केरल के यहूदी समुदाय
पाठ्यक्रम: GS1 / इतिहास
संदर्भ
- एर्नाकुलम स्थित कडवुमभागम सिनेगॉग (यहूदी उपासना स्थल) और फोर्ट कोच्चि स्थित विरासत भवन कोडर हाउस से संबंधित हालिया घटनाओं ने केरल के घटती जनसंख्या वाले यहूदी समुदाय की ओर पुनः ध्यान आकर्षित किया है।
परिचय
- केरल में यहूदियों का प्रवास इस क्षेत्र के प्राचीन एवं समृद्ध मसाला व्यापार से जुड़ा हुआ है। राज्य के यहूदी मुख्यतः दो विशिष्ट समुदायों में विभाजित हैं—मलाबारी अथवा ‘काले यहूदी’ और परदेसी अथवा ‘श्वेत यहूदी’।
- कोच्चि में दो अन्य छोटे यहूदी समुदाय भी थे।
- बगदादी यहूदी: अरबी भाषा बोलने वाले ये यहूदी 18वीं और 19वीं शताब्दी में वर्तमान ईरान, इराक और अफगानिस्तान के क्षेत्रों से आए थे। समय के साथ इन्हें भी ‘श्वेत यहूदियों’ के रूप में वर्गीकृत किया जाने लगा।
- मेशुहरारिम : यह शब्द परदेसी यहूदी समुदाय के एक ऐसे समूह के लिए प्रयुक्त होता था, जिसमें यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए मुक्त दास, धर्मांतरित व्यक्ति तथा उनके वंशज शामिल थे।
मलाबारी यहूदी
- मलाबारी यहूदियों को कोचीन यहूदी भी कहा जाता है। वे अपने इतिहास को राजा सोलोमन के काल (10वीं शताब्दी ईसा पूर्व, लगभग 3,000 वर्ष पूर्व) से जोड़ते हैं।
- प्रारंभ में वे क्रैंगनोर (वर्तमान में त्रिशूर जिले का कोडुंगलूर) में बसे थे। इस समुदाय द्वारा इस स्थान को शिंगली कहा जाता था।
- 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के आगमन के पश्चात मलाबारी यहूदी क्रैंगनोर से दक्षिण की ओर कोच्चि चले गए।
- कडवुमभागम सिनेगॉग: यह एर्नाकुलम स्थित एक ऐतिहासिक यहूदी उपासना स्थल है, जो परंपरागत रूप से केरल के मलाबारी यहूदियों से संबंधित है।
परदेसी यहूदी
- परदेसी यहूदियों को ‘विदेशी यहूदी’ भी कहा जाता है। वे 15वीं और 16वीं शताब्दी में इबेरियाई प्रायद्वीप से भारतीय उपमहाद्वीप में आए थे।
- स्पेन और पुर्तगाल के कैथोलिक शासकों द्वारा उत्पीड़न के कारण उन्होंने भारत में शरण ली। वे मालाबार तट पर पहले से बसे यहूदी समुदायों के साथ रहने लगे। इसके अतिरिक्त, वे मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में भी बसे।
- कोच्चि के परदेसी यहूदी केरल के मसाला व्यापार में सक्रिय थे, जबकि मद्रास में बसे यहूदी गोलकुंडा के हीरों और अन्य बहुमूल्य रत्नों के व्यापार में संलग्न थे।
भारत में यहूदी जनसंख्या में गिरावट
- 1950 के दशक से केरल के यहूदियों का इज़राइल की ओर निरंतर प्रवास होता रहा है।
- अलियाह : वर्ष 1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद केरल से इज़राइल की ओर बड़े पैमाने पर यहूदी प्रवास हुआ।
- यहूदी समुदाय के लोगों के इज़राइल में आप्रवासन को ‘अलियाह’ कहा जाता है।
- केरल के परदेसी यहूदी समुदाय की अंतिम महिला सदस्य क्वीनि हालेगुआ का वर्ष 2024 में कोच्चि में निधन हो गया।
स्रोत: IE
काशी तमिल संगमम् (KTS 5.0)
पाठ्यक्रम: GS1 / संस्कृति
संदर्भ
- शिक्षा मंत्री ने काशी तमिल संगमम् (KTS 5.0) के पाँचवें संस्करण के लिए पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया।
- इस संस्करण की विषयवस्तु ‘तिरुक्कुरल पयिल्वोम्’ —आइए, तिरुक्कुरल सीखें है।
काशी तमिल संगमम् के बारे में
- यह कार्यक्रम तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का उत्सव मनाता है, उन्हें पुनः पुष्ट करता है और सुदृढ़ बनाता है। ये दोनों प्राचीन ज्ञान एवं शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
- यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
