भारत द्वारा रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को प्रोत्साहन देने पर बल 

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान और प्रौद्योगिकी / रक्षा

संदर्भ

  • ईरान और यूक्रेन संघर्षों में देखे जा रहे बदलते वॉरफेयर प्रवृतियों के बीच, भारत का रक्षा तंत्र सैन्य अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों के विकास के प्रयासों को तीव्र कर रहा है।

आधुनिक वॉरफेयर में AI का महत्व क्यों बढ़ रहा है?

  • युद्ध का रूपांतरण: AI युद्ध को मानव-शक्ति आधारित अभियानों से डेटा-आधारित और स्वायत्त प्रणालियों में बदल रहा है।
    • AI-संचालित ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियाँ निगरानी, टोही एवं सटीक हमलों को बेहतर बनाती हैं।
    • यह स्वचालित खतरा पहचान और प्रतिक्रिया प्रणालियों के माध्यम से साइबर वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूत करता है।
  • वैश्विक संघर्ष: AI-समर्थित तकनीकें टोही और सामरिक योजना क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से सुधारती हैं।
    • रूस–यूक्रेन संघर्ष में ड्रोन, उपग्रह खुफिया और AI-सहायता प्राप्त युद्धक्षेत्र विश्लेषण का व्यापक उपयोग बुद्धिमान युद्ध प्रणालियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
    • ईरान और पश्चिम एशिया संघर्ष में सैन्य लक्ष्य निर्धारण और परिचालन योजना हेतु AI-सहायता प्राप्त प्रणालियों का उपयोग किया गया।
  • चीन का बुद्धिमान युद्ध: चीन तीव्रता से AI को सैन्य अभियानों में एकीकृत कर रहा है, जिसमें स्वायत्त ड्रोन झुंड, रोबोटिक युद्ध प्लेटफ़ॉर्म और बुद्धिमान कमांड-एंड-कंट्रोल प्रणालियाँ शामिल हैं। इससे भारत के लिए स्वदेशी रक्षा AI प्रणालियाँ विकसित करने की तात्कालिकता बढ़ गई है।

भारत स्वदेशी AI प्रणालियाँ क्यों चाहता है?

  • रणनीतिक स्वायत्तता: रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी AI प्रणालियों पर निर्भरता भू-राजनीतिक तनावों के दौरान कमजोरियाँ उत्पन्न कर सकती है। स्वदेशी प्रणालियाँ महत्वपूर्ण सैन्य अवसंरचना पर संप्रभु नियंत्रण सुनिश्चित करती हैं।
  • डेटा सुरक्षा का महत्व: सैन्य AI प्रणालियाँ अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय जानकारी को संसाधित करती हैं। विदेशी AI प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता डेटा लीक या बाहरी निगरानी का जोखिम उत्पन्न कर सकती है।
  • लागत में कमी: रक्षा AI विकास भारत के स्टार्टअप और डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकता है और रणनीतिक तकनीकों से जुड़ी दीर्घकालिक आयात लागत को कम कर सकता है।

भारतीय AI स्टार्टअप्स की भूमिका

  • SarvamAI: यह कंपनी भारतीय उपयोग मामलों के लिए स्वदेशी आधारभूत AI मॉडल विकसित कर रही है। इसका ध्यान बहुभाषी और क्षेत्र-विशिष्ट AI प्रणालियों पर है।
  • BharatGen: यह स्वदेशी जनरेटिव AI तकनीकों पर कार्य कर रहा है। ये प्रणालियाँ सैन्य खुफिया और रणनीतिक संचार अनुप्रयोगों का समर्थन कर सकती हैं।

AI विकास को समर्थन देने वाली सरकारी पहल

  • IndiaAI मिशन: मार्च 2024 में स्वीकृत IndiaAI मिशन राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में कार्य करता है, जो AI अवसंरचना, अनुसंधान और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है, जिसमें रक्षा क्षेत्र को सीधे सेवा देने वाले शामिल हैं।
  • iDEX (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार): रक्षा भारत स्टार्टअप चुनौती के अंतर्गत iDEX स्टार्टअप्स और MSMEs को स्वदेशी AI, स्वायत्त प्रणालियाँ और निगरानी तकनीकें विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करता है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स केंद्र(CAIR): DRDO की यह प्रयोगशाला AI अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र है, जो बुद्धिमान प्रणालियों और साइबर रक्षा पर केंद्रित है।

चुनौतियाँ

  • विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता: AI प्रणालियों को उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) की आवश्यकता होती है। अधिकांश उच्च-स्तरीय चिप्स विदेशी कंपनियों द्वारा निर्मित होते हैं।
    • भारत में पर्याप्त घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता का अभाव है।
  • AI विकास की उच्च लागत: आधारभूत AI मॉडल विकसित करने के लिए विशाल कंप्यूटिंग अवसंरचना, व्यापक डेटा प्रशिक्षण और एनोटेशन, तथा निरंतर परीक्षण एवं परिष्करण की आवश्यकता होती है।
  • सीमित कंप्यूट अवसंरचना: भारतीय कंपनियाँ उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, उन्नत AI चिप्स की उपलब्धता और बड़े पैमाने पर डेटा केंद्र अवसंरचना तक पहुँच से संबंधित चुनौतियों का सामना करती रहती हैं।

निष्कर्ष

  • वैश्विक संघर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग ने यह प्रदर्शित किया है कि भविष्य का युद्ध बुद्धिमान प्रणालियों, स्वायत्त तकनीकों और वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण पर अधिकाधिक निर्भर होगा।
  • रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी AI क्षमताओं को बढ़ावा देने की भारत की पहल रणनीतिक स्वायत्तता, तकनीकी संप्रभुता और बुद्धिमान युद्ध के युग में सुदृढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारी की आवश्यकता को दर्शाती है।

Source: IE

 

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