पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हालिया भू-राजनीतिक व्यवधानों, विशेषकर पश्चिम एशिया में, ने भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला आघातों के प्रति संवेदनशीलता और दीर्घकालिक लचीलापन सुनिश्चित करने की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर किया है।
भारत के लिए आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन क्यों महत्वपूर्ण है?
- ऊर्जा निर्भरता: भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल और 50% से अधिक प्राकृतिक गैस की आवश्यकता आयात करता है।
- वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता सीधे मुद्रास्फीति, राजकोषीय स्थिरता और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करती है।
- खाद्य और उर्वरक आयात: भारत खाद्य तेलों और दालों के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे घरेलू बाजार वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।
- उर्वरक क्षेत्र फॉस्फेटिक और पोटाशिक इनपुट के आयात पर अत्यंत सीमा तक निर्भर है, जो कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है।
- फार्मास्यूटिकल्स और एपीआई: भारत लगभग 65–70% सक्रिय औषधीय संघटक (APIs) का आयात करता है, मुख्यतः चीन से।
- यह स्वास्थ्य क्षेत्र में कमजोरियां सृजित करता है, जबकि भारत जेनेरिक दवा निर्माण में सुदृढ़ है।
- महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी तत्व: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता के लिए आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर एवं दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के आयात पर निर्भर है।
- इन संसाधनों का वैश्विक संकेन्द्रण रणनीतिक और आपूर्ति जोखिमों को बढ़ाता है।
भारत की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने की पहलें
- आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता पहल(SCRI): 2021 में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा शुरू की गई त्रिपक्षीय साझेदारी।
- इसका उद्देश्य एकल स्रोत आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता बढ़ाना है।
- यह स्रोतों का विविधीकरण, डिजिटल तकनीक का उपयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर केंद्रित है।
- ऊर्जा सुरक्षा पहलें:
- राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR): वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों से बचाव हेतु प्रमुख स्थानों पर भंडार स्थापित।
- नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार: 2025 के अंत तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 266.78 GW तक पहुँची।
- खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पहलें:
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन: दालों, तिलहन और अनाज के उत्पादन में वृद्धि।
- राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स – ऑयल पाम (NMEO-OP): 2021 में शुरू, भारत को पाम ऑयल में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य।
- नैनो-उर्वरक और जैव-उर्वरक: आयातित रसायनों पर निर्भरता कम करने हेतु प्रोत्साहन।
- प्रौद्योगिकी और विनिर्माण पहलें:
- पैक्स सिलिका पहल: अर्धचालक और सौर घटकों जैसी सिलिकॉन-आधारित प्रौद्योगिकियों में आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन मजबूत करना।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM):76,000 करोड़ रुपये की पहल, घरेलू अर्धचालक और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने हेतु।
- उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: इलेक्ट्रॉनिक्स, अर्धचालक, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल और उन्नत रसायन कोशिकाओं जैसे क्षेत्रों को कवर करता है।
- यह घरेलू विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
आगे की राह
- आयात का रणनीतिक विविधीकरण: अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों से स्रोतों का विविधीकरण कर विशेष क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता कम करनी होगी।
- दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध और साझेदारी: महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- डिजिटल तकनीक का उपयोग: एआई, IoT और ब्लॉकचेन का व्यापक उपयोग कर वास्तविक समय आपूर्ति श्रृंखला निगरानी एवं पूर्वानुमान विश्लेषण को बढ़ावा देना।
- महत्वपूर्ण सामग्रियों का पुनर्चक्रण: लिथियम-आयन बैटरियों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का पुनर्चक्रण बढ़ाना आवश्यक।
स्रोत: TH
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