भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए वित्तपोषण 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • ट्रैक्सन की ‘भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार उद्यमों ने 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड निवेश प्राप्त किया। इसमें बेंगलुरु की हिस्सेदारी कुल निवेश का 57% रही, जिससे भारत के अग्रणी अंतरिक्ष नवाचार केंद्र के रूप में उसकी स्थिति पुनः सुदृढ़ हुई है।

भारत के अंतरिक्ष परिवर्तन को गति देता निजी क्षेत्र

  • वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर है तथा वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 2–3% है।
  • पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस तथा बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियाँ भारत के नए अंतरिक्ष युग की अग्रणी बनकर उभरी हैं।
  • स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित एकाशृंगी कंपनी बनी।
  • इसका विक्रम-1 भारत द्वारा निजी क्षेत्र में विकसित पहला कक्षीय श्रेणी का प्रक्षेपण यान बना, जिसने सफलतापूर्वक निम्न पृथ्वी कक्षा में पेलोड स्थापित किया।
भारत के अंतरिक्ष परिवर्तन को गति देता निजी क्षेत्र

अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण का महत्त्व

  • निजी कंपनियाँ लाभ-आधारित मॉडल पर कार्य करती हैं, जिससे अंतरिक्ष अभियानों एवं उपग्रह प्रक्षेपण की लागत में कमी आती है।
  • निजीकरण से अंतरिक्ष उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जिससे दक्षता एवं नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।
  • निजी क्षेत्र कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन, नौवहन, संचार तथा अन्य क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों एवं सेवाओं के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देता है।
  • निजी कंपनियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है, जिससे वे नवीन परियोजनाएँ शीघ्र प्रारंभ कर सकती हैं।
  • इससे रोजगार सृजन, आधुनिक प्रौद्योगिकी का आत्मसात तथा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमुख सुधार

  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (2020) की स्थापना: यह निजी कंपनियों के लिए एकल खिड़की नियामक एवं सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है।
    • यह अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को स्वीकृति प्रदान करने एवं प्रोत्साहित करने का कार्य करता है।
  • न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (2019) के माध्यम से निगमितकरण: इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वाणिज्यिक इकाई के रूप में स्थापित किया गया।
    • इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योगों के माध्यम से उपग्रह एवं प्रक्षेपण यानों का निर्माण तथा वाणिज्यिक उपग्रह सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
  • निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने हेतु भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र की योजनाएँ: बीज निधि योजना
    • मूल्य निर्धारण सहायता नीति
    • परामर्श सहायता
    • गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए अभिकल्प प्रयोगशाला
    • अंतरिक्ष क्षेत्र में कौशल विकास
    • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की सुविधाओं के उपयोग हेतु सहायता
    • गैर-सरकारी संस्थाओं को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: इस नीति में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड तथा निजी क्षेत्र की संस्थाओं की भूमिकाएँ एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट किए गए हैं।
    • इसका उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों, शैक्षणिक जगत, नवाचार उद्यमों तथा उद्योगों की भागीदारी को बढ़ाना है।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मानदंडों का उदारीकरण (2024): सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाया है।
    • इसका उद्देश्य विशेष रूप से उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण सेवाओं में वैश्विक पूंजी एवं प्रौद्योगिकी को आकर्षित करना है।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नवाचार नेटवर्क: यह अंतरिक्ष क्षेत्र के नवाचार उद्यमों एवं लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सार्वजनिक–निजी सहयोग का एक विशिष्ट मंच है।

चुनौतियाँ

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अत्यधिक महँगी है तथा इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप, यह क्षेत्र कुछ चुनिंदा बड़े औद्योगिक समूहों के प्रभुत्व की ओर अग्रसर हो सकता है।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं उससे संबंधित अवसंरचना के विकास तथा संचालन के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता एवं संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • नवाचार एवं निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रभावी संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
  • भारतीय निजी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पेसएक्स, ब्लू ओरिजिन जैसी स्थापित कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

आगे की राह

  • भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र सरकार द्वारा किए गए सुधारों तथा सशक्त निजी पारिस्थितिकी तंत्र के कारण एक नए युग के द्वार पर खड़ा है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मानदंडों के उदारीकरण तथा समर्पित वित्तपोषण पहलों ने अंतरिक्ष मूल्य शृंखला को संभावित भागीदारों के लिए खोल दिया है।
  • इन सुधारों ने नवाचार उद्यमों की बढ़ती संख्या, स्वदेशी नवाचार तथा विस्तारित वाणिज्यिक गतिविधियों पर आधारित एक गतिशील अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहित किया है।

Source: TH

 

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