- काशी तमिल संगमम् का प्रथम संस्करण वर्ष 2022 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया था।
| तिरुक्कुरल के बारे मेंतिरुक्कुरल तमिल साहित्य की एक शास्त्रीय कृति है, जिसमें व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक जीवन और शासन के संबंध में नैतिक, दार्शनिक तथा व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।रचयिता: तिरुवल्लुवर, एक प्रतिष्ठित तमिल कवि एवं दार्शनिक।संरचना: इसमें 1,330 द्विपदियाँ (कुरल) हैं, जिन्हें 133 अध्यायों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक अध्याय में 10 द्विपदियाँ हैं।तीन प्रमुख भाग:अरम : सदाचार एवं नैतिकता।पोरुल : धन, संसाधन एवं सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था।इन्बम : प्रेम एवं आनंद।ये तीनों भाग अंततः वीडु अर्थात् मुक्ति अथवा मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। |
स्रोत: PIB
प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना
पाठ्यक्रम: GS2 / कल्याणकारी योजनाएँ
चर्चा में क्यों?
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) की पृष्ठभूमि
- इसे वर्ष 1995 में शुरू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 को प्रभावी बनाने का एक माध्यम है, जिसके अंतर्गत राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता की स्थिति में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
- यह पूर्णतः केंद्र द्वारा वित्तपोषित केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके अंतर्गत 100% केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले व्यक्ति को देश में कहीं भी न्यूनतम सामाजिक सहायता प्राप्त हो सके।
- यह योजना ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों को कवर करती है। इसके विभिन्न घटकों के अंतर्गत सामान्यतः लाभार्थी परिवार का गरीबी रेखा से नीचे होना आवश्यक है।
- प्रमुख घटक:
- वृद्धावस्था पेंशन।
- विधवा पेंशन।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पेंशन।
- परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर एकमुश्त पारिवारिक सहायता।

नवीनतम घटनाक्रम
- योजना का विस्तार: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक पाँच वर्षों के लिए जारी रखने की स्वीकृति दी है। इसके लिए कुल ₹53,428 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
- संशोधित नामकरण: संशोधित नामकरण के अंतर्गत इसके चार घटकों के नाम निम्नानुसार रखे गए हैं:
- प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना: वृद्धावस्था पेंशन के लिए।
- प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना: विधवा पेंशन के लिए।
- प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना: दिव्यांगता पेंशन के लिए।
- प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना: परिवार को एकमुश्त सहायता प्रदान करने के लिए।
- दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में परिवर्तन: संशोधित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के अंतर्गत पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत दिव्यांगता की निर्धारित सीमा को 80% से घटाकर कम-से-कम 40% कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम आयु सीमा भी हटा दी गई है, जिससे पात्र लाभार्थियों को जन्म से ही लाभ प्राप्त करने की अनुमति मिल सकेगी।
स्रोत: PIB
शामोंडा वायरस
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य
चर्चा में क्यों?
- फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शामोंडा वायरस के संक्रमण का मनुष्यों में प्रथम ज्ञात मामला दर्ज किया है।
परिचय
- शामोंडा एक पशु वायरस है, जो मिज नामक छोटे रक्तचूषक कीट के माध्यम से फैलता है। यह ऑर्थोबुन्यावायरस समूह के सिम्बू सीरोग्रुप से संबंधित है।
- इसी समूह में श्मालेनबर्ग वायरस और अकाबाने वायरस भी शामिल हैं।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- प्रमुख प्रभावित पशु: यह मुख्यतः मवेशियों को संक्रमित करता है।
- लक्षण: सामान्य लक्षणों में बुखार, दस्त और दूध उत्पादन में कमी शामिल हैं।
- पहचान: इस वायरस का प्रथम बार पता 1960 के दशक के मध्य में नाइजीरिया में चला था।
- भौगोलिक प्रसार: वर्ष 2026 तक इसके मामले पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका तथा जापान में छिटपुट रूप से दर्ज किए गए थे।
- संचरण का माध्यम: यह क्यूलिकोइड्स नामक छोटे रक्तचूषक कीटों के काटने से फैलता है।
- ये वही कीट हैं जो ब्लूटंग रोग और एपिज़ूटिक हैमरेजिक डिज़ीज़ जैसे पशु रोगों के प्रसार में भी भूमिका निभाते हैं।
स्रोत: TH
eMudhra द्वारा डिजिटल प्रमाणपत्र व्यवसाय से बाहर निकलने का निर्णय
पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
- डिजिटल सुरक्षा कंपनी eMudhra ने वेबसाइटों के लिए सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने के अपने वैश्विक व्यवसाय से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। इसमें भारत का कर पोर्टल भी शामिल है।
- प्रमुख ब्राउज़र निर्माताओं ने सुरक्षा संबंधी कमजोरियों के कारण इन प्रमाणपत्रों को अवरुद्ध कर दिया था। इससे वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
eMudhra के डिजिटल प्रमाणपत्र
- eMudhra बेंगलुरु स्थित एक प्रमाणन प्राधिकरण (CA) है। यह ऐसे डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करता है, जो किसी वेबसाइट या सॉफ्टवेयर प्रकाशक की प्रामाणिकता प्रमाणित करते हैं।
- ब्राउज़र इन प्रमाणपत्रों का उपयोग वेबसाइट की पहचान सत्यापित करने तथा एन्क्रिप्टेड (HTTPS/TLS) कनेक्शन स्थापित करने के लिए करते हैं।
- कोड-साइनिंग प्रमाणपत्र भी इसी प्रकार सॉफ्टवेयर की प्रामाणिकता प्रमाणित करते हैं तथा यह सुनिश्चित करने में सहायता करते हैं कि सॉफ्टवेयर वास्तविक प्रकाशक द्वारा जारी किया गया है और उसके साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है।
- eMudhra की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत भारतीय नियंत्रक प्रमाणन प्राधिकरण (CCA) से लाइसेंस प्राप्त है।
- कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 2015 में यह भारत की प्रथम ई-साइन सेवा प्रदाता बनी। कंपनी ने यह भी बताया था कि वित्त वर्ष 2022–23 तक उसने 6 करोड़ से अधिक डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किए थे।
- कंपनी भारत में डिजिटल दस्तावेज़ हस्ताक्षर सेवाएँ, उद्यमों के लिए सार्वजनिक कुंजी अवसंरचना (PKI) समाधान तथा अन्य पहचान एवं प्रमाणीकरण सेवाएँ भी प्रदान करती है।
प्रमाणपत्रों को अवरुद्ध करने का कारण
- आठ मध्यवर्ती प्रमाणपत्र 30 अप्रैल, 2025 को आयोजित एक कुंजी-निर्माण प्रक्रिया के दौरान बनाए गए थे।
- कुंजी को सुरक्षित रूप से लपेटने और खोलने की प्रक्रिया में एक त्रुटि के कारण सुदृढ़ कुंजियों के साथ कमजोर कुंजियों का एक अतिरिक्त समूह भी उत्पन्न हो गया। ये कमजोर कुंजियाँ ब्राउज़र के रूट स्टोर में प्रकाशित हो गईं।
