पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट, 2026 जारी की है।
परिचय
- यह UNEP द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले वार्षिक जलवायु वार्ताओं से पहले जारी की जाने वाली रिपोर्ट है।
- यह रिपोर्ट वर्तमान में देशों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के आधार पर वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की संभावित दिशा और वैश्विक तापवृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए आवश्यक उत्सर्जन स्तर के बीच के अंतर का आकलन करती है।
- रिपोर्ट का प्रत्येक संस्करण उत्सर्जन अंतराल को कम करने के उपायों का विश्लेषण करता है।
- इस रिपोर्ट में देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) का आकलन किया गया है। देशों को इन योगदानों को प्रत्येक पाँच वर्ष में अद्यतन करना आवश्यक है। इसका उद्देश्य यह अनुमान लगाना है कि यदि इन योजनाओं को पूरी तरह लागू किया जाए, तो वैश्विक तापमान में कितनी वृद्धि हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के बारे में
- स्थापना: वर्ष 1972 में।
- परिचय: यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत पर्यावरण संबंधी मामलों का प्रमुख प्राधिकरण है।
- नीति-निर्माण निकाय: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा UNEP का नीति-निर्माण निकाय है।
- मुख्यालय: नैरोबी, केन्या।
- प्रमुख रिपोर्टें: ग्लोबल एनवायरनमेंट आउटलुक, द राइज़ ऑफ एनवायरनमेंटल क्राइम रिपोर्ट, एक्शन्स ऑन एयर क्वालिटी, फ्रंटियर्स रिपोर्ट तथा अडैप्टेशन गैप रिपोर्ट।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- वैश्विक उत्सर्जन: वर्ष 2025 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वर्ष 2024 के लगभग समान स्तर पर रहा। यह लगभग 58.4 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (CO₂e) था।
- उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत: कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा जीवाश्म ईंधनों से संबंधित स्रोतों से आता है। शेष उत्सर्जन में भूमि उपयोग, भूमि-उपयोग परिवर्तन एवं वानिकी (LULUCF) से संबंधित CO₂ उत्सर्जन, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा फ्लोरीनयुक्त गैसों (F-gases) का योगदान शामिल है।
- उत्सर्जन की प्रवृत्तियाँ: वर्ष 2025 में तेल, कोयले और गैस के दहन से होने वाला CO₂ उत्सर्जन तथा नाइट्रस ऑक्साइड और फ्लोरीनयुक्त गैसों का उत्सर्जन बढ़ता रहा। वहीं, मीथेन उत्सर्जन वर्ष 2024 के लगभग समान स्तर पर रहा।
- प्रमुख योगदानकर्ता: अफ्रीकी संघ को छोड़कर, G20 के सदस्य देश सामूहिक रूप से वैश्विक उत्सर्जन के लगभग 76% के लिए जिम्मेदार हैं।
- 1.5°C का लक्ष्य: रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापवृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य अब अत्यंत कठिन हो गया है। वर्तमान परिस्थितियों में विश्व के लिए वैश्विक तापमान वृद्धि को लगभग 1.8°C तक सीमित रखना सर्वोत्तम संभावित परिणाम हो सकता है।
- 1.5°C का लक्ष्य वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते का प्रमुख जलवायु उद्देश्य है। इसके अंतर्गत दीर्घकालिक वैश्विक तापवृद्धि को औद्योगिक-पूर्व स्तर (1850–1900) की तुलना में 1.5°C तक सीमित रखने का प्रयास किया जाता है।
- भारत-विशिष्ट तथ्य: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है, लेकिन इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन शीर्ष दो उत्सर्जक देशों की तुलना में काफी कम है।

- प्रमुख चिंताएँ: जलवायु प्रभावों में वृद्धि: 1.5°C से अधिक तापवृद्धि का प्रत्येक अतिरिक्त अंश तथा तापवृद्धि की प्रत्येक अतिरिक्त अवधि जलवायु संबंधी प्रभावों और जोखिमों को बढ़ाती है।
- इसके परिणामस्वरूप विनाशकारी बाढ़, भीषण लू और जंगलों में अग्नि जैसी घटनाओं की तीव्रता तथा आवृत्ति बढ़ सकती है।
- प्रमुख सिफारिशें: 1.5°C के लक्ष्य की ओर वापसी: इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पुनः आगे बढ़ने के लिए वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में पर्याप्त कमी करना आवश्यक है।
- रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में निम्नलिखित कटौती आवश्यक होगी:
- वर्ष 2030 तक: 18% की कमी।
- वर्ष 2035 तक: 45% की कमी।
- वर्ष 2040 तक: 69% की कमी।
- ये कटौती के लक्ष्य वर्ष 2025 के उत्सर्जन स्तर को आधार मानकर निर्धारित किए गए हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में निम्नलिखित कटौती आवश्यक होगी:
स्रोत: DTE
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