पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत ने आय-आधारित गरीबी को कम किया है, किंतु व्यापक आर्थिक असुरक्षा और सीमित ऊर्ध्वगामी गतिशीलता बनी हुई है। इससे नीतिगत ध्यान गरीबी उन्मूलन से आय सुरक्षा एवं गतिशीलता की ओर स्थानांतरित हुआ है।
कल्याण मापन का बदलता दृष्टिकोण
- पारंपरिक गरीबी मापदंड व्यक्तियों को एक निश्चित आय सीमा के आधार पर गरीब या गैर-गरीब के रूप में वर्गीकृत करते हैं।
- विश्व बैंक ने कल्याण को मापने हेतु एक उचित जीवन स्तर से दूरी का आकलन करने का प्रस्ताव रखा है।
- यह दृष्टिकोण कल्याण को द्विआधारी स्थिति के बजाय एक निरंतरता के रूप में देखता है।
- इससे उन जनसंख्या समूहों की पहचान करने में सहायता मिलती है जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं, किंतु आर्थिक स्थिरता से वंचित हैं।
भारत के विकास अनुभव की प्रवृत्तियाँ
- गरीबी में कमी लेकिन असुरक्षा में वृद्धि: आर्थिक विकास के कारण बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा पार कर चुके हैं, किंतु उनमें से कई अभी भी कम और अस्थिर आय के साथ जीवनयापन कर रहे हैं।
- असुरक्षित मध्यम वर्ग का उदय: भारत में स्थिर और सुरक्षित मध्यम वर्ग के बजाय “असुरक्षित मध्यम वर्ग” का विस्तार हो रहा है। इस समूह की विशेषता सीमित बचत, सामाजिक सुरक्षा का अभाव एवं अनिश्चित रोजगार स्थितियाँ हैं।
- कार्यबल का अनौपचारिककरण: भारत के कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, जहाँ रोजगार की सुरक्षा, लिखित अनुबंध और सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध नहीं हैं।
- आर्थिक क्षेत्रीय असंतुलन: विनिर्माण क्षेत्र पर्याप्त रूप से विस्तारित नहीं हुआ है ताकि कृषि से अधिशेष श्रम को समाहित कर सके। कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा कृषि में संलग्न है, जबकि इसका GDP में योगदान कम है।
- बढ़ती असमानता: आर्थिक विकास के साथ आय और संपत्ति की असमानता बढ़ी है। राष्ट्रीय आय का असमान रूप से बड़ा हिस्सा उच्च आय समूहों में केंद्रित है।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- श्रम बाज़ार संकट: उच्च स्तर की बेरोज़गारी, विशेषकर युवाओं और शिक्षित व्यक्तियों में, बनी हुई है।
- परिवारों की वित्तीय अस्थिरता: घरेलू वित्तीय बचत में कमी आई है, जबकि ऋण स्तर बढ़े हैं।
- मानव विकास चुनौतियाँ: बाल कुपोषण और अवरुद्ध वृद्धि (stunting) जैसी समस्याएँ अभी भी गंभीर हैं।
- खराब स्वास्थ्य और पोषण परिणाम दीर्घकालिक उत्पादकता और आर्थिक गतिशीलता को प्रभावित करते हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): युवाओं को उद्योग-संबंधी कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार क्षमता और रोजगारों के अवसरों को बढ़ाना।
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने हेतु शुरू की गई, जिससे बड़े पैमाने पर औपचारिक रोजगार उत्पन्न हो सकता है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): आधार, UPI एवं DBT जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया, रिसाव को कम किया और प्रत्यक्ष आय सहायता सक्षम की, जिससे घरेलू लचीलापन बढ़ा।
- ई-श्रम पोर्टल: असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है, ताकि सामाजिक सुरक्षा लाभों की लक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
आगे की राह
- सरकार को वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली जैसे श्रम-प्रधान विनिर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर उत्पन्न हों।
- सरकार को शिक्षा में सार्वजनिक निवेश बढ़ाना चाहिए, जिससे सीखने के परिणाम और कार्यबल की रोजगार क्षमता में सुधार हो।
- सरकार को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहिए, ताकि असुरक्षित परिवारों को समय पर और लक्षित वित्तीय सहायता मिल सके।
Source: TH