पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, स्वदेशी “अनिवार्य और आवश्यक” है क्योंकि वैश्विक व्यापारिक वातावरण निर्यात नियंत्रण, प्रौद्योगिकी निषेध व्यवस्थाओं और कार्बन सीमा तंत्रों से प्रभावित है।
परिचय
- सर्वेक्षण ने उल्लेख किया कि युद्धोत्तर अमेरिका, जर्मनी, जापान और पूर्वी एशिया की कंपनियों के विपरीत, भारतीय कंपनियाँ दीर्घकालिक जोखिम वहन एवं राष्ट्र-निर्माण निवेश के प्रति अपेक्षाकृत कम रुचि प्रदर्शित करती हैं।
- इसमें कहा गया कि भारतीय कंपनियाँ दीर्घकालिक जोखिम वहन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के प्रति सीमित इच्छाशक्ति दिखाती हैं तथा उत्पादकता, पैमाने या अधिगम की बजाय नियामकीय अवसरवाद एवं संरक्षित लाभांश पर अधिक निर्भर रहती हैं।
- स्वदेशी का अर्थ है बाहरी झटकों के बावजूद उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करना और ऐसी स्थायी राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना जो आर्थिक संप्रभुता को सुदृढ़ करें।
- पूंजीगत व्यय की कमी (Lack of Capex): GDP में पूंजीगत व्यय (Capex) का भाग FY20-25 के बीच 2.6% से बढ़कर 4% हुआ है, तथापि अर्थशास्त्रियों का मत है कि निजी निवेश अभी भी मंद बना हुआ है।
भारत का विनिर्माण क्षेत्र
- भारत का विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में GDP में 17% का योगदान दे रहा है।
- भारत का लक्ष्य विनिर्माण क्षेत्र का GDP में हिस्सा 25% तक पहुँचाना है।
- भारत 14 पहचाने गए सूर्योदय क्षेत्रों (Sunrise Sectors) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जैसे सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा घटक, चिकित्सा उपकरण, बैटरियाँ और श्रम-प्रधान उद्योग (चमड़ा एवं वस्त्र सहित), ताकि GDP में विनिर्माण का हिस्सा बढ़ाया जा सके।
- औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि FY25 में 5.9% से बढ़कर FY26 में 6.2% रहने का अनुमान है।
- FY26 की प्रथम छमाही में क्षेत्र ने 7.0% की वृद्धि दर्ज की, जो FY25 की प्रथम छमाही की 6.1% वृद्धि और कोविड-पूर्व प्रवृत्ति 5.2% से अधिक है।
- नवाचार : भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र भी सुदृढ़ हुआ है, जिसमें वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2019 में 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गई है।
- विनिर्माण के अंदर उल्लेखनीय वृद्धि :
- कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पाद (34.9%)।
- मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर (33.5%)।
- अन्य परिवहन उपकरण (25.1%)।
- रोज़गार सृजन : सर्वेक्षण के अनुसार, सात राज्य मिलकर विनिर्माण क्षेत्र में कुल रोजगार का लगभग 60% हिस्सा रखते हैं।
- तमिलनाडु 15% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र 13% हिस्सेदारी के साथ हैं।
भारत के विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियाँ
- अवसंरचना अवरोध: उच्च लॉजिस्टिक्स लागत, कमजोर बंदरगाह संपर्क और विद्युत की कमी से उत्पादन कम होता है।
- निम्न अनुसंधान एवं नवाचार: भारत GDP का 1% से कम R&D में निवेश करता है, जिससे उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण सीमित होता है।
- आयात पर निर्भरता: सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक घटक और रक्षा उपकरणों के लिए भारी आयात निर्भरता।
- कौशल अंतराल: कार्यबल कौशल और उद्योग आवश्यकताओं के बीच बड़ा असंगति।
