पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने वर्ष 2026 में आधार वर्ष 2022-23 के साथ राष्ट्रीय लेखा शृंखला का 8वाँ संशोधित संस्करण जारी किया, जिसमें कई पद्धतिगत परिवर्तन किए गए हैं। इनमें विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA) के आकलन में विशेष रूप से दोहरे अपस्फीति की शुरुआत उल्लेखनीय है।
राष्ट्रीय लेखा क्या है?
- राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (NAS) किसी अर्थव्यवस्था के उत्पादन, आय और व्यय का एक व्यवस्थित चित्र प्रस्तुत करती है।
- इनके माध्यम से सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल मूल्य वर्धन (GVA), उपभोग, निवेश, बचत और बाह्य व्यापार जैसे समष्टिगत आर्थिक संकेतकों का आकलन किया जाता है। यह आकलन संयुक्त राष्ट्र की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (SNA) के ढाँचे के अनुरूप किया जाता है।
आधार वर्ष का विकास
- भारत समय-समय पर अपनी राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के आधार वर्ष में संशोधन करता रहा है।
- इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को समाहित करना, आँकड़ों के स्रोतों में सुधार करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि स्थिर-मूल्य पर आधारित अनुमान समकालीन अर्थव्यवस्था का अधिक यथार्थ प्रतिनिधित्व करें।

गणना की पद्धति
- GDP को तीन विधियों से देखा जा सकता है:
- उत्पादन विधि: उद्योगों का GVA + उत्पादों पर कर − सब्सिडी।
- व्यय विधि: अंतिम उपभोग + सकल पूंजी निर्माण + निर्यात − आयात।
- आय विधि: कर्मचारियों का पारिश्रमिक + परिचालन अधिशेष/मिश्रित आय + कर − सब्सिडी।
- वास्तविक GDP/GVA के आकलन के लिए वर्तमान मूल्यों पर आधारित आँकड़ों को उपयुक्त मूल्य अपस्फीतकों के माध्यम से मूल्य परिवर्तनों के लिए समायोजित करना आवश्यक होता है।
प्रमुख परिवर्तन: विनिर्माण क्षेत्र में दोहरी अपस्फीति
- पूर्ववर्ती पद्धति में एकल मूल्य सूचकांक का उपयोग किया जाता था, जिसके अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र के नाममात्र GVA को एक समग्र अपस्फीतक के माध्यम से वास्तविक GVA में परिवर्तित किया जाता था।
- 2022-23 की नई शृंखला में विनिर्माण क्षेत्र के लिए दोहरे अपस्फीति की पद्धति लागू की गई है, जिसमें निम्नलिखित को अलग-अलग समायोजित किया जाता है:
- विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं का मूल्य, और
- उत्पादन में प्रयुक्त आगतों (inputs) की लागत।
- 2022-23 की नई शृंखला में विनिर्माण क्षेत्र के लिए दोहरे अपस्फीति की पद्धति लागू की गई है, जिसमें निम्नलिखित को अलग-अलग समायोजित किया जाता है:
- MoSPI द्वारा भारतीय वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) के आँकड़ों तथा DPIIT के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जारी कारखाना-द्वार कीमतों पर आधारित प्राथमिक वस्तु-स्तरीय उत्पादनकर्ता मूल्य सूचकांकों (PPI) का उपयोग किया जाता है।
- उत्पादन PPI में अंतिम एवं मध्यवर्ती दोनों प्रकार की वस्तुएँ शामिल हैं। इनमें गेहूँ, दूध, बॉक्साइट, कोकिंग कोयला, विद्युत, परिष्कृत पाम तेल, बेसन, सूती धागा, बोरियाँ/गनी बैग, चमड़ा, नैफ्था, फॉस्फोरिक अम्ल, सीमेंट तथा अर्द्ध-तैयार लौह एवं इस्पात जैसी वस्तुएँ शामिल हैं।
- इस प्रकार, एक उद्योग के उत्पादन की कीमत दूसरे उद्योग के लिए आगत की कीमत के रूप में कार्य कर सकती है।
- मूल्य के आधार पर वस्तुओं की रैंकिंग करने के बाद ऐसी वस्तुओं का चयन किया जाता है जो उत्पादन और आगत के मूल्य का 80% प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके बाद ASI से प्राप्त भारों का उपयोग प्रत्येक वस्तु को अलग-अलग अपस्फीत करने के लिए किया जाता है।
- 30 विनिर्माण श्रेणियों में से दो श्रेणियाँ—प्रसंस्कृत खाद्य एवं तेल तथा औषधियाँ—को बाहर रखा गया है, क्योंकि इनमें आयातित आगतों की हिस्सेदारी अधिक है और प्राथमिक वस्तु-स्तरीय उत्पादन PPI के साथ इनका प्रत्यक्ष मिलान करना कठिन है।
- जिन सेवा आगतों के लिए PPI उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए उपभोक्ता कीमतों तथा निहित अपस्फीतकों का उपयोग किया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन
- नई शृंखला में परिभाषित-लाभ पेंशन के उपचार में भी संशोधन किया गया है। अब सेवारत सरकारी कर्मचारियों के लिए अर्जित पेंशन अधिकारों के वर्तमान मूल्य का अनुमान लगाया जाता है, जबकि पूर्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किए गए पेंशन भुगतान को एक प्रॉक्सी के रूप में उपयोग किया जाता था।
महत्त्व
- दोहरे अपस्फीति की पद्धति वास्तविक विनिर्माण GVA का अधिक सैद्धांतिक रूप से उपयुक्त माप प्रदान कर सकती है, क्योंकि इसमें उत्पादन कीमतों और आगत कीमतों में होने वाले परिवर्तनों को अलग-अलग दर्ज किया जाता है।
- वस्तु-स्तर पर अधिक विस्तृत आँकड़ों का उपयोग उत्पादन और मूल्य संबंधी आँकड़ों के बीच अधिक बेहतर संगति स्थापित करने में सहायक हो सकता है।
चिंताएँ और मुद्दे
- एक प्रमुख चिंता यह है कि भारत में PPI अभी भी प्रयोगात्मक अवस्था में है, जिससे आगत कीमतों के मापन की विश्वसनीयता और निरंतरता को लेकर प्रश्न उठते हैं।
- मध्यवर्ती आगतों, विशेषकर आयातित आगतों और सेवाओं का घरेलू PPI के साथ मिलान करना भी एक चुनौती बना हुआ है।
- फलतः वास्तविक विनिर्माण GVA में होने वाले परिवर्तनों की व्याख्या सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए और उनकी तुलना औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे अन्य संकेतकों के साथ भी की जानी चाहिए।
आगे की राह
- भारत को एक व्यापक PPI को संस्थागत रूप देना, वस्तु-स्तर पर मूल्य-संग्रहण में सुधार करना, ASI तथा प्रशासनिक आँकड़ा-स्रोतों को सुदृढ़ करना, आयातित आगतों और सेवाओं के कवरेज में सुधार करना तथा अपस्फीतकों के पारदर्शी दस्तावेजीकरण और समय-समय पर उनके सत्यापन को सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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