पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर आगामी भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर चर्चा पुनः प्रारंभ की है।
भारत-अफ्रीका मंच
- भारत-अफ्रीका मंच, अफ्रीकी संघ के नेतृत्व में भारत एवं अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग का सर्वोच्च संस्थागत मंच है।
- इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी।
- इसका उद्देश्य भारत एवं अफ्रीका के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण तथा जन-से-जन संबंधों को सुदृढ़ करना है।
- यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग, समावेशी विकास, बहुपक्षवाद एवं सतत साझेदारी के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- वर्ष 2008 में प्रथम शिखर सम्मेलन के बाद वर्ष 2011 एवं 2015 में भी शिखर सम्मेलन आयोजित किए गए। अगला शिखर सम्मेलन वर्ष 2026 में आयोजित होने की संभावना है।
अफ्रीकी संघ
- अफ्रीकी संघ एक महाद्वीपीय संगठन है, जिसमें अफ्रीकी महाद्वीप के 55 सदस्य देश शामिल हैं।
- इसकी औपचारिक स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी।
- यह अफ्रीकी एकता संगठन का उत्तराधिकारी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी और जिसने 1999 तक कार्य किया।
- उद्देश्य: अफ्रीका की क्षमता का उपयोग करना तथा अफ्रीकी देशों के बीच बढ़े हुए सहयोग एवं एकीकरण को बढ़ावा देना, ताकि अफ्रीका के आर्थिक विकास एवं समृद्धि को गति दी जा सके।
भारत एवं अफ्रीका संबंध
- बढ़ता सहयोग: विगत एक दशक में भारत से अफ्रीकी देशों की लगभग 50 उच्च-स्तरीय यात्राएँ हुई हैं, जबकि अफ्रीकी नेताओं ने भारत की लगभग 100 यात्राएँ की हैं।
- भारत ने वर्ष 2018 से अफ्रीका में 17 नए राजनयिक मिशन स्थापित किए हैं, जिससे अफ्रीका में भारत की राजनयिक उपस्थिति 46 देशों तक पहुँच गई है।
- द्विपक्षीय व्यापार: भारत वर्तमान में अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा शीर्ष पाँच निवेशकों में शामिल है।
- वित्त वर्ष 2024–25 में भारत एवं अफ्रीका के बीच व्यापार 81.99 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 42.6 अरब अमेरिकी डॉलर तथा आयात 39.2 अरब अमेरिकी डॉलर था।
- भारत के कुल ऊर्जा आयात में अफ्रीका की हिस्सेदारी लगभग 10% है।
- निवेश: वर्ष 1996 से 2025 के बीच अफ्रीका में भारत का संचयी निवेश लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। भारत अफ्रीका के शीर्ष पाँच निवेशकों में शामिल है।
- भारत ने अब तक 41 अफ्रीकी देशों को 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की 190 से अधिक ऋण सहायता व्यवस्थाएँ प्रदान की हैं।
- लगभग 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की कुल 220 परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं।
- स्वास्थ्य: भारत अफ्रीका की लगभग 50% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है और कोविड-19 महामारी के दौरान एक विश्वसनीय साझेदार रहा है।
- भारत नाइजीरिया, तंजानिया, सेनेगल एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में औषधि निर्माण के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार कर रहा है।
- अफ्रीका में भारत का प्रथम विदेशी जन औषधि केंद्र मॉरीशस में स्थापित किया गया है।
- रक्षा एवं समुद्री सहयोग: भारत अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के लिए लगभग 5,000 शांति सैनिकों का योगदान करता है। साथ ही, समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती-रोधी अभियानों तथा रक्षा निर्यात के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया गया है।
- भारत अफ्रीका-भारत क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करता है तथा भारत-अफ्रीका रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन का आयोजन करता है।
- ऊर्जा एवं सतत विकास: भारत की कुल ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 13% अफ्रीका से पूरा होता है।
- अब तक 39 अफ्रीकी देश अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से जुड़ चुके हैं, जबकि 9 अफ्रीकी देश आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन तथा 11 अफ्रीकी देश वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के सदस्य हैं।
- जन-से-जन संबंध: अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगभग 35 लाख अनुमानित है। वे आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- भारत ने पर्यटन, व्यापार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए 33 अफ्रीकी देशों के नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक वीजा सुविधा प्रदान की है।
- बहुपक्षीय स्तर पर भारत वैश्विक शासन व्यवस्था में अफ्रीका के अधिक प्रतिनिधित्व का सक्रिय समर्थन करता है।
- भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने में भारत ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत के लिए अफ्रीका का महत्त्व
- आर्थिक एवं व्यापारिक अवसर: अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती क्षमता भारतीय कंपनियों के लिए औषधि, वाहन, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार एवं अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर प्रदान करती है।
- ऊर्जा एवं महत्त्वपूर्ण खनिज: अफ्रीकी देश कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस तथा कोबाल्ट, लिथियम, मैंगनीज एवं ग्रेफाइट जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों के प्रमुख स्रोत हैं। ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक हैं।
- रणनीतिक एवं समुद्री महत्त्व: अफ्रीका का पूर्वी तट हिंद महासागर तथा एशिया, यूरोप एवं मध्य पूर्व को जोड़ने वाले महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित है।
- इसलिए अफ्रीकी तटीय देशों के साथ सहयोग भारत की समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री डकैती, आतंकवाद एवं अवैध तस्करी से निपटने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
- वैश्विक दक्षिण की साझेदारी: संयुक्त राष्ट्र, जी-20 एवं विश्व व्यापार संगठन जैसे मंचों पर वैश्विक दक्षिण की आवाज को सुदृढ़ करने के लिए अफ्रीका भारत का एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है।
- भू-राजनीतिक महत्त्व: अफ्रीका के साथ बढ़ता सहयोग भारत को बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण, राजनयिक साझेदारियों के विविधीकरण तथा विकासशील विश्व में अपने प्रभाव को बढ़ाने में सहायता कर सकता है।
निष्कर्ष
- भारत-अफ्रीका संबंध ऐतिहासिक संबंधों, साझा विकासात्मक आकांक्षाओं एवं वैश्विक दक्षिण के साझा हितों पर आधारित हैं।
- आगे चलकर पारस्परिक सम्मान, सह-विकास एवं स्थानीय प्राथमिकताओं पर आधारित साझेदारी इन संबंधों को विकासशील विश्व के साथ भारत के संबंधों का एक सुदृढ़ आधार बना सकती है।
Source: TH
Next article
संक्षिप्त समाचार 14-09-2026