- निम्न उत्पादकता: पुरानी मशीनरी, छोटे पैमाने की विखंडित इकाइयाँ और सीमित स्वचालन के कारण उत्पादकता कम रहती है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे देश सस्ती उत्पादन लागत और बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करते हैं, जिससे भारतीय उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी बनते हैं।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: सतत और हरित विनिर्माण के लिए बढ़ता दबाव, उच्च अनुपालन लागत के साथ।
मेक इन इंडिया को सक्षम बनाने हेतु प्रमुख पहल

- राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM): इसे केंद्रीय बजट 2025–26 में एक दीर्घकालिक रणनीतिक रोडमैप के रूप में घोषित किया गया, जो नीति, क्रियान्वयन और शासन को एकीकृत दृष्टि में समाहित करता है।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र की हाल की उपलब्धियाँ
- व्यवसाय करने में सुगमता: विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट (DBR) 2020 में भारत की रैंक 2014 में 142वें स्थान से उन्नत होकर 63वें स्थान पर पहुँची।
- टीका उत्पादन: भारत ने कोविड-19 टीकाकरण कवरेज रिकॉर्ड समय में प्राप्त किया और कई विकासशील एवं अविकसित देशों को प्रमुख निर्यातक भी बना।
- भारत विश्व के लगभग 60% टीकों की आपूर्ति करता है, अर्थात वैश्विक स्तर पर प्रत्येक दूसरा टीका गर्व से भारत में निर्मित है।
- फार्मास्यूटिकल उद्योग: भारत का औषधि उद्योग उत्पादन मात्रा में विश्व में तीसरे और उत्पादन मूल्य में 14वें स्थान पर है।
- यह उद्योग 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर और 2047 तक 450 अरब अमेरिकी डॉलर के बाज़ार तक पहुँचने का अनुमान है।
- वंदे भारत ट्रेनें: भारत की प्रथम स्वदेशी अर्ध-उच्च गति वाली ट्रेनें, ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का उदाहरण हैं।
- वर्तमान में भारतीय रेल पर 102 वंदे भारत ट्रेन सेवाएँ (51 ट्रेनें) संचालित हैं।
- आईएनएस विक्रांत: यह भारत का प्रथम स्वदेशी विमानवाहक पोत है।
- 2023-24 में रक्षा उत्पादन ₹1.27 लाख करोड़ तक पहुँचा, और निर्यात 90 से अधिक देशों तक पहुँचा, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति और क्षमता को दर्शाता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने विगत 11 वर्षों में उत्पादन में छह गुना वृद्धि और निर्यात में आठ गुना वृद्धि दर्ज की है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य संवर्धन 30% से बढ़कर 70% हुआ है, जिसका लक्ष्य FY27 तक 90% तक पहुँचना है।
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है और अब 99% घरेलू उत्पादन करता है।
- साइकिल निर्यात: भारतीय साइकिलों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा प्राप्त की है, जिनका निर्यात यूके, जर्मनी और नीदरलैंड तक बढ़ा है।
- ‘मेड इन बिहार’ बूट्स: अब रूसी सेना के उपकरण का भाग हैं, जो वैश्विक रक्षा बाज़ार में भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- अमूल: अमूल ने अमेरिका में अपने डेयरी उत्पाद लॉन्च कर भारतीय डेयरी को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।
निष्कर्ष
- भारत जब 2047 तक $35 ट्रिलियन की दृष्टि की ओर अग्रसर है, तो विनिर्माण विकास का इंजन होगा।
- सुधारों, क्षेत्रीय प्रोत्साहनों और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं से समर्थित, यह क्षेत्र सुदृढ़ गति प्राप्त कर चुका है, जो GDP वृद्धि अनुमानों में परिलक्षित है।
- यदि यह गति बनी रहती है, तो भारत “विश्व की फैक्ट्री” से परिवर्तित होकर “विश्व का नवाचार और नेतृत्व केंद्र” बन सकता है।
Source: IE
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