नवीन औषधि एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 में संशोधन

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन/ स्वास्थ्य

संदर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नवीन औषधि एवं नैदानिक परीक्षण (NDCT) नियम, 2019 में प्रमुख संशोधन अधिसूचित किए हैं, जिनका उद्देश्य नियामकीय भार को कम करना और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को प्रोत्साहित करना है।

सुधारों के पीछे तर्क

  • भारत विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवाओं और टीकों के आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, जो मात्रा के आधार पर वैश्विक जेनेरिक दवा निर्यात का लगभग 20% हिस्सा रखता है (विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO के अनुसार)।
  • समस्या: उद्योग के हितधारकों ने लंबे समय से लंबी नियामकीय समयसीमा को तीव्र नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा बताया है।
  • महत्त्व: अनुमोदन समयसीमा घटाकर, लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को कम करके और ऑनलाइन सूचना तंत्र सक्षम करके, ये संशोधन भारत के फार्मास्यूटिकल R&D पारिस्थितिकी तंत्र को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करने की अपेक्षा रखते हैं, साथ ही सुदृढ़ नियामकीय निगरानी बनाए रखते हैं।

संशोधन क्या हैं?

  • परीक्षण लाइसेंस को पूर्व सूचना से प्रतिस्थापित किया गया:CDSCO से अनुसंधान, परीक्षण या विश्लेषण हेतु दवाओं की छोटी मात्रा के गैर-व्यावसायिक निर्माण के लिए परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता को पूर्व ऑनलाइन सूचना तंत्र से प्रतिस्थापित किया गया है।
    • अपवाद: साइटोटॉक्सिक दवाएँ, मादक दवाएँ और मनोदैहिक पदार्थ जैसी उच्च-जोखिम श्रेणियों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता बनी रहेगी।
  • समयसीमा में कमी: परीक्षण लाइसेंस आवेदन की वैधानिक प्रसंस्करण समयसीमा 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दी जाएगी।
  • निम्न-जोखिम BA/BE अध्ययन हेतु पूर्व अनुमोदन की छूट: निर्दिष्ट निम्न-जोखिम बायोएवलेबिलिटी/बायोइक्विवेलेंस (BA/BE) अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति को समाप्त कर दिया गया है।
    • ऐसे अध्ययन अब CDSCO को सरल ऑनलाइन सूचना देने के बाद प्रारंभ किए जा सकते हैं।
  • अनुपालन का डिजिटल सक्षमीकरण: समर्पित ऑनलाइन मॉड्यूल निम्नलिखित पर संचालित किए जाएंगे:
    • राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS)
    • सुगम पोर्टल

संशोधनों का महत्व

  • ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस: सरलीकरण भारतीय नियमों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाता है, जिससे दवा विकास और अनुमोदन में विलंब कम होता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: वर्तमान में भारत का वैश्विक नैदानिक परीक्षणों में केवल 8% हिस्सा है। यह सुधार भारत को फार्मास्यूटिकल R&D के लिए अधिक आकर्षक बनाएगा।
  • संसाधन अनुकूलन: अनावश्यक लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को कम करके CDSCO अपने मानव संसाधनों को उच्च-प्राथमिकता वाले नियामकीय कार्यों में बेहतर ढंग से तैनात कर सकेगा।
  • उद्योग का विश्वास: तेज़, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नियामकीय वातावरण सुनिश्चित करके निवेशकों और उद्योग का विश्वास बढ़ाता है।

चुनौतियाँ

  • नैतिक सुरक्षा: सूचित सहमति, पारदर्शिता और परीक्षण प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु निगरानी आवश्यक है।
  • नियामकीय निगरानी: अनुपालन भार को हल्का करना सुभेद्य जनसंख्या के लिए सुरक्षा जाँच की कठोरता को कम नहीं करना चाहिए।
  • जन विश्वास: सुरक्षा मानकों पर समझौते की कोई भी धारणा भारत की फार्मास्यूटिकल नियामकीय प्रणाली में विश्वास को कमजोर कर सकती है।

आगे की राह

  • संतुलित विनियमन: नियमों का सरलीकरण नैदानिक अनुसंधान और उद्योग के विश्वास को बढ़ाएगा, लेकिन भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि गति सुरक्षा और नैतिकता से समझौता न करे।
  • नियामकों की क्षमता निर्माण: CDSCO अधिकारियों का सतत प्रशिक्षण और कौशल-वृद्धि आवश्यक है ताकि अधिक सहायक, प्रौद्योगिकी-चालित नियामकीय ढाँचे का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।
  • हितधारक प्रतिक्रिया तंत्र: उद्योग, शोधकर्ताओं, रोगी समूहों एवं नियामकों के साथ नियमित परामर्श ढाँचे को परिष्कृत करने और विश्वास-आधारित शासन को बनाए रखने में सहायता कर सकता है।

Source: TH

 

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