ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमले: सामरिक, मानवीय एवं वैश्विक निहितार्थ

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • ईरान में इज़राइल के पूर्व-निवारक हमले, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त है, ने व्यापक पश्चिम एशियाई संघर्ष में संभावित वृद्धि को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति पर पड़ सकता है।
  • इज़राइल ने ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को देखते हुए आपातकाल की घोषणा की, जबकि अमेरिका ने इस हमले को भविष्य के खतरों को रोकने हेतु पूर्व-निवारक कार्रवाई बताया।

पूर्व-निवारक हमले का सिद्धांत (Pre-emptive Strike Doctrine)

  • यह एक ऐसी रणनीति है जिसमें कोई देश तब सैन्य हमला करता है जब शत्रु का हमला आसन्न माना जाता है, ताकि संभावित खतरे को रोका या कमजोर किया जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा परिचर्चाओं में इसे प्रायः पूर्वानुमानित आत्मरक्षा के रूप में उचित ठहराया जाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ: शत्रु द्वारा हमला शुरू करने से पहले कार्रवाई करना।
    • आसन्न खतरे का संकेत देने वाली खुफिया जानकारी पर आधारित।
    • आत्मरक्षा के तर्कों के तहत उचित ठहराया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर (अनुच्छेद 51): आत्मरक्षा केवल तब अनुमत है जब सशस्त्र हमला हो चुका हो। इसलिए पूर्व-निवारक हमलों की वैधता अंतर्राष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों के बीच विवादास्पद है।
  • प्रमुख उदाहरण:
    • इज़राइल का सिक्स-डे वॉर (1967): अरब सेनाओं पर पूर्व-निवारक हमला।
    • अफगानिस्तान (2001): अमेरिका-नेतृत्व वाला आक्रमण; तालिबान 2021 में पुनः सत्ता में आया।
    • इराक पर अमेरिकी आक्रमण (2003): बुश सिद्धांत के तहत उचित ठहराया गया।
    • इराक (1981) और सीरिया (2007) में इज़राइल द्वारा परमाणु सुविधाओं पर हमले।
      • ये उदाहरण दर्शाते हैं कि सैन्य कार्रवाई अक्सर दीर्घकालिक अस्थिरता उत्पन्न करती है, समाधान नहीं।

सामरिक निहितार्थ

  • क्षेत्रीय वृद्धि का जोखिम: ईरान मिसाइलों, ड्रोन या हिज़्बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से प्रतिशोध कर सकता है, जिससे पश्चिम एशिया में बहु-आयामी युद्ध छिड़ सकता है।
  • परमाणु प्रसार चिंताएँ: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने हेतु किए गए हमले इसके परमाणु महत्वाकांक्षाओं को तीव्र कर सकते हैं और कट्टरपंथी गुटों को सुदृढ़ कर सकते हैं।
    • महत्वपूर्ण परिचर्चा:
      • इज़राइल के पास परमाणु हथियार होने की व्यापक धारणा है।
      • अमेरिका के पास विश्व का सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार है।
      • ईरान आधिकारिक रूप से परमाणु हथियार नहीं रखता।
  • अमेरिका–ईरान टकराव: इज़राइल को अमेरिकी समर्थन मिलने से यह तनाव व्यापक अमेरिका–ईरान सैन्य टकराव में बदल सकता है।

मानवीय निहितार्थ

  • हवाई हमलों और मिसाइल आदान-प्रदान से नागरिक हताहत और बुनियादी ढाँचे को हानि।
  • यदि संघर्ष लेबनान, सीरिया या इराक तक फैलता है तो बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय संकट।
  • स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक सेवाओं पर दबाव, जिससे संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की स्थिति और बिगड़ेगी।

वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक निहितार्थ

  • ऊर्जा सुरक्षा जोखिम: ईरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के क्षेत्र को नियंत्रित करता है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
  • तेल मूल्य अस्थिरता: किसी भी व्यवधान से वैश्विक तेल कीमतों में तीव्र वृद्धि हो सकती है, जिससे मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी।
  • वैश्विक व्यापार पर प्रभाव: ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और विनिर्माण प्रभावित होंगे, जिससे वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है।

भारत के लिए निहितार्थ / चिंताएँ

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी इस क्षेत्र से आयात करता है।
  • भारतीय प्रवासी: लाखों भारतीय खाड़ी देशों में रहते और कार्य करते हैं।
  • आर्थिक प्रभाव: तेल कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है।
  • प्रेषण : संघर्ष भारतीय श्रमिकों के रोजगार अवसरों को प्रभावित कर सकता है।

भारत की सामरिक दृष्टि

  • भारत पारंपरिक रूप से सामरिक स्वायत्तता की नीति का पालन करता है और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
  • इसलिए भारत का दृष्टिकोण सामान्यतः कूटनीति और संवाद; अंतर्राष्ट्रीय सत्यापन तंत्र; तथा बहुपक्षीय वार्ताओं पर बल देता है।
  • भारत एकतरफा सैन्य हस्तक्षेपों का समर्थन करने के बजाय संघर्ष कम करने और राजनीतिक समाधान का समर्थन करता है।

निष्कर्ष

  • भविष्य के खतरों को रोकने हेतु किए गए सैन्य हमले गंभीर मानवीय, सामरिक और आर्थिक जोखिम उत्पन्न करते हैं।
  • ऐतिहासिक प्रमाण दर्शाते हैं कि बमबारी अभियान स्थायी स्थिरता नहीं लाते, बल्कि संघर्षों को और तीव्र कर सकते हैं।
  • भारत जैसे देशों के लिए प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा प्रवाह की निरंतरता और प्रवासी हितों की सुरक्षा है।
  • इसलिए, कूटनीति और बहुपक्षीय सहभागिता ही परमाणु प्रसार एवं क्षेत्रीय तनावों से निपटने का सबसे व्यवहार्य मार्ग है।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]  इज़राइल के ईरान पर हमले के सामरिक, मानवीय और वैश्विक निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। क्षेत्रीय स्थिरता और पश्चिम एशिया में भारत के हितों पर इसके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

Source: IE

 

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