निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि संसद द्वारा निर्वाचन आयोग (EC) की नियुक्तियों पर कानून बनाने में लंबे समय तक विफलता ‘निर्वाचितों की निरंकुशता’ को दर्शाती है।

सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियाँ (मई 2026)

  • ‘निर्वाचितों की निरंकुशता’: न्यायालय ने प्रश्न उठाया कि संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद संसद दशकों तक कानून बनाने में क्यों विफल रही, और कहा कि इसे ‘निर्वाचितों की निरंकुशता’ के रूप में देखा जाना चाहिए।
    • यह शक्ति के केंद्रीकरण और स्वतंत्र संस्थाओं पर कार्यपालिका के प्रभाव को लेकर न्यायिक चिंता को दर्शाता है।
  • संसदीय विमर्श पर परिचर्चा : न्यायालय ने पूछा कि क्या संसद ने अनूप बरनवाल निर्णय पर पर्याप्त परिचर्चा की और क्या न्यायिक अनुशंसाओं की भावना कानून में परिलक्षित हुई।

निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्थिति

  • अनुच्छेद 324: भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई है।
  • संरचना:
    • प्रारंभ में आयोग में केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) होता था।
    • 1993 से यह बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त (ECs) शामिल हैं।
  • नियुक्ति: भारत के राष्ट्रपति CEC और ECs की नियुक्ति करते हैं। अनुच्छेद 324(2) में कहा गया है कि नियुक्तियाँ संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन होंगी।
  • कार्य: लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं एवं परिषदों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण।
  • भूमिका और शक्तियाँ: मतदाता सूची तैयार करना, चुनाव कराना, आचार संहिता लागू करना, राजनीतिक दलों को मान्यता देना और चुनाव चिह्न आवंटित करना।
  • स्वतंत्रता: संविधान ने स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु प्रावधान किए हैं, जैसे CEC को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है, और नियुक्ति के बाद उनकी सेवा शर्तों में प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

पूर्व में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया

  • 2023 के कानून से पहले, विधि मंत्रालय उम्मीदवारों की सूची तैयार करता था, जिसे प्रधानमंत्री को भेजा जाता था। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को परामर्श देते थे और राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति करते थे।

निर्वाचन आयोग नियुक्ति कानून (2023)

  • संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 पारित किया।
  • इसमें चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया।
  • नई चयन समिति: प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री।

2023 के कानून से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ

  • कार्यपालिका का प्रभुत्व: तीन में से दो सदस्य कार्यपालिका से होने के कारण नियुक्तियों पर कार्यपालिका का नियंत्रण पुनः स्थापित हो गया।
  • न्यायिक निष्पक्षता का ह्रास: CJI को हटाने से संतुलन और निष्पक्षता कमजोर हुई।
  • चयन में व्यापक विवेकाधिकार: धारा 8(2) के अनुसार समिति खोज समिति की सूची से बाहर भी व्यक्तियों का चयन कर सकती है। इससे पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता कम हो सकती है।
  • रिक्ति के बावजूद वैधता: धारा 7(2) के अनुसार समिति में रिक्ति होने पर भी नियुक्तियाँ वैध रहेंगी। इससे सामूहिक निर्णय प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।

अनूप बरनवाल मामला (2023)

  • याचिकाकर्ताओं ने EC नियुक्तियों के लिए स्वतंत्र तंत्र की अनुपस्थिति को चुनौती दी।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग लोकतंत्र का संरक्षक है।
    • चुनावी अखंडता के लिए संस्थागत स्वतंत्रता आवश्यक है।
    • कार्यपालिका का एकाधिकार जनविश्वास को कमजोर कर सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय की 2023 अंतरिम व्यवस्था

  • नियुक्ति समिति: प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)।
  • संवैधानिक आधार: न्यायालय ने संविधान सभा की परिचर्चाओं, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की चिंताओं और लोकतंत्र एवं स्वतंत्र चुनावों के मूल संरचना सिद्धांतों पर विश्वास किया।

