्र निष्पादन के कारण अधिक आकर्षक है।
    • उदाहरण: चीन वर्तमान में तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए बोली लगा रहा है, जो भारत के हितों के लिए सीधी चुनौती है।
  • परियोजना क्रियान्वयन में देरी: भारत की “लालफीताशाही” और धीमी निष्पादन प्रक्रिया प्रायः साझेदारों को निराश करती है।
    • उदाहरण: म्यांमार में कालादान परियोजना में वर्षों की देरी, जबकि चीनी परियोजनाएँ अधिक दक्षता से पूरी होती हैं।
  • विश्वास की कमी: भारत पड़ोसियों पर चीन के साथ व्यापार कम करने का दबाव डालता है, जबकि चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है।
    • उदाहरण: नेपाल को चीनी दूरसंचार या ऊर्जा परियोजनाओं से हतोत्साहित करना, जबकि भारतीय बाज़ार चीनी घटकों पर निर्भर रहते हैं।

उभरते क्षेत्रीय आयाम

  • शासन केंद्रीकरण: भारत की दीर्घकालिक निर्भरता विशेष नेताओं पर (जैसे बांग्लादेश में शेख हसीना) 2024 में उनके सत्ता से हटने के बाद उलटी पड़ गई। 2026 में BNP की जीत ने नई दिल्ली के लिए “रणनीतिक सुधार” का दौर शुरू किया।
  • युवा विमुखता: श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में विद्रोहों ने दिखाया कि नई “Gen Z” मतदाता पीढ़ी भारत को “पुराने शासन” का समर्थक मानती है। इससे भारत को “महल कूटनीति” से “जन कूटनीति” की ओर बदलाव करना आवश्यक है।

आगे का मार्ग: “पड़ोसी प्रथम 2.0”

  • संस्थागत निरंतरता: सभी राजनीतिक हितधारकों (विपक्ष और नागरिक समाज सहित) से जुड़ाव, ताकि संबंध शासन परिवर्तन के बाद भी बने रहें।
  • त्वरित परियोजना क्रियान्वयन: “अध्ययन समूहों” से “हस्ताक्षरित अनुबंधों” की ओर बढ़ना। भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों से अधिक “क्रियान्वयन” करना होगा, केवल “तर्क” नहीं।
  • असममित रियायतें (गुजराल सिद्धांत): भारत के आकार ($4 ट्रिलियन+ अर्थव्यवस्था) को देखते हुए उसे छोटे पड़ोसियों को असममित रियायतें देनी चाहिए।
  • सांस्कृतिक कूटनीति: साझा विरासत (संस्कृति) का उपयोग करना, ताकि बाहरी शक्तियों की केवल लेन-देन आधारित कूटनीति का सामना किया जा सके।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): पड़ोसियों को “इंडिया स्टैक” (UPI, ONDC) निर्यात कर साझा डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण करना।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का एक दशक ‘असमान सफलताओं’ और ‘निरंतर रणनीतिक दुविधाओं’ की यात्रा रहा है। भारत की क्षेत्रीय प्रधानता बनाए रखने में इस नीति की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।

स्रोत: TH

 

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