- सभी आठ प्रमाणपत्रों में P-384 निजी कुंजियों के मान 256 से छोटे थे। इस कारण केवल 256 संभावित संख्याओं का परीक्षण करके इन कुंजियों को पुनः प्राप्त किया जा सकता था।
- किसी मध्यवर्ती प्रमाणपत्र की निजी कुंजी का उपयोग किसी भी वेबसाइट के लिए वैध दिखने वाला प्रमाणपत्र जारी करने हेतु किया जा सकता है। इससे निम्नलिखित खतरे उत्पन्न हो सकते हैं:
- फर्जी वेबसाइटें: उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों पर भेजना।
- मैन-इन-द-मिडिल (MITM) हमले: उपयोगकर्ता और वेबसाइट के बीच संचार को अवरोधित करना।
- दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर: हानिकारक सॉफ्टवेयर को प्रामाणिक दिखाने के लिए उस पर डिजिटल हस्ताक्षर करना।
स्रोत: IE
PHP2Shell
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- वेबसाइटों में उपयोग की जाने वाली प्रोग्रामिंग भाषा PHP में दो गंभीर सुरक्षा कमजोरियाँ सामने आईं।
- इनके कारण दुनिया भर में आपातकालीन सुरक्षा अपडेट जारी किए गए और एहतियातन कुछ सेवाओं को बंद करना पड़ा।
PHP के बारे में
- PHP का पूर्ण रूप हाइपरटेक्स्ट प्रीप्रोसेसर है। यह एक मुक्त स्रोत प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसका उपयोग गतिशील वेबसाइटों और वेब एप्लिकेशन के विकास में किया जाता है।
- यह वेबसाइटों को विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का प्रसंस्करण करने में सहायता करती है। उदाहरण के लिए, किसी खाते में लॉगिन करना, आवेदन जमा करना या ऑनलाइन खरीदारी करना।
- PHP का उपयोग निःशुल्क है और इसका रखरखाव स्वयंसेवकों के योगदान से किया जाता है।
- वर्डप्रेस , जो विश्व भर की 40% से अधिक वेबसाइटों को संचालित करने में उपयोग किया जाता है, PHP पर आधारित है। इन वेबसाइटों में ब्लॉग, सरकारी पोर्टल, समाचार वेबसाइटें और ऑनलाइन स्टोर शामिल हैं।
PHP2Shell क्या है?
- PHP2Shell, PHP में पाई गई दो गंभीर सुरक्षा कमजोरियों को दिया गया नाम है। इनके माध्यम से हमलावर प्रभावित वेब सर्वरों पर दूरस्थ रूप से दुर्भावनापूर्ण कोड निष्पादित कर सकते हैं।
- इन कमजोरियों के कारण कुछ परिस्थितियों में हमलावरों को लॉगिन किए बिना या सर्वर की मेमोरी में संग्रहीत संवेदनशील जानकारी तक पहुँच प्राप्त किए बिना भी हमला करने का अवसर मिल सकता है।
- ये कमजोरियाँ स्वयं PHP भाषा में उपस्थित हैं। प्रभावित कॉन्फ़िगरेशन और हमले की परिस्थितियों के आधार पर, वेबसाइट की अपनी प्रमाणीकरण जाँच पूरी होने से पहले भी इनका दुरुपयोग किया जा सकता है।
स्रोत: IE
रासायनिक हस्ताक्षर अथवा जैवचिह्न
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य; GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- विभिन्न रोगों के निदान को बेहतर बनाने के लिए रासायनिक हस्ताक्षरों अथवा जैवचिह्नों का अध्ययन किया जा रहा है। विशेष रूप से मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले रोगों के निदान में इनकी उपयोगिता पर ध्यान दिया जा रहा है।
परिचय
- रासायनिक हस्ताक्षर अथवा जैवचिह्न अणुओं, तत्वों या समस्थानिकों के ऐसे विशिष्ट प्रतिरूप हैं, जिन्हें शरीर में मापा जा सकता है।
- इनके परिणाम किसी रोग की उपस्थिति अथवा शरीर में चल रही किसी अंतर्निहित जैविक प्रक्रिया का संकेत दे सकते हैं।
- इनका पता रक्त, मस्तिष्कमेरु द्रव (CSF) तथा अन्य जैविक नमूनों में लगाया जा सकता है।
- इनकी सहायता से स्पष्ट लक्षण दिखाई देने से पहले ही कुछ रोगों की पहचान करना संभव हो सकता है।
प्रमुख अनुप्रयोग
