भारत में भूजल प्रबंधन की आवश्यकता

पाठ्यक्रम:GS3/पर्यावरण

समाचारों में

  • हाल ही में यह उजागर किया गया है कि जनसंख्या वृद्धि और विकास भूजल पर दबाव डाल रहे हैं, जिसके लिए सतत प्रबंधन आवश्यक है।

भूजल

  • भूजल वह स्वच्छ जल है जो मृदा और चट्टानों के अंदर संग्रहित होता है और नदियों, धाराओं तथा आर्द्रभूमि आवासों को बनाए रखता है।
  • वे परतें जो इस जल को संग्रहित और प्रवाहित करती हैं, भूभृत (Aquifers) कहलाती हैं।
  • भूजल स्वाभाविक रूप से झरनों और नदियों को पोषित कर सकता है या कुओं, ट्यूबवेल एवं बोरवेल के माध्यम से निकाला जा सकता है।
  •  यह पृथ्वी के तरल स्वच्छ जल का लगभग 99% भाग है और सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है, जिनमें जलवायु लचीलापन भी शामिल है।

भारत की स्थिति

  • भारत में भूजल कृषि गतिविधियों और पेयजल आपूर्ति का प्रमुख आधार है, जो लगभग 62% सिंचाई की आवश्यकता, 85% ग्रामीण उपभोग एवं 50% शहरी मांग को पूरा करता है।
  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन हैं, जिनमें से कई केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) द्वारा संचालित होते हैं।
    •  CGWB अपने क्षेत्रीय अवलोकन कुओं के नेटवर्क के माध्यम से देशभर में नियमित रूप से भूजल स्तर की निगरानी करता है।
  •  भूजल प्रबंधन, एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन का हिस्सा है, जो भूभृतों को समझने, खतरों का समाधान करने और भूजल प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

भूजल प्रबंधन की आवश्यकता

  • भारत में विशाल लेकिन क्षेत्रीय रूप से विविध भूजल संसाधन हैं, जो अत्यधिक दोहन, गुणवत्ता में गिरावट और कमजोर विनियमन के कारण बढ़ते तनाव में हैं, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता खतरे में है।
  • भूजल प्रणालियों पर बढ़ता दबाव: तीव्र और अधिकांशतः अनियंत्रित पंपिंग ने देश के कई हिस्सों में जलस्तरों में तीव्रता से व्यापक गिरावट ला दी है, जो भूमिगत स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।
  • जल गुणवत्ता का ह्रास: खनन गतिविधियों, औद्योगिक अपशिष्ट और कृषि प्रथाओं से उत्पन्न प्रदूषण, साथ ही आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे प्राकृतिक तत्वों ने धीरे-धीरे भूजल की गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हुए हैं।
  • अनियंत्रित दोहन के कारक: सस्ती ड्रिलिंग तकनीकों और पंपिंग उपकरणों की उपलब्धता ने छोटे किसानों और निम्न-आय वाले परिवारों को निजी ट्यूबवेल बनाने तथा संचालित करने में सक्षम बनाया है।

पहल और प्रतिबद्धताएँ

  • बढ़ते भूजल संकट ने सरकार की प्रभावी प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया है, जिसे भारत की COP 21 प्रतिबद्धता द्वारा जलवायु लचीलापन और दीर्घकालिक विकास के लिए पुनः पुष्टि मिली है।
    •  प्रभावी भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6, SDG 11, SDG 12) को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • मॉडल ग्राउंडवॉटर बिल: यह राज्यों को भूजल दोहन नियंत्रित करने और सतत प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करता है।
    • इस विधेयक को 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाया गया है, और केंद्र सरकार जिम्मेदार भूजल प्रबंधन को प्रोत्साहित करने हेतु राज्यों के साथ बैठकों, संगोष्ठियों तथा राष्ट्रीय अंतरराज्यीय परिषद (NISC) के माध्यम से निरंतर संवाद बनाए रखती है।
  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR): 2021 में शुरू किया गया, यह अभियान जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक कार्रवाई को बढ़ावा देता है।
    • “यह अभियान वर्षा जल संचयन, जल निकायों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल शक्ति केंद्रों की स्थापना, वनीकरण तथा जन-जागरूकता पर केंद्रित है।
  • जल संचय जन भागीदारी (JSJB): 2024 में JSA: CTR के अंतर्गत शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूभृत और बोरवेल पुनर्भरण, तथा पुनर्भरण शाफ्टों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ाना है।
  • राष्ट्रीय भूभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM) (2012–2023): इसका उद्देश्य भूभृतों का लक्षण निर्धारण, भूजल उपलब्धता एवं गुणवत्ता का आकलन, भूभृत मानचित्र तैयार करना और सतत भूजल प्रबंधन को समर्थन देना था।
    • NAQUIM 2.0 (2023–वर्तमान): CGWB द्वारा लागू, यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन भूजल डेटा और पंचायत स्तर तक वैज्ञानिक इनपुट प्रदान करता है, विशेषकर जल-संकटग्रस्त और संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • भूजल कृत्रिम पुनर्भरण हेतु मास्टर प्लान–2020: यह क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्भरण तकनीकों को बढ़ावा देता है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सतही और भूमिगत पुनर्भरण तथा शहरी, पहाड़ी एवं तटीय क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन पर बल दिया गया है।
  • अटल भूजल योजना (अटल जल): 2019 में शुरू की गई, यह सात राज्यों के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में सामुदायिक नेतृत्व वाले सतत भूजल प्रबंधन को प्रोत्साहित करती है।
    • यह योजना जागरूकता, क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक नियोजन के माध्यम से जल जीवन मिशन, किसानों की आय वृद्धि तथा जिम्मेदार जल उपयोग को समर्थन प्रदान करती है। पाँच वर्षीय इस योजना का व्यय ₹6,000 करोड़ है, जिसमें संस्थागत सुदृढ़ीकरण तथा प्रोत्साहन-आधारित, परिणामोन्मुखी उपलब्धियों के लिए वित्तपोषण शामिल है।
  • मिशन अमृत सरोवर (2022): इसके अंतर्गत देश के सभी जिलों में अमृत सरोवर (तालाब) बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक तालाब का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) और जल भंडारण क्षमता लगभग 10,000 घन मीटर निर्धारित है।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • भारत की जल सुरक्षा के लिए भूजल अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु यह अत्यधिक दोहन, गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तनशीलता से बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है।
  • इसका समाधान करने हेतु भारत ने जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें नीतिगत सुधार, वैज्ञानिक मूल्यांकन, अवसंरचना विकास और सामुदायिक भागीदारी को जोड़ा गया है।
    •  प्रमुख पहलों ने सामूहिक रूप से भूजल विनियमन, पुनर्भरण, निगरानी और मांग प्रबंधन को सुदृढ़ किया है, जिन्हें मजबूत डेटा प्रणालियों एवं स्थानीय संस्थानों का समर्थन प्राप्त है। यह सतत और जलवायु-लचीला भूजल शासन की नींव रखता है।

स्रोत :PIB

 

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