पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में आयुष क्षेत्र के लिए कई संसाधनों का प्रस्ताव किया।
- भारत का नया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) यूरोपीय संघ के साथ भारतीय चिकित्सकों और उत्पादों के लिए यूरोपीय बाज़ार में प्रवेश को अधिक सुगम बनाता है।
भारत में आयुष क्षेत्र
- आयुष में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल हैं।
- इसमें क्लीनिक, वेलनेस केंद्र, अनुसंधान, हर्बल उत्पाद, शिक्षा और समग्र स्वास्थ्य अभ्यास सम्मिलित हैं।
- भारत का आयुष क्षेत्र तीव्र गति से विस्तार कर रहा है, जिसे प्राकृतिक उपचारों की बढ़ती मांग, जागरूकता और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों का समर्थन प्राप्त है।
- हाल के वर्षों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और यह राजस्व एवं रोजगार के दृष्टिकोण से एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है।
संस्थागत ढाँचा और प्रमुख पहलें
- राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM): सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में आयुष को एकीकृत करने हेतु प्रमुख नीतिगत साधन।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं का सह-स्थान।
- आयुष अवसंरचना और मानव संसाधनों को सुदृढ़ करना।
- राष्ट्रीय महत्व के संस्थान: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (नई दिल्ली), राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (कोलकाता) तथा सिद्ध, यूनानी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए समर्पित राष्ट्रीय संस्थान।
- नियामक एवं अनुसंधान निकाय: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग।
- औषधीय पौधों का संवर्धन: राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड(NMPB) 32 राज्य बोर्डों के साथ मिलकर गुणवत्तापूर्ण खेती, मूल्य श्रृंखला और निर्यात को समर्थन देता है।
- प्रमुख योजनाएँ: AYURGYAN (शिक्षा और क्षमता निर्माण), आयुर्स्वास्थ्य योजना (समुदाय स्वास्थ्य और आयुष प्रणालियों द्वारा निवारक देखभाल)।
- 2026-27 के बजट में आयुष क्षेत्र का कुल आवंटन ₹4,408 करोड़ तक पहुँच गया, जो 2025-26 में ₹3,992 करोड़ और 2020-21 में ₹2,122 करोड़ था।
- तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गई, जिन्हें पारंपरिक चिकित्सा के स्वर्ण मानक के रूप में विकसित किया जाएगा, जैसे AIIMS वैज्ञानिक चिकित्सा के लिए है।
- बजट में जामनगर स्थित WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को उन्नत करने हेतु धनराशि का प्रावधान किया गया, ताकि भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक मानक निर्धारण और दस्तावेज़ीकरण में अग्रणी भूमिका निभा सके।
- राष्ट्रीय आयुष मिशन का बजट 66% बढ़ाकर ₹1,300 करोड़ किया गया है, ताकि स्थानीय आयुष अस्पतालों एवं औषधालयों का आधुनिकीकरण हो, आधुनिक अस्पतालों में आयुष क्लीनिक स्थापित किए जा सकें और वर्तमान केंद्रों को निवारक स्वास्थ्य पर केंद्रित किया जा सके।
- बजट में आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उन्नत करने हेतु भी धनराशि प्रदान की गई है।
- सरकार Bharat-VISTAAR नामक बहुभाषी एआई सहायक भी प्रस्तुत कर रही है, जो औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली जड़ी-बूटियाँ उगाने, वर्तमान बाज़ार मूल्य जानने एवं निर्यात हेतु फसल प्रमाणन पर वास्तविक समय में परामर्श देगा।
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की भूमिका
- भारत–यूरोपीय संघ FTA आयुष क्षेत्र को रणनीतिक लाभ प्रदान करता है:
- भारतीय आयुष चिकित्सकों के लिए डिग्री-मान्यता बाधाओं के बिना आसान गतिशीलता।
- सभी 27 यूरोपीय संघ देशों में भारतीय वेलनेस और आयुर्वेद व्यवसायों के लिए कानूनी निश्चितता।
- प्रयोगशाला परीक्षण और सुरक्षा प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता।
- भारत की पारंपरिक एवं डिजिटल लाइब्रेरी(TKDL) को जैव-चोरी से संरक्षण।
आयुष का महत्व
- निवारक, व्यक्तिगत और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देता है, जो आधुनिक चिकित्सा का पूरक है।
- भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का विस्तार करता है।
- वेलनेस पर्यटन और हर्बल औषधि निर्यात को बढ़ावा देता है।
- औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों के लिए आजीविका उत्पन्न करता है।
- वैश्विक स्वास्थ्य शासन में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
चुनौतियाँ
- कुछ क्षेत्रों में सीमित अवसंरचना और प्रशिक्षित जनशक्ति।
- उपचार प्रोटोकॉल और मानकीकरण का अभाव।
- हर्बल औषधियों में गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
- अप्रमाणित उपचारों और मिक्सोपैथी जैसी प्रथाओं पर आलोचना।
- वैश्विक विश्वास अर्जित करने हेतु सशक्त नैदानिक परीक्षण और साक्ष्य-आधारित प्रमाणीकरण की आवश्यकता।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- आयुष क्षेत्र भारत की स्वास्थ्य देखभाल और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख हिस्सा है, जो सस्ती एवं निवारक समाधान प्रदान करता है।
- वैश्विक मांग में वृद्धि के साथ यह वेलनेस मॉडल और आर्थिक प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य कर सकता है, किंतु परंपरा तथा आधुनिक विज्ञान के संतुलन हेतु एकीकरण, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण एवं नियामक चुनौतियों का समाधान सशक्त नीति, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से करना आवश्यक है।
Source :TH
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