- अल्जाइमर रोग: एमिलॉयड-बीटा और टाउ प्रोटीन, जिनमें फॉस्फोरिलेटेड टाउ (p-tau217) भी शामिल है, अल्जाइमर रोग से जुड़े जैविक परिवर्तनों की पहचान करने में सहायता कर सकते हैं।
- पार्किंसंस रोग: अल्फा-सिन्यूक्लिन एक ऐसा प्रोटीन है, जिसका अध्ययन पार्किंसंस रोग का पता लगाने और उसे समझने के लिए जैवचिह्न के रूप में किया जा रहा है।
- ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस: विशिष्ट प्रतिपिंडों की पहचान से उन मामलों का पता लगाने में सहायता मिल सकती है, जिनमें प्रतिरक्षा तंत्र मस्तिष्क पर हमला करता है।
- कैंसर का पता लगाना: मेटाबोलाइट्स और प्रोटीन में होने वाले परिवर्तन कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़े आणविक प्रतिरूपों की पहचान करने में शोधकर्ताओं की सहायता कर सकते हैं।
स्रोत: TH
सखारोव पुरस्कार, 2026
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को अपना सर्वोच्च मानवाधिकार सम्मान विचार की स्वतंत्रता के लिए सखारोव पुरस्कार प्रदान किया है।
- यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है, जब अमेरिका द्वारा न्यायालय को लक्षित करते हुए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
पुरस्कार के बारे में
- स्थापना: वर्ष 1988 में।
- नामकरण: इस पुरस्कार का नाम सोवियत संघ के असंतुष्ट विचारक और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंद्रेई सखारोव के नाम पर रखा गया है।
- उद्देश्य: मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने वाले व्यक्तियों तथा समूहों को सम्मानित करना।
- विजेताओं का चयन: अंतिम विजेता अथवा विजेताओं का चयन यूरोपीय संसद की अध्यक्षों के सम्मेलन द्वारा किया जाता है। इसका नेतृत्व यूरोपीय संसद का अध्यक्ष करता है तथा इसमें संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक समूहों के नेता शामिल होते हैं। इस प्रकार पुरस्कार विजेताओं का चयन व्यापक यूरोपीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है।
- पुरस्कार राशि: 50,000 यूरो।
- पुरस्कार समारोह: प्रत्येक वर्ष दिसंबर में फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय संसद में आयोजित किया जाता है।
क्या आप जानते हैं?
- सखारोव पुरस्कार के कई विजेता, जिनमें नेल्सन मंडेला, मलाला यूसुफजई और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो शामिल हैं, बाद में नोबेल शांति पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)
- अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) नीदरलैंड के हेग में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण है। यह संयुक्त राष्ट्र से कानूनी रूप से स्वतंत्र है।
- स्थापना: वर्ष 2002 में बहुपक्षीय रोम संविधि के अंतर्गत।
- यह अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के अधिकार क्षेत्र वाला पहला और एकमात्र स्थायी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है।
- इसके अधिकार क्षेत्र में निम्नलिखित अपराध शामिल हैं:
- नरसंहार ।
- मानवता के विरुद्ध अपराध ।
- युद्ध अपराध ।
- आक्रामकता का अपराध ।
- ICC में वर्तमान में 125 सदस्य राष्ट्र हैं। यूक्रेन हाल में इसमें शामिल होने वाला देश है।
ICC और ICJ के बीच अंतर
- इस प्रकार, ICC व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी पर केंद्रित है, जबकि ICJ राज्यों के बीच विवादों और अंतरराष्ट्रीय कानून से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है।
स्रोत: DW
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