संक्षिप्त समाचार  30-03-2026

बिरसा मुंडा

पाठ्यक्रम: GS1/ आधुनिक इतिहास

संदर्भ

  • भारत के उपराष्ट्रपति ने झारखंड में बिरसा मुंडा के जन्मस्थान का दौरा किया।

परिचय

  • बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलीहातु (तत्कालीन बंगाल प्रेसीडेंसी, वर्तमान झारखंड) में हुआ था।
  • वे एक महान भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता और मुंडा जनजाति के लोकनायक थे।
  • बिरसाइट धर्म: उन्होंने “बिरसाइट” नामक एक नए धर्म की स्थापना की और स्वयं को ईश्वर का दूत घोषित किया।
    • वे एक ईश्वर में विश्वास करते थे।
    • मुंडा और उरांव समुदाय के लोग इस संप्रदाय से जुड़े और ब्रिटिशों द्वारा किए जा रहे आदिवासी धर्मांतरण का विरोध किया।
    • अनुयायियों ने उन्हें ‘धरती अब्बा’ या ‘पृथ्वी के पिता’ कहा।
  • मुंडा विद्रोह: बिरसा मुंडा के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन और स्थानीय शोषकों (दिकुओं) के विरुद्ध आदिवासी आंदोलन हुआ।
    • इसे ‘उलगुलान’ या ‘महान कोलाहल’ भी कहा जाता है।
    • 1900 में उन्हें जमकोपाई जंगल में गिरफ्तार किया गया और हिरासत में ही हैजा से उनकी मृत्यु हो गई।
    • परिणाम: ब्रिटिश सरकार ने 1908 में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम लागू किया, जिसके तहत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों (दिकुओं) को हस्तांतरित करने पर रोक लगाई गई।
  • जनजातीय गौरव दिवस: उनकी विरासत को सम्मानित करने हेतु 2021 से प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है।

स्रोत: HT

ज़ोजिला दर्रा

पाठ्यक्रम: GS1/ भूगोल

संदर्भ

  • ज़ोजिला दर्रे पर हिमस्खलन की घटना में कई लोगों की मृत्यु हुई, जिससे इस उच्च जोखिम वाले पर्वतीय राजमार्ग पर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं।
  • हिमस्खलन बर्फ का तीव्र प्रवाह है, जो किसी ढलान जैसे पहाड़ी या पर्वत से नीचे की ओर आता है।

ज़ोजिला दर्रा

  • यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊँचाई वाले दर्रों में से एक है।
  • जम्मू और कश्मीर में 3,528 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
  • यह कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
  • यह अपनी सामरिक महत्ता और अद्भुत हिमालयी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।

ज़ोजिला सुरंग परियोजना

  • यह सुरंग जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर 11,578 फीट (लगभग 3,500 मीटर) की ऊँचाई पर निर्माणाधीन है।
  • यह भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग होगी और एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सुरंग होगी।

स्रोत: AIR

पश्चिम एशियाई संकट से भारत के कॉफी निर्यात प्रभावित

पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि

संदर्भ

  • पश्चिम एशिया में जारी संकट ने भारतीय कॉफी निर्यात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। फारस की खाड़ी के पास लगभग 15–20% खेपें अटकी हुई हैं, जिससे पश्चिम एशिया और यूरोप के प्रमुख बाजार प्रभावित हुए हैं।

भारत का कॉफी निर्यात

  • भारत विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक है।
  • शीर्ष 5 निर्यात गंतव्य:
    • इटली (18.09%)
    • जर्मनी (11.01%)
    • बेल्जियम (7.47%)
    • रूस (5.28%)
    • संयुक्त अरब अमीरात (5.09%)

कॉफी उत्पादन की भौगोलिक स्थिति

  • जलवायु: उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह उगती है। गर्म, आर्द्र जलवायु और हल्की सर्दियाँ आवश्यक।
  • मृदा: अच्छी जलनिकासी वाली, उपजाऊ, ह्यूमस और जैविक पदार्थों से समृद्ध। pH 6.0–6.5।
  • तापमान: आदर्श वार्षिक तापमान 15°C–28°C।
  • वर्षा एवं स्थलाकृति: 600–1,600 मीटर ऊँचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन। ढलानदार भूमि जलनिकासी सुनिश्चित करती है।
  • प्रमुख कॉफी उत्पादक राज्य:
  • कर्नाटक (सबसे बड़ा उत्पादक, लगभग 70% योगदान)
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • उभरते राज्य: आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पूर्वोत्तर क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय)।

GI टैग वाली भारतीय कॉफी

  • कूर्ग अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)
  • वायनाड रोबस्टा कॉफी (केरल)
  • चिकमंगलूर अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)
  • बाबा बुदनगिरी अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)
  • मॉनसूनड मालाबार रोबस्टा कॉफी (केरल)
  • अराकू कॉफी (आंध्र प्रदेश एवं ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्र)

कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया

  • कॉफी अधिनियम VII, 1942 के तहत स्थापित।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत।
  • मुख्यालय: बेंगलुरु।

