पाठ्यक्रम: GS3/साइबर सुरक्षा
संदर्भ
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने प्रकटीकरण किया है कि वह साइबर सुरक्षा से संबंधित एक घटना की जाँच कर रहा है, जिसमें ग्राहकों के आँकड़े डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका है।
डार्क वेब
- डार्क वेब इंटरनेट का वह भाग है, जहाँ उपयोगकर्ता विशेष वेब ब्राउज़र, जैसे द ओनियन राउटर (Tor), के माध्यम से ऐसी वेब सामग्री तक गुमनाम रूप से पहुँच सकते हैं, जिसे सामान्य खोज इंजनों द्वारा सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।
- उत्पत्ति: इसकी आधारभूत तकनीक अमेरिकी नौसेना अनुसंधान प्रयोगशाला (NRL) के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की गई थी।
- इसका उद्देश्य अमेरिकी खुफिया संचार को सुरक्षित रखना तथा ऑनलाइन गतिविधियों को निगरानी और अवरोधन से छिपाना था।
- चिंताएँ: डार्क वेब अनियमित क्षेत्र है, जिसका संचालन और रखरखाव विश्व भर में फैले व्यक्तियों के एक व्यापक नेटवर्क द्वारा किया जाता है।

व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी (PII)
- इससे आशय ऐसी जानकारी से है, जो किसी व्यक्ति की पहचान करती है अथवा जिसका उपयोग स्वतंत्र रूप से या अन्य जानकारी के साथ मिलाकर किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
- उदाहरण: नाम, संपर्क विवरण, आवासीय पते और पहचान संख्या।
आँकड़ों के उल्लंघन के प्रभाव
- लक्षित वित्तीय धोखाधड़ी: धोखेबाज़ व्यक्तिगत विवरणों का उपयोग करके स्वयं को बैंक अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं तथा धोखाधड़ी वाले फोन कॉल और संदेशों को विश्वसनीय बना सकते हैं।
- पहचान की चोरी और निजता का उल्लंघन: उजागर हुई व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग प्रतिरूपण, फिशिंग तथा अन्य प्रकार के दुरुपयोग के लिए किया जा सकता है।
- जनविश्वास में कमी: आँकड़ों के उल्लंघन से डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रति ग्राहकों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
संवैधानिक प्रावधान
- निजता का अधिकार: के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।
- भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (सूची I) में अनुच्छेद 248 और प्रविष्टि 97 के अंतर्गत निजता तथा आँकड़ा संरक्षण से संबंधित विषय अवशिष्ट विधायी शक्तियों के दायरे में आते हैं।
- इन विषयों पर कानून बनाने का अनन्य अधिकार भारतीय संसद को प्राप्त है।
आँकड़ा संरक्षण से संबंधित विधिक ढाँचे
- डिजिटल व्यक्तिगत आँकड़ा संरक्षण अधिनियम, 2023:
- धारा 8(6): इसके अंतर्गत संगठनों के लिए भारतीय आँकड़ा संरक्षण बोर्ड और प्रभावित व्यक्तियों को व्यक्तिगत आँकड़ों के उल्लंघन की सूचना देना आवश्यक है।
- नियम 7: इसमें बताया गया है कि संगठनों को प्रभावित व्यक्तियों को आँकड़ों के उल्लंघन की सूचना किस प्रकार देनी चाहिए और वे अपनी सुरक्षा के लिए कौन-से कदम उठा सकते हैं।
- कार्यान्वयन: ये प्रावधान 13 मई, 2027 से लागू होने निर्धारित हैं। इसलिए, SBI की इस घटना के समय प्रभावित व्यक्तियों को सूचना देने से संबंधित यह विशिष्ट कानूनी आवश्यकता लागू नहीं हुई थी।
- भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल के निर्देश, 2022: भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70बी के अंतर्गत साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाली राष्ट्रीय एजेंसी है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक का साइबर सुरक्षा ढाँचा: भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियमित संस्थाओं के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी शासन व्यवस्था, घटना की सूचना देने, जोखिम आकलन और सुरक्षा नीतियों के संबंध में प्रावधान निर्धारित किए हैं।
सरकार द्वारा की गई पहलें
- समन्वय मंच: गृह मंत्रालय द्वारा विकसित यह मंच प्रबंधन सूचना प्रणाली, आँकड़ा भंडार और समन्वय मंच के रूप में कार्य करता है। इसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच साइबर अपराध संबंधी आँकड़ों के आदान-प्रदान और विश्लेषण को सुगम बनाना है।
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी): इसकी स्थापना गृह मंत्रालय के अंतर्गत साइबर अपराध से निपटने में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए की गई है।
- साइबर स्वच्छता केंद्र: इसका उद्देश्य उपकरणों में दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर का पता लगाना, उसे हटