पाठ्यक्रम: GS1/महिला सशक्तिकरण; GS3/रक्षा
समाचारों में
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा पर संसदीय परामर्शदात्री समिति को सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बारे में जानकारी दी गई।
सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी
- भारतीय सशस्त्र बलों में रोजगार लिंग-निरपेक्ष है, जिसमें पुरुष और महिला सैनिकों के बीच तैनाती या कार्य स्थितियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।
- तैनाती संगठनात्मक आवश्यकताओं और व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर की जाती है।
- महिलाएं तकनीकी और गैर-तकनीकी भूमिकाओं के लिए विभिन्न प्रवेश योजनाओं के माध्यम से शामिल हो सकती हैं, और अधिकांश रक्षा प्रशिक्षण संस्थान अब महिलाओं के लिए खुले हैं।

वर्तमान स्थिति और प्रगति
- रक्षा मंत्रालय (MoD) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय वायु सेना में महिलाओं की भागीदारी 13.4% है — जो तीनों सेवाओं में सबसे अधिक है — जबकि सेना में यह 6.85% और नौसेना में 6% है।
- 2024 में सेना में कुल 1,735 महिलाएं, वायु सेना में 1,614 और नौसेना में 674 महिलाएं कार्यरत थीं।
- 2005 में यह आंकड़े क्रमशः 767, 574 और 154 थे।
- सेना में महिलाओं के लिए 12 शाखाएं खुली हैं, जिनमें युद्धक शाखाएं भी शामिल हैं।
- नौसेना में पनडुब्बियों को छोड़कर सभी शाखाएं महिलाओं के लिए खुली हैं।
- वायु सेना की सभी शाखाएं महिलाओं के लिए खुली हैं।
सशस्त्र बलों में महिलाओं का महत्व
- विचार और अनुभव में विविधता: महिलाएं विविध दृष्टिकोण, रचनात्मक समाधान और विशिष्ट समस्या-समाधान शैली लाती हैं, जिससे निर्णय लेने की गुणवत्ता एवं मिशन की सफलता बढ़ती है।
- संचालन क्षमता में वृद्धि: आधुनिक युद्ध में तकनीक, खुफिया, संचार एवं लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता होती है, जिनमें महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जिससे सशस्त्र बलों की तत्परता और अनुकूलन क्षमता बढ़ती है।
- लिंग-निरपेक्ष प्रतिभा पूल: महिलाओं को शामिल करने से उपलब्ध प्रतिभा पूल का विस्तार होता है, जिससे सैन्य बलों को भर्ती की आवश्यकताओं को पूरा करने और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलती है।
- प्रेरणा और सामाजिक परिवर्तन: भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग का नेतृत्व किया, और वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह, सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छुक महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
- संघर्ष क्षमता और मनोबल: महिलाओं की उपस्थिति सशस्त्र बलों के समग्र मनोबल, अनुशासन और संघर्ष क्षमता को बढ़ाती है।
- चिकित्सा कोर से लेकर पायलट और कमांडिंग ऑफिसर तक की भूमिकाओं में उनकी उत्कृष्ट सेवा उनकी क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- वैश्विक मानकों की पूर्ति: महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत की सेनाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाती है, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में इसकी साख को सुदृढ़ करती है और कूटनीतिक जुड़ाव को बढ़ाती है।
वर्तमान चुनौतियाँ
- दूरस्थ तैनाती स्थलों पर कभी-कभी लिंग-संवेदनशील सुविधाओं की कमी पूर्ण एकीकरण में बाधा बनती है।
- नेतृत्व शैली को लेकर लिंग आधारित धारणाएं महिला कमांडिंग अधिकारियों की क्षमता को कम आंकती हैं।
- लॉजिस्टिक और सांस्कृतिक कारणों से महिलाएं अभी भी अग्रिम युद्धक भूमिकाओं से वंचित हैं।
Source :TH
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