पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचार में
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने तमिलनाडु और मेघालय में बुनियादी स्तर पर जैव विविधता शासन को सुदृढ़ करने हेतु पाँच वर्षीय परियोजना प्रारंभ की है।
बुनियादी स्तर पर जैव विविधता शासन
- यह स्थानीय समुदायों और ग्राम संस्थाओं द्वारा जैविक संसाधनों का विकेन्द्रीकृत प्रबंधन है, जो इस विचार पर आधारित है कि स्थानीय लोग प्रकृति के सबसे प्रभावी संरक्षक होते हैं।
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 पंचायत/नगरपालिका स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) के माध्यम से विकेन्द्रीकृत शासन की आवश्यकता करता है।
भारत में बुनियादी स्तर पर जैव विविधता शासन को सुदृढ़ करने हेतु परियोजना
- यह परियोजना भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की संयुक्त पहल है, जिसके लिए 2025–2030 की अवधि हेतु 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान प्रदान किया गया है।
- यह परियोजना नीचे से ऊपर (bottom-up) शासन मॉडल का अनुसरण करती है और राष्ट्रीय एवं वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं का समर्थन करती है, जिनमें भारत की जैव विविधता रणनीति (NBSAP 2024–2030), कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा (30×30 लक्ष्य), तथा पेरिस समझौते के अंतर्गत जलवायु लक्ष्य शामिल हैं।
- यह परियोजना पहुँच और लाभ साझा (ABS), CSR निधि और हरित सूक्ष्म-उद्यमों के माध्यम से नवाचारी वित्तपोषण को भी बढ़ावा देती है, साथ ही महिलाओं, अनुसूचित जातियों एवं जनजातीय समुदायों पर विशेष ध्यान देते हुए व्यापक पुनरावृत्ति हेतु क्षमता निर्माण करती है।
- कवरेज: तमिलनाडु में यह परियोजना सत्यमंगलम परिदृश्य को कवर करेगी, जिसमें मुदुमलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व शामिल हैं।
- मेघालय में इसे गारो हिल्स क्षेत्र में लागू किया जाएगा, जिसमें नोकरेक बायोस्फीयर रिज़र्व, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
- उद्देश्य: यह पहल भारत की जैव विविधता और जलवायु लक्ष्यों का समर्थन करती है, जिनमें राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति, वैश्विक 30×30 लक्ष्य और पेरिस समझौता शामिल हैं।
- इसका ध्यान स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर है, जिसमें ग्राम पंचायत योजना में जैव विविधता का एकीकरण, पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों जैसी स्थानीय संस्थाओं को सुदृढ़ करना, तथा बहु-हितधारक मंचों एवं नवाचारी वित्तपोषण के माध्यम से समुदाय-नेतृत्व संरक्षण को बढ़ावा देना शामिल है।
जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन का महत्व
- सामुदायिक संरक्षकता: यह स्थानीय समुदायों को जैविक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग हेतु सशक्त बनाता है।
- जीविका सुरक्षा: यह पारंपरिक ज्ञान, कृषि-जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का समर्थन करता है, जो ग्रामीण एवं जनजातीय जनसंख्या के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- जलवायु लचीलापन: यह मैंग्रोव पुनर्स्थापन, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और सतत कृषि के माध्यम से अनुकूलन को बढ़ाता है।
- वैश्विक प्रतिबद्धताएँ: यह जैव विविधता संधि (CBD) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
चुनौतियाँ
- कई जैव विविधता प्रबंधन समितियों में प्रशिक्षित कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है।
- स्थानीय जैव विविधता परियोजनाओं के लिए सीमित वित्तीय समर्थन।
- स्थानीय निकायों, राज्य जैव विविधता बोर्डों और राष्ट्रीय प्राधिकरणों के बीच कमजोर एकीकरण।
- समुदाय अक्सर पहुँच और लाभ साझा (ABS) प्रावधानों के अंतर्गत अपने अधिकारों से अनभिज्ञ रहते हैं।
सुझाव
- वित्तपोषण नवाचार: जिला/राज्य स्तर पर जैव विविधता निधि स्थापित करें; CSR और ग्रीन बॉन्ड का उपयोग करें।
- सामुदायिक प्रोत्साहन: स्थानीय संरक्षण नायकों को मान्यता और पुरस्कार दें; इको-पर्यटन और सतत उद्यमों को बढ़ावा दें।
- सुदृढ़ समन्वय: पर्यावरण मंत्रालय, राज्य जैव विविधता बोर्ड और पंचायती राज संस्थाओं के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करें।
- जागरूकता अभियान: मिशन LiFE शैली के जनसंपर्क का विस्तार करें ताकि दैनिक जीवन में जैव विविधता की भूमिका को उजागर किया जा सके।
निष्कर्ष
- बुनियादी स्तर पर जैव विविधता शासन पर्यावरणीय और लोकतांत्रिक दोनों आवश्यकताएँ हैं, क्योंकि यह स्थानीय समुदायों को भारत की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा हेतु सशक्त बनाता है।
- सरकारी प्रयासों ने एक आधार तैयार किया है, परंतु क्षमता निर्माण, जागरूकता और लाभ-साझाकरण में निरंतर निवेश आवश्यक है।
- जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सुदृढ़ करना और जैव विविधता को स्थानीय विकास योजनाओं से जोड़ना भारत के जलवायु लक्ष्यों, आजीविका एवं वैश्विक संरक्षण प्रतिबद्धताओं को समर्थन देगा।
स्रोत :Air
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