भारत का जैव-सतर्कता कार्यक्रम
पाठ्यक्रम: GS-2/शासन; स्वास्थ्य
समाचार में
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत के जैव-सतर्कता कार्यक्रम को स्वीकृति प्रदान की है।
भारत का जैव-सतर्कता कार्यक्रम
- यह अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में प्रयुक्त औषधियों तथा जैविक उत्पादों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी और रोकथाम करेगा।
- इसके अंतर्गत अंग एवं ऊतक दाताओं तथा प्राप्तकर्ताओं, दोनों को दिए जाने वाले उत्पाद भी शामिल होंगे।
- इस कार्यक्रम का नेतृत्व भारतीय भेषज संहिता आयोग करेगा।
- भारतीय भेषज संहिता आयोग: यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, जो भारत में निर्मित, बेची और उपयोग की जाने वाली सभी औषधियों के लिए मानक निर्धारित करती है।
- यह कार्यक्रम भारत के औषधि सतर्कता कार्यक्रम का पूरक होगा, जो औषधियों से होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी करता है। साथ ही, यह भारत के चिकित्सा उपकरण सतर्कता कार्यक्रम का भी पूरक होगा, जो चिकित्सा उपकरणों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं पर निगरानी रखता है।
स्रोत: IE
PBSHABD
पाठ्यक्रम: GS-2/शासन
समाचार में
- प्रसार भारती की PBSHABD सेवा के उपयोगकर्ता आधार ने दो वर्षों में 3,600 मीडिया संगठनों का आंकड़ा पार कर लिया है तथा इसकी निःशुल्क सुविधा मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है।
पृष्ठभूमि
- प्रसार भारती भारत का स्वायत्त सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। इसकी स्थापना 23 नवंबर 1997 को प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के अंतर्गत की गई थी। आकाशवाणी और दूरदर्शन इसके दो प्रमुख अंग हैं।
- इसके दायित्व में जनहित में सूचनाओं के निष्पक्ष और संतुलित प्रवाह को बढ़ावा देना शामिल है। इस व्यवस्था का प्रमुख आधार समाचारों का संग्रह रहा है।
- प्रसार भारती समाचार सेवा प्रारंभ में एक आंतरिक समाचार सेवा थी, जो आकाशवाणी और दूरदर्शन को सामग्री उपलब्ध कराती थी।
- मार्च 2024 में इसके दायरे का विस्तार करते हुए इस आंतरिक समाचार संसाधन को समाचार साझा करने वाली सेवा में परिवर्तित किया गया।
PBSHABD
- PBSHABD का अर्थ है—प्रसार भारती द्वारा प्रसारण और प्रसार के लिए साझा की गई श्रव्य-दृश्य सामग्री।
- इसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 में नई दिल्ली में शुरू किया गया था।
- यह प्रसार भारती की समाचार सामग्री उपलब्ध कराने वाली सेवा है, जिसका उपयोग मीडिया संस्थान चौबीसों घंटे कर सकते हैं।
- यह भारत और विश्व से संबंधित समयबद्ध, प्रामाणिक तथा सीधे उपयोग में लाई जा सकने वाली समाचार सामग्री उपलब्ध कराती है।
- इसमें 15 भारतीय भाषाओं में पाठ, वीडियो, श्रव्य सामग्री, छायाचित्र और सूचना-चित्र शामिल हैं। यह सामग्री लगभग 50 विषय-श्रेणियों में उपलब्ध है, जिसका उपयोग मीडिया संगठन कर सकते हैं।
- इसके उपयोगकर्ताओं में पंजीकृत मीडिया संगठन, डिजिटल प्रकाशक तथा सामग्री निर्माता शामिल हैं। समाचार पत्र, समाचार टेलीविजन चैनल और डिजिटल समाचार प्रकाशक इसके उपयोगकर्ता आधार का बड़ा हिस्सा हैं।
स्रोत: PIB
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0
पाठ्यक्रम: GS-2/शासन
समाचार में
- सरकार दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 के माध्यम से अधिक उत्तरदायी, प्रौद्योगिकी-आधारित और परिणामोन्मुख कौशल विकास व्यवस्था तैयार कर रही है।
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना
- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वर्ष 2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना शुरू की थी।
- यह ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ा कौशल विकास कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उनके लिए स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।
- एक दशक से अधिक समय से यह योजना वंचित परिवारों के 15–35 वर्ष की आयु के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
- यह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 50 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत तथा दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करके सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देती है। विगत एक दशक में इस पहल का अधिक ध्यान रोजगार के परिणामों और रोजगार प्राप्ति के बाद सहायता पर केंद्रित हुआ है।
उन्नत संस्करण
- मई 2025 में सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 के संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए। इनमें प्रशिक्षण, रोजगार, रोजगार की स्थिरता तथा रोजगार प्राप्ति के बाद सहायता से संबंधित व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
- इस योजना के अंतर्गत उद्योगों की आवश्यकताओं के आधार पर विमानन एवं अंतरिक्ष, कृषि, सौंदर्य एवं स्वास्थ्य-संवर्धन, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, वस्त्र तथा अन्य कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- केंद्रीय बजट 2026–27 में ग्रामीण कौशल विकास पर ध्यान बनाए रखते हुए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 के अंतर्गत संचालित दो विशेष कार्यक्रम :
