आचार्य विनोबा भावे
पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
चर्चा में
- प्रधानमंत्री ने आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
विनायक नरहरि भावे
- उनका जन्म 11 सितंबर 1895 को हुआ था। वे अहिंसा के प्रबल समर्थक एवं मानवाधिकारों के प्रबल पक्षधर थे।
- उन्हें प्रायः भारत के राष्ट्रीय शिक्षक तथा महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में जाना जाता है। वे एक प्रख्यात दार्शनिक भी थे।
- उन्होंने भगवद्गीता का मराठी में अनुवाद किया, जिसका नाम ‘गीताई’ रखा।
- उन्हें भूमि सुधार एवं ग्रामीण उत्थान के क्षेत्र में उनके कार्यों, विशेष रूप से भूदान आंदोलन के लिए स्मरण किया जाता है।
- उनके दर्शन में अहिंसा, सामाजिक समानता एवं स्वैच्छिक सेवा पर विशेष बल दिया गया।
महात्मा गांधी के साथ संबंध
- आचार्य विनोबा भावे का महात्मा गांधी के साथ संबंध वर्ष 1916 में प्रारंभ हुआ। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गांधीजी के एक व्याख्यान से भावे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी औपचारिक शिक्षा छोड़ने का निर्णय लिया।
- इसके बाद उन्होंने गांधीजी को पत्र लिखा। पत्राचार के क्रम के बाद गांधीजी ने उन्हें अहमदाबाद स्थित कोचरब आश्रम में व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए आमंत्रित किया।
- यह मुलाकात विनोबा भावे के जीवन में एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुई। उन्होंने गांधीजी के विचारों तथा खादी, ग्रामोद्योग, नई तालीम, स्वच्छता एवं सफाई जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों को अपनाया।
- वर्ष 1925 में गांधीजी ने केरल के वैकोम में मंदिर में दलितों के प्रवेश से संबंधित कार्य की देखरेख का दायित्व उन्हें सौंपा।
- वे गांधीजी के निकटतम सहयोगियों में शामिल हो गए तथा भारत के सामाजिक सुधार आंदोलनों के प्रमुख व्यक्तित्व बने। गांधीजी उन्हें अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी मानते थे।
विरासत
- उन्हें भारत के सर्वाधिक सम्मानित आध्यात्मिक नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों एवं सामाजिक सुधारकों में से एक के रूप में स्मरण किया जाता है।
- सादगी, करुणा एवं अहिंसा पर आधारित उनका जीवन भारत में सामाजिक न्याय, भूमि सुधार एवं सामूहिक सद्भाव की दिशा में एक शाश्वत प्रेरणा का स्रोत है।
- उनके विचार विकसित भारत के निर्माण की दिशा में हमारे प्रयासों को निरंतर प्रेरित करते हैं।
स्रोत: PIB
पेरिम द्वीप (मयून)
पाठ्यक्रम: GS1/समाचारों में स्थान
चर्चा में
- ईरान समर्थित हूती बलों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित पेरिम द्वीप, जिसे मयून के नाम से भी जाना जाता है, पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय बढ़त है, जो विश्व के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
पेरिम द्वीप (मयून)
- यह एक छोटा एवं निर्जन ज्वालामुखीय द्वीप है, जो यमन के पश्चिमी तट से लगभग 3.5 किलोमीटर दूर स्थित है।
- आकार में छोटा होने के बावजूद इसकी रणनीतिक स्थिति इसे नियंत्रित करने वाले पक्ष को लाल सागर एवं स्वेज नहर से होने वाले समुद्री आवागमन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव प्रदान करती है।
- इसकी स्थिति हूती बलों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर निगरानी एवं प्रभाव स्थापित करने की संभावित महत्त्वपूर्ण स्थिति प्रदान करती है।
- बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के एक अन्य प्रमुख समुद्री मार्ग के बाधित होने से इस जलमार्ग का महत्त्व अधिक बढ़ गया है।

स्रोत: IE
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
चर्चा में
- हाल ही में ब्रिक्स देशों ने सतत विकास को बढ़ावा देने, असमानता कम करने तथा वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन प्रदान करने में न्यू डेवलपमेंट बैंक की महत्त्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि की।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (मुख्यालय: शंघाई, चीन)
- न्यू डेवलपमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।
- इसकी स्थापना वर्ष 2015 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका द्वारा की गई थी।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक के 11 आधिकारिक सदस्य देश हैं, जिनमें पाँच संस्थापक सदस्य तथा बाद में शामिल किए गए छह सदस्य देश हैं।
- नए सदस्य देशों में बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, अल्जीरिया, कोलंबिया एवं उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
- इसकी सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के लिए खुली है, जिसमें ऋण लेने वाले एवं ऋण न लेने वाले दोनों प्रकार के सदस्य शामिल हो सकते हैं। यह प्रावधान न्यू डेवलपमेंट बैंक के अनुच्छेद 2 में किया गया है।
- इसका उद्देश्य उभरते बाजारों एवं विकासशील देशों में अवसंरचना एवं सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है।
- प्रारंभिक 100 अरब अमेरिकी डॉलर की अधिकृत पूंजी में पाँचों संस्थापक सदस्यों की समान हिस्सेदारी है, जिसकी कुल राशि 50 अरब अमेरिकी डॉलर है।
प्रमुख क्षेत्र

अधिदेश
- न्यू डेवलपमेंट बैंक सदस्य देशों के विकास उद्देश्यों तथा सतत विकास लक्ष्यों एवं पेरिस समझौते के अंतर्गत उनकी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप अवसंरचना एवं सतत विकास परियोजनाओं को सहायता प्रदान करता है।
- यह उन उच्च-प्रभाव वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देता है जो:
- जलवायु-अनुकूल हों;
- आपदा-रोधी हों;
- प्रौद्योगिकी-समन्वित हों; तथा
- सामाजिक रूप से समावेशी हों।
Source: TH
भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक बना
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 785.7 बिलियन डॉलर हो गया है, जिससे भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक देश बन गया है।
- भारत ने रूस को पीछे छोड़ते हुए चौथा स्थान प्राप्त किया है और अब केवल चीन, जापान एवं स्विट्जरलैंड से पीछे है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्या है?
- विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्राओं में धारित परिसंपत्तियाँ होती हैं। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- विदेशी मुद्राएँ: अमेरिकी डॉलर, यूरो, येन आदि सहित विभिन्न विदेशी मुद्राओं का भंडार।
- विशेष आहरण अधिकार (SDRs): ये अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्तियाँ हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा आवंटित किया जाता है।
- IMF में आरक्षित स्थिति: वह राशि जिसे कोई देश बिना किसी शर्त के IMF से प्राप्त कर सकता है।
- स्वर्ण भंडार
- भारत में विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) हैं।
- महत्त्व: विदेशी मुद्रा भंडार भारत को आयातों के वित्तपोषण, रुपये की स्थिरता बनाए रखने, निवेशकों का विश्वास बनाए रखने तथा आर्थिक दबाव के समय बाह्य भुगतान दायित्वों को पूरा करने में सहायता करता है।
स्रोत: ET
S-400 ट्रायम्फ
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025–26 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की S-400 वायु रक्षा प्रणाली की परिचालन भूमिका को रेखांकित किया गया है।
S-400 ट्रायम्फ के बारे में
- S-400 ट्रायम्फ रूस द्वारा विकसित एक दीर्घ दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है।
- लक्ष्य भेदन: इसे विमानों, क्रूज मिसाइलों, मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) तथा कुछ प्रकार के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों सहित विभिन्न हवाई खतरों से बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- बहु-स्तरीय रक्षा: यह विभिन्न प्रकार की अवरोधक मिसाइलों का उपयोग कर सकती है, जिनकी सामान्यतः उद्धृत अधिकतम मारक क्षमता लगभग 40 किमी, 120 किमी, 250 किमी तथा 400 किमी तक है।
- गतिशीलता: यह एक पूर्णतः गतिशील प्रणाली है, जिसमें कमान एवं नियंत्रण केंद्र, स्वचालित निगरानी एवं लक्ष्य-निर्धारण प्रणालियाँ, प्रक्षेपक तथा सहायक वाहन शामिल हैं।
- संस्करण: S-400F, S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली का जहाज-आधारित संस्करण है।
स्रोत: TH
लकड़बग्घा
पाठ्यक्रम: GS3/समाचारों में प्रजातियाँ
संदर्भ
- एक नए अध्ययन में पाया गया है कि चित्तीदार लकड़बग्घों में मादाएँ नर पर इसलिए प्रभुत्व स्थापित करती हैं क्योंकि वे आकार या शक्ति में बड़ी होने के बजाय सामाजिक गठबंधनों के अधिक व्यापक नेटवर्क रखती हैं।
लकड़बग्घा
- लकड़बग्घे (हाइनिडी कुल) कुत्ते के समान दिखने वाले मांसाहारी जीव हैं, जो एशिया एवं अफ्रीका में पाए जाते हैं तथा मुख्यतः मृतजीवी प्रवृत्ति के लिए जाने जाते हैं।
- लकड़बग्घों की चार विशिष्ट प्रजातियाँ हैं:
- धारीदार लकड़बग्घा (Hyaena hyaena): यह मध्य-पूर्व एवं एशिया के साथ-साथ भारत में भी पाया जाता है।
- भूरा लकड़बग्घा (Parahyaena brunnea)
- अर्थवुल्फ (Proteles cristatus)
- चित्तीदार लकड़बग्घा (Crocuta crocuta)
- इनमें रात्रि के समय देखने एवं सुनने की उत्कृष्ट क्षमता होती है।
- भारत में मुख्यतः धारीदार लकड़बग्घा (Hyaena hyaena) पाया जाता है।
- इसका वितरण शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के विभिन्न भू-दृश्यों में होता है, जिनमें घासभूमियाँ, झाड़ियाँ, मरुस्थल एवं खुले वन शामिल हैं।
- यह मृत जीवों के शवों का भक्षण करके तथा पोषक तत्त्वों के पुनर्चक्रण एवं रोगों के नियमन में योगदान देकर पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संरक्षण स्थिति
- चित्तीदार लकड़बग्घा: कम चिंताजनक
- धारीदार लकड़बग्घा: निकट संकटग्रस्त
- भूरा लकड़बग्घा: निकट संकटग्रस्त
- अर्थवुल्फ: कम चिंताजनक
स्रोत: TH
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