पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- विभाग-संबंधित वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 201वीं रिपोर्ट, जिसका शीर्षक “भारत में व्यवसाय करना: आगे की राह” है, संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस क्या है?
- ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (EoDB) से आशय उस सीमा से है, जिस तक नियामक, प्रशासनिक और संस्थागत वातावरण व्यवसायों को न्यूनतम लागत, समय एवं प्रक्रियागत बाधाओं के साथ शुरू करने, संचालित करने, विस्तार करने तथा बंद करने में सक्षम बनाता है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में भारत की प्रगति
- भारत ने विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट में अपनी रैंकिंग 2014 में 142 से सुधारकर 2019 में 63 कर ली, जो नियामक वातावरण में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है।
- IMD विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग में भारत की स्थिति 2021 में 43वें स्थान से सुधरकर 2025 में 41वें स्थान पर पहुँच गई।
- भारत को विश्व बैंक के गवटेक परिपक्वता सूचकांक में लगातार समूह A में स्थान दिया गया है, जो उन्नत डिजिटल शासन क्षमताओं को दर्शाता है।
- सरकार की अनुपालन भार कम करने (RCB) की पहल के परिणामस्वरूप केंद्र और राज्य स्तर के कानूनों के अंतर्गत 47,000 से अधिक अनुपालनों को कम, सरल, डिजिटलीकृत या अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली (NSWS): यह व्यवसायों को विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय अनुमोदनों के लिए आवेदन करने हेतु एक एकीकृत मंच प्रदान करती है।
- राज्य-स्तरीय सिंगल विंडो प्रणालियों को API-आधारित कड़ियों के माध्यम से NSWS के साथ एकीकृत किया गया है।
- बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP): BRAP राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कारोबारी सुधार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करके प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है।
- इसका उद्देश्य अनुमोदन, निरीक्षण और व्यावसायिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सुधारों के माध्यम से नियामक वातावरण को बेहतर बनाना है।
- जन विश्वास सुधार: जन विश्वास सुधारों के अंतर्गत व्यवसाय से संबंधित सैकड़ों छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। इन सुधारों से प्रक्रियागत उल्लंघनों के लिए आपराधिक अभियोजन के भय को कम किया गया है और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन मिला है।
- ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS): TReDS ने कॉरपोरेट खरीदारों और सरकारी संस्थाओं से भुगतान की शीघ्र प्राप्ति को सक्षम बनाकर MSMEs की तरलता में सुधार किया है।
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत बुनियादी ढाँचा नियोजन को बढ़ावा देती है।
- इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होती है और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार होता है।
चुनौतियाँ
- राज्यों के स्तर पर असमान प्रदर्शन: सुधारों का कार्यान्वयन विभिन्न राज्यों तथा प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अलग-अलग है। इससे देशभर में कारोबारी वातावरण में असमानता उत्पन्न होती है।
- बुनियादी ढाँचे से संबंधित बाधाएँ: नियामक और बुनियादी ढाँचे संबंधी बाधाएँ लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ाती रहती हैं, क्योंकि बहु-माध्यमीय संपर्क, भंडारण, कोल्ड चेन, माल ढुलाई एवं संचालन तथा अंतिम छोर तक संपर्क जैसी सुविधाओं में अभी भी कमियाँ विद्यमान हैं।
- ऋण तक सीमित पहुँच: MSMEs, स्टार्ट-अप और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को दस्तावेजीकरण की अधिक आवश्यकताओं, जमानत संबंधी बाधाओं तथा ऋण की असमान उपलब्धता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- विखंडित नियामक ढाँचा: व्यवसायों को अभी भी विभिन्न विभागों द्वारा जारी अनेक लाइसेंसों, अनुमोदनों और एक-दूसरे से ओवरलैपिंग निरीक्षणों का सामना करना पड़ता है। विभिन्न कानूनों के अंतर्गत समानांतर निरीक्षणों से प्रयासों का दोहराव होता है।
समिति की सिफारिशें
- विभाग को नियामक अनुपालन पोर्टल को सुदृढ़ करना चाहिए तथा बुनियादी स्तर पर अनुपालन सुधारों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए इसमें वास्तविक समय की शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रदर्शन संबंधी मापदंडों को एकीकृत करना चाहिए।
- समिति जोखिम-आधारित विनियमनों को अपनाकर तथा स्व-प्रमाणन और तृतीय-पक्ष प्रमाणन के उपयोग को बढ़ाकर नियामक ढाँचों के युक्तिकरण और एकीकरण की सिफारिश करती है।
- जन विश्वास सुधारों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए तथा छोटे प्रशासनिक त्रुटियों के लिए आपराधिक दंड के स्थान पर आनुपातिक दीवानी दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए।
स्रोत: PIB
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