स्रोत: TH

एक्स्ट्रासेल्युलर आरएनए (exRNA)

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट किया है कि बैक्टीरिया से उत्पन्न एक्स्ट्रासेल्युलर आरएनए (exRNA) की उपस्थिति कीटाणुरहित पेयजल में भी बनी रह सकती है।

परिचय

  • एक्स्ट्रासेल्युलर आरएनए (exRNA) उन आरएनए अणुओं को संदर्भित करता है जो कोशिकाओं के बाहर पाए जाते हैं और रक्त, लार, मूत्र तथा सेरेब्रोस्पाइनल द्रव जैसे शारीरिक तरल पदार्थों में प्रवाहित होते हैं।
  • सामान्यतः आरएनए (जैसे mRNA, tRNA आदि) कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन निर्माण में सहायक होता है। परंतु इस स्थिति में आरएनए कोशिका से बाहर निकलकर अन्य कोशिकाओं तक पहुँच सकता है।
  • कोशिका के बाहर जीवित रहने हेतु exRNA विशेष आणविक कंटेनरों में यात्रा करता है, जो इसे एंजाइमों द्वारा टूटने से बचाते हैं।
  • यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों की जाँच से चिकित्सक कैंसर या हृदय रोग से संबंधित विशिष्ट आरएनए पैटर्न की पहचान कर सकते हैं।

राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA)

  • आरएनए एक जैविक अणु है जो आनुवंशिक जानकारी को प्रोटीन में परिवर्तित करने में सहायक होता है।
  • यह एकल-श्रृंखला वाला न्यूक्लिक एसिड है, जो राइबोज शर्करा, फॉस्फेट समूह और नाइट्रोजन क्षारक (एडेनिन, यूरासिल, साइटोसिन, ग्वानिन) से बना होता है।
  • कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार के आरएनए पाए जाते हैं: मैसेंजर आरएनए (mRNA), राइबोसोमल आरएनए (rRNA) और ट्रांसफर आरएनए (tRNA)।

स्रोत: TH

आर्टेमिस-2 मिशन

पाठ्यक्रम: GS3/ अंतरिक्ष

संदर्भ

  • नासा आर्टेमिस-II मिशन को प्रक्षेपित करने जा रहा है।

आर्टेमिस-II के बारे में

  • आर्टेमिस-II नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मनुष्यों को अधिक स्थायी और रणनीतिक तरीके से पुनः चंद्रमा पर भेजना है।
  • इस मिशन में चार अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा की परिक्रमा पर भेजा जाएगा।
  • यह मिशन चंद्रमा को केवल गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक मंच के रूप में देखता है।

अपोलो और आर्टेमिस मिशन में अंतर

अपोलो कार्यक्रमआर्टेमिस कार्यक्रम
•1969 से 1972 के बीच 12 अंतरिक्षयात्री चंद्रमा पर उतरे।
•प्रत्येक बार दो अंतरिक्षयात्री उतरे।
•अल्पकालिक यात्राओं और तकनीकी क्षमता के प्रदर्शन पर केंद्रित।.
•उद्देश्य केवल चंद्रमा पर उतरना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक उपस्थिति सुनिश्चित करना।
○ बार-बार होने वाले मिशनों के लिए क्षमता विकसित करना,
○ अंतरिक्ष यात्रियों की दीर्घकालिक उपस्थिति को समर्थन देना,
○ और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए आवश्यक बुनियादी •ढांचा तैयार करना।गहन अंतरिक्ष मिशनों हेतु आवश्यक अवसंरचना का निर्माण।

स्रोत: TH

स्रोत: TH

पीएम-कुसुम 2.0

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण

समाचार में

  • सरकार संशोधित प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM 2.0) योजना के अंतर्गत बैटरी ऊर्जा भंडारण घटक जोड़ने पर विचार कर रही है।

पीएम-कुसुम योजना के बारे में

  • पीएम-कुसुम योजना 2019 में शुरू की गई थी, जो मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है।
  • संशोधित संस्करण को PM-KUSUM 2.0 कहा जाएगा।
  • वर्तमान योजना कृषि पंपों के सौरकरण पर केंद्रित है, परंतु इसमें बैटरी भंडारण शामिल नहीं है।
  • इसका उद्देश्य किसानों की डीजल और ग्रिड विद्युत पर निर्भरता कम करना है।
  • यह भारत के व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण का समर्थन करती है।
  • योजना का क्रियान्वयन नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किया जाता है।
  • वित्तीय मॉडल: 30% सब्सिडी केंद्र सरकार, 30% राज्य सरकार और 40% योगदान किसान।

बैटरी भंडारण की भूमिका

  • बैटरी भंडारण से पीक घंटों में उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहीत किया जा सकता है।
  • यह ऊर्जा तब आपूर्ति की जा सकती है जब माँग अधिक हो परंतु सौर उत्पादन कम हो।
  • इससे ऊर्जा प्रबंधन, विद्युत विश्वसनीयता और ग्रिड स्थिरता में सुधार होगा।

स्रोत: TH

 

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