पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।
न्यायिक हस्तक्षेप की प्रमुख विशेषताएँ
- मौलिक अधिकार: मासिक धर्म स्वास्थ्य को अब विधिक रूप से जीवन के अधिकार (अनु. 21) और शिक्षा के अधिकार (अनु. 21A) का आवश्यक पहलू माना गया है।
- मासिक धर्म स्वच्छता उपायों की अनुपलब्धता विद्यालयों में समान शर्तों पर भागीदारी के अधिकार (अनु. 14) को समाप्त कर देती है।
- निःशुल्क जैव-अवक्रमणीय नैपकिन: सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को कक्षा 6–12 की छात्राओं को निःशुल्क जैव-अवक्रमणीय सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
- अनिवार्य अवसंरचना: विद्यालयों में कार्यशील, लिंग-आधारित पृथक शौचालय जल-सुविधा सहित होने चाहिए। अनुपालन न होने पर निजी विद्यालयों की मान्यता समाप्त की जा सकती है।
- कलंक-निवारण: न्यायालय ने NCERT को निर्देश दिया कि वह लैंगिक-संवेदनशील पाठ्यक्रम सम्मिलित करे ताकि लड़के और लड़कियाँ दोनों शिक्षित हों और “फुसफुसाहट” संस्कृति समाप्त हो।
संविधान का अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 21 संविधान के मौलिक अधिकारों (भाग III) का हिस्सा है। यह सभी व्यक्तियों—नागरिक और गैर-नागरिक—को समान रूप से सुनिश्चित है।
- किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।
- यह राज्य को किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता में मनमाने हस्तक्षेप से रोकता है।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से इसका दायरा समय के साथ विस्तारित हुआ है, जिससे राज्य पर गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने का सकारात्मक दायित्व भी आरोपित होता है।
- मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार
- गोपनीयता का अधिकार (पुट्टस्वामी, 2017)
- आजीविका का अधिकार (ओल्गा टेलिस)
- स्वास्थ्य और चिकित्सीय देखभाल का अधिकार
- स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
- विधिक सहायता और शीघ्र न्याय का अधिकार
- शिक्षा का अधिकार (बाद में अनुच्छेद 21A द्वारा स्पष्ट किया गया)
- हिरासत में यातना से संरक्षण
- नींद, आश्रय और भोजन का अधिकार
| भारत सरकार की मासिक धर्म स्वास्थ्य संबंधी नीतियाँ – मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS): राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा समर्थित। आशा कार्यकर्ता 6 नैपकिन (फ्रीडेज़) के पैक ₹6 की सब्सिडी दर पर वितरित करती हैं। – प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना: 16,000 से अधिक केंद्र ‘सुविधा’ (ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल पैड) ₹1 प्रति पैड की दर पर उपलब्ध कराते हैं। – समग्र शिक्षा: वेंडिंग मशीनों और इन्सिनरेटर की स्थापना हेतु वित्तपोषण। 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राज्यों को जैव-अवक्रमणीय विकल्पों को प्राथमिकता देनी होगी। – स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण 2: छोटे पैमाने के इन्सिनरेटर और गहरे गड्ढों का उपयोग कर मासिक धर्म अपशिष्ट प्रबंधन (MWM) पर केंद्रित, ताकि पर्यावरणीय अवरोध रोका जा सके। – मासिक धर्म स्वच्छता नीति (2024-25): स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार। यह कम लागत वाले उत्पादों तक पहुँच को सुव्यवस्थित करती है, “हरित” (जैव-अवक्रमणीय) पहलों को प्राथमिकता देती है और MHM को औपचारिक विद्यालय पाठ्यक्रम में एकीकृत करती है। – उत्पादों का मानकीकरण: स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग मासिक धर्म कप और पुनर्चक्रणीय पैड जैसे सतत विकल्पों का अध्ययन कर रहा है ताकि ग्रामीण महिलाओं में उनकी सुरक्षा एवं व्यवहार्यता का मूल्यांकन किया जा सके। |
Source: AIR
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