पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
संदर्भ
- ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) के एक अध्ययन में पाया गया कि श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) के कार्यान्वयन के बावजूद, दिल्ली का औसत शीतकालीन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) वर्ष 2022–23 के 280 से बढ़कर वर्ष 2025–26 में 295 हो गया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लोगों तक वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुँचाने का एक साधन है।
- AQI की छह श्रेणियाँ हैं—अच्छी, संतोषजनक, मध्यम प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर।
- प्रस्तावित AQI में आठ प्रदूषकों (PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और Pb) को शामिल किया जाएगा, जिनके लिए अल्पकालिक (24 घंटे तक की औसत अवधि) राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं।
श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP)
- GRAP वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा लागू किया गया एक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तरों और पूर्वानुमानों के आधार पर क्रमशः अधिक कठोर उपाय अपनाकर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
| अवस्था | AQI श्रेणी | प्रमुख उपाय |
| अवस्था I | खराब (201–300) | धूल नियंत्रण संबंधी उपाय, सड़कों की मशीनी सफाई तथा पानी का छिड़काव |
| अवस्था II | बहुत खराब(301–400) | सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि, पार्किंग शुल्क बढ़ाना तथा धूल नियंत्रण उपायों को और सख्त करना |
| अवस्था III | गंभीर(401–450) | कुछ प्रदूषणकारी वाहनों तथा गैर-आवश्यक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध |
| अवस्था IV | गंभीर से अधिक ( 450 से अधिक) | वाहनों पर और कठोर नियंत्रण तथा निर्माण गतिविधियों का निलंबन |
दिल्ली के वायु गुणवत्ता संकट के वास्तविक कारण क्या हैं?
- दिल्ली की भौगोलिक स्थिति: दिल्ली दो दिशाओं से प्राकृतिक अवरोधों से घिरी हुई है। उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण-पश्चिम में अरावली की पहाड़ियाँ वायु के प्रवाह को बाधित करती हैं।
- इसके परिणामस्वरूप प्रदूषित वायु का प्रसार नहीं हो पाता और उसे बाहर निकलने का पर्याप्त मार्ग नहीं मिलता।
- तापमान प्रतिलोमन (नगरीय ऊष्मा द्वीप प्रभाव): सर्दियों के दौरान धरातल के निकट की वायु ऊपर की वायु की तुलना में अधिक ठंडी हो जाती है।
- यह प्रतिलोमन परत प्रदूषकों (जैसे कणिकीय पदार्थ और गैसों) को धरातल के निकट रोक लेती है तथा उन्हें ऊपरी वायुमंडल में ऊपर की ओर फैलने से रोकती है।

- वायु की कम गति: सर्दियों में सामान्यतः वायु की गति कम होती है, जिससे प्रदूषकों का क्षैतिज प्रसार घट जाता है और वे निम्न वायुमंडल में एकत्रित होने लगते हैं।
- फसल अवशेष जलाना: प्रत्येक वर्ष कटाई के बाद पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से बड़ी मात्रा में धुआँ और कणिकीय पदार्थ उत्सर्जित होते हैं।
- धूल और नगरीय प्रदूषण का वायुमंडल में फँसना: वाहनों तथा दहन के अन्य स्रोतों से होने वाला स्थानीय उत्सर्जन प्रदूषण में सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
- सर्दियों में सीमा परत की ऊँचाई कम होने के कारण नगरीय धूल और वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन वायुमंडल में अधिक समय तक बने रहते हैं, जिससे प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है।
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): वर्ष 2019 में शुरू किया गया NCAP भारत के चिह्नित शहरों और क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक व्यापक पहल है।
- यह कार्यक्रम वायु गुणवत्ता की निगरानी में सुधार, उत्सर्जन के अधिक कठोर मानकों को लागू करने तथा जन-जागरूकता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- भारत चरण-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानक: सरकार ने वर्ष 2020 में देशभर में वाहनों के लिए BS-VI उत्सर्जन मानक लागू किए।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): इसका उद्देश्य पारंपरिक जैवभार-आधारित खाना पकाने की विधियों के विकल्प के रूप में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उपयोग को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है।
- फेम (हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को तीव्रता से अपनाने और विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना): यह योजना वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण उत्पन्न वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करती है।
- सतत आवास के लिए हरित पहल (GRIHA): ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विकसित यह पहल भारत की हरित भवनों के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रणाली के रूप में कार्य करती है।
- अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम: स्वच्छ भारत अभियान सहित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट से संबंधित समस्याओं का समाधान करना तथा अपशिष्ट के अधिक स्वच्छ निपटान के तरीकों को बढ़ावा देना है।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत किया गया था।
- उद्देश्य: यह अधिनियम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान तथा समाधान के लिए एक आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
- आयोग की शक्तियों में शामिल हैं—
- वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संहिताएँ एवं दिशानिर्देश तैयार करना।
- निरीक्षण और विनियमन सहित विभिन्न मामलों पर निर्देश जारी करना, जो संबंधित व्यक्ति या प्राधिकरण के लिए बाध्यकारी होंगे।
- केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, पराली जलाने से प्रदूषण फैलाने वाले किसानों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित करना और उसकी वसूली करना।
- श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आदेश जारी करना।
- किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति में आयोग के आदेश या निर्देश संबंधित राज्य सरकारों, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा राज्य स्तरीय वैधानिक निकायों के आदेशों पर प्रभावी होंगे।
आगे की राह
- स्रोत पर उत्सर्जन में कमी: मुख्य रूप से आपातकालीन प्रतिबंधों पर निर्भर रहने के बजाय परिवहन, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों, अपशिष्ट जलाने तथा प्रदूषण के अन्य प्रमुख स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन में निरंतर कमी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- वायुमंडलीय क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण: यह स्वीकार करते हुए कि वायु प्रदूषण प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का समन्वित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- क्षेत्र-विशिष्ट हस्तक्षेप: सार्वजनिक परिवहन का विस्तार किया जाना चाहिए, सड़क की धूल पर नियंत्रण किया जाना चाहिए, औद्योगिक उत्सर्जन मानकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए तथा स्वच्छ ईंधन और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन: प्रतिबंधों के प्रभाव को मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव से अलग करके समझने के लिए उत्सर्जन की प्रवृतियों, प्रदूषण के स्रोतों से संबंधित आँकड़ों और मौसमी परिस्थितियों के आधार पर GRAP का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
स्रोत: HT