- रोशनी: यह गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- इसमें घरेलू कौशल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है तथा महिला अभ्यर्थियों के लिए 40 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
- अब इस कार्यक्रम का विस्तार आकांक्षी जिलों तक भी किया गया है, जहाँ स्थानीय अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कौशल से संबंधित आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
- हिमायत: यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना की एक विशेष पहल है।
- यह ग्रामीण और शहरी युवाओं तथा गरीबी रेखा से नीचे और ऊपर जीवनयापन करने वाले परिवारों को सेवित करती है तथा वेतन आधारित रोजगार, स्वरोजगार और स्वतंत्र कार्य के अवसरों को बढ़ावा देती है।
- यह योजना शत-प्रतिशत केंद्र प्रायोजित है और राज्यों की सहायता से विशेष मिशन प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से लागू की जाती है।
महत्त्व
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 भविष्य के लिए कुशल, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण कार्यबल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह विकसित भारत @2047 की परिकल्पना को भी बढ़ावा देती है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक आर्थिक और ज्ञान के केंद्र के रूप में परिवर्तित करना है।
स्रोत: PIB
गाजा शांति बोर्ड
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- अमेरिका समर्थित शांति बोर्ड ने गाजा के लिए छह महीने के 2.45 अरब डॉलर के पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया है। इसमें अवसंरचना, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, आर्थिक पुनरुद्धार, डिजिटल सेवाओं और सुरक्षा से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं।
शांति बोर्ड क्या है?
- शांति बोर्ड (BoP) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और प्रभावी शासन को बढ़ावा देने के लिए की गई है। वर्तमान में इसका तत्काल और प्रमुख ध्यान युद्धोत्तर गाजा के संक्रमणकाल पर है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल–हमास संघर्ष के बाद गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के अपने ढाँचे के एक भाग के रूप में शांति बोर्ड का प्रस्ताव रखा था।
- वे शांति बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
- बोर्ड के ढाँचे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ, जिसमें गाजा के व्यापक शांति एवं संक्रमणकालीन ढाँचे का समर्थन किया गया।
- सदस्य: इस संगठन में संस्थापक सदस्यों के रूप में कई देशों को शामिल किया गया है, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, मिस्र, इजराइल, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य देश शामिल हैं।
स्रोत: HT
ब्रिक्स और परिवर्तित वैश्विक कर व्यवस्था
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- ब्रिक्स के कर प्रमुखों की बैठक ने अंतरराष्ट्रीय कराधान पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने तथा नई वैश्विक कर व्यवस्था के लिए चल रही वार्ताओं में बड़े विकासशील देशों की आवाज को सुदृढ़ करने के समूह के प्रयासों को रेखांकित किया है।
परिचय
- सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय कराधान, हस्तांतरण मूल्य निर्धारण, राजस्व आँकड़ों, डिजिटल कर प्रशासन और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय (UNFCITC) के साथ रचनात्मक सहभागिता पर भी बल दिया गया।
- भारत की ब्रिक्स कर पहल: भारत ब्रिक्स साझेदार देशों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क रहित कर निर्धारण, पूर्व-भरी हुई कर विवरणियाँ, वास्तविक समय में चालान प्रमाणीकरण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित करदाता सहायता से संबंधित अपने अनुभव साझा कर रहा है।
- भारत ने वर्ष 2026 में अपनी ब्रिक्स कर अध्यक्षता के दौरान अंतरराष्ट्रीय कराधान तथा हस्तांतरण मूल्य निर्धारण एवं राजस्व आँकड़ों पर दो नए कार्य समूह स्थापित किए।
- ब्रिक्स कर पारस्परिक-अधिगम प्रयोगशाला और कर सहायता नेटवर्क का उद्देश्य समान स्तर के देशों के बीच अनुभव-साझाकरण तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
- अप्रैल 2026 में भारत में पहली प्रत्यक्ष ब्रिक्स युवा कर पेशेवर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित की गई, जिसे अब वार्षिक कार्यक्रम के रूप में संस्थागत रूप दे दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय
- UNFCITC एक प्रस्तावित वैश्विक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग को सुदृढ़ करना तथा वैश्विक कर शासन को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाना है।
- वर्ष 2023 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव अपनाया, जिसके माध्यम से एक नए अंतरराष्ट्रीय कर अभिसमय की प्रक्रिया शुरू की गई।
- वर्ष 2025 में वार्ताएँ प्रारंभ हुईं और वर्ष 2027 तक अभिसमय तथा संबंधित प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की अपेक्षा है।
स्रोत: HT
भारत द्वारा ओआईसी समूह की कश्मीर संबंधी टिप्पणियों का खंडन
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय समूह