अनूप बरनवाल निर्णय में महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

  • लोकतंत्र का संरक्षक निर्वाचन आयोग: न्यायालय ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं।
  • मतदान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में: निर्णय ने मतदान अधिकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) से जोड़ा।
  • संस्थागत स्वतंत्रता: न्यायालय ने स्वतंत्र EC सचिवालय और EC के व्यय को भारत की संचित निधि से लेने की अनुशंसा की।
    • इसका उद्देश्य कार्यपालिका के वित्तीय दबाव से आयोग को मुक्त करना था।

सुझाए गए सुधार

  • स्वतंत्र कोलेजियम: प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI को शामिल करना।
  • पारदर्शी चयन मानदंड: पात्रता मानकों और चयन तर्क का सार्वजनिक प्रकटीकरण।
  • स्वतंत्र सचिवालय: कार्यपालिका पर प्रशासनिक निर्भरता कम करना।
  • वित्तीय स्वायत्तता: EC के व्यय को भारत की संचित निधि से लेना।
  • संसदीय समीक्षा: संवैधानिक नियुक्तियों पर समिति-आधारित विमर्श को सुदृढ़ करना।

स्रोत: IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS1/ समाज, GS2/ स्वास्थ्य/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था संदर्भ भारत की तीव्र गति से वृद्ध होती जनसंख्या उसके अस्पताल-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली की सीमाओं को उजागर कर रही है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक देखभाल तंत्र की आवश्यकता उत्पन्न हो रही है। वरिष्ठ नागरिक देखभाल प्रणाली की आवश्यकता संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA)...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा संदर्भ नीति आयोग ने भारत में विद्यालय शिक्षा प्रणाली पर नीति रिपोर्ट: समयगत विश्लेषण और गुणवत्ता संवर्द्धन हेतु नीतिगत रोडमैप जारी की है। परिचय यह रिपोर्ट एक नीतिगत दस्तावेज़ है जो भारत की विद्यालय शिक्षा प्रणाली का व्यापक, दशक-भर का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें प्रमुख मानदंड शामिल हैं जैसे – पहुँच और...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन / सामाजिक न्याय संदर्भ राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की कारागार सांख्यिकी 2024 रिपोर्ट ने दिल्ली की कारागार प्रणाली में गंभीर संरचनात्मक कमियों को उजागर किया है, जहाँ जेलों में देश का सर्वाधिक 194.6% अधिभोग दर दर्ज किया गया। भारत में कारागारों में बढ़ती भीड़भाड़ के कारण न्यायिक विलंब: आपराधिक मामलों की भारी लंबित...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध समाचार में भारत और कनाडा ने नई दिल्ली में प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के लिए वार्ता के दूसरे दौर को सफलतापूर्वक संपन्न किया। भारत–कनाडा सहयोग के क्षेत्र द्विपक्षीय तंत्र: दोनों पक्षों के बीच मंत्रीस्तरीय रणनीतिक, व्यापार और ऊर्जा संवाद; विदेश कार्यालय परामर्श; पर्यावरण पर संयुक्त समिति बैठक एवं अन्य क्षेत्र-विशिष्ट...
Read More

पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास  समाचार में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर से जुड़े दो प्रमुख ऐतिहासिक पड़ावों का स्मरण करता है: 1026 ईस्वी में महमूद ग़ज़नी द्वारा मंदिर पर प्रथम दर्ज आक्रमण के 1,000 वर्ष पूर्ण। मई 1951 में स्वतंत्रता-उपरांत मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष। सोमनाथ स्थान: गुजरात के सौराष्ट्र तट पर प्रभास पाटन। यह...
Read More

165वीं जयंती – रवीन्द्रनाथ टैगोर पाठ्यक्रम: GS1 / इतिहास एवं संस्कृति संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। परिचय रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को (25 बोइशाख, 1268 बंगाब्द, बंगाली पंचांग) कलकत्ता में हुआ। उनकी जयंती पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में “पोइशे बोइशाख” के रूप...
Read More
scroll to top