संदर्भ
- भारत ने इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की संयुक्त विज्ञप्ति में कश्मीर के संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
ओआईसी के बारे में
- स्थापना: 1969 में रबात, मोरक्को में।
- प्रेरक घटना: यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद पर आगजनी के हमले के बाद इसकी स्थापना की प्रक्रिया को गति मिली।
- मुख्यालय: वर्तमान में जेद्दा, सऊदी अरब।
- सदस्यता: संयुक्त राष्ट्र के ऐसे सदस्य देशों के लिए खुली है जहाँ मुस्लिम जनसंख्या बहुसंख्यक है। वर्ष 2026 तक इसके 57 सदस्य देश हैं।
- लक्ष्य एवं अधिदेश: स्वयं को “मुस्लिम विश्व की सामूहिक आवाज” के रूप में प्रस्तुत करना। यह सदस्य देशों के बीच एकजुटता और एकता को बढ़ावा देता है।
- सदस्यता एवं मतदान:
- पूर्ण सदस्यता: विदेश मंत्रियों की परिषद में सर्वसम्मति आवश्यक होती है।
- पर्यवेक्षक का दर्जा: इसके लिए भी समान प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- निर्णय: प्राथमिकता के आधार पर सर्वसम्मति से लिए जाते हैं; अन्यथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है।
- प्रमुख अंग:
- इस्लामी शिखर सम्मेलन: यह संगठन का सर्वोच्च प्राधिकरण है। इसमें राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं और इसकी बैठक प्रत्येक 3 वर्ष में होती है।
- विदेश मंत्रियों की परिषद (CFM): यह संगठन का प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय है और इसकी बैठक प्रतिवर्ष होती है।
स्रोत: AIR
सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना
पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना
संदर्भ
- अरुणाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) के लिए पूर्व-व्यवहार्यता सर्वेक्षण का मार्गदर्शन एवं समन्वय करने हेतु एक सशक्त उच्च-स्तरीय समिति को स्वीकृति दी है।
परियोजना के बारे में
- स्थान: परियोजना के लिए तीन निर्धारित स्थल हैं, जिनमें से दो सियांग जिले में तथा एक ऊपरी सियांग जिले में स्थित है।
- SUMP की क्षमता: 11,000 मेगावाट (MW)।
- केंद्र सरकार ने इसकी रणनीतिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 2008 में इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।
सियांग नदी
- सियांग नदी का उद्गम तिब्बत में होता है, जहाँ इसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है।
- यह नदी 1,000 किमी से अधिक की दूरी तक पूर्व दिशा में प्रवाहित होने के पश्चात नमचा बरवा के निकट एक बड़ा मोड़ लेती है और सियांग के रूप में अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।
- असम में सियांग नदी दिबांग और लोहित नदियों से मिलकर ब्रह्मपुत्र नदी का निर्माण करती है।
स्रोत: TH
उपग्रह-आधारित स्मार्ट वायुक्षेत्र-रोधी हथियार (SAT-SAAW)
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 160 उपग्रह-आधारित स्मार्ट वायुक्षेत्र-रोधी हथियार (SAT-SAAW) तथा संबंधित उपकरणों की खरीद हेतु भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 810 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया है।
स्मार्ट वायुक्षेत्र-रोधी हथियार (SAT-SAAW) के बारे में
- SAT-SAAW एक वायु से भूमि पर मार करने वाला सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम है, जिसे अत्यंत लंबी दूरी से दुश्मन के वायुक्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
- इस हथियार का डिजाइन एवं विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है और इसमें 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी।
- इसे जैगुआर, हॉक और सुखोई-30MKI विमानों से प्रक्षेपित किया जा सकता है। इससे भारतीय वायु सेना को सीधे लक्ष्य के निकट गए बिना वायुक्षेत्र संबंधी लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाया जा सकेगा।
- SAT-SAAW की आपूर्ति 2027-28 से 2028-29 के बीच निर्धारित है।
- स्वदेशी SAAW परियोजना को प्रथम बार 2013 में स्वीकृति दी गई थी। इसके उड़ान परीक्षण 2016 से 2021 के बीच किए गए और इसे आधिकारिक रूप से 2021 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया।
स्रोत: AIR
नाओएरो
पाठ्यक्रम: GS1/समाचारों में स्थान
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में राष्ट्रपति डेविड अडियांग ने घोषणा की कि नाउरू को अब नाओएरो के नाम से जाना जाएगा।
- यह परिवर्तन एक पारंपरिक नाम, भाषा और राष्ट्रीय पहचान को पुनर्स्थापित करता है।
नाओएरो के बारे में
- नाओएरो दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है। यह दक्षिण-पूर्वी माइक्रोनेशिया में स्थित एक उभरे हुए प्रवाल द्वीप से बना है और भूमध्य रेखा से 25 मील (40 किमी) दक्षिण में स्थित है।
- नाओएरो विश्व का तीसरा सबसे छोटा देश है। वेटिकन सिटी विश्व का सबसे छोटा देश है।

- यहाँ लगभग 12,000 लोग निवास करते हैं। यह देश 1968 में यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के औपनिवेशिक शासन के बाद स्वतंत्र हुआ।
- इसका अंतरराष्ट्रीय कोड NRU से बदलकर NRO किया जा रहा है और इसके नागरिकों को नौरुआन के स्थान पर देई-नाओरो के नाम से जाना जाएगा।
स्रोत: IT
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संक्षिप्त समाचार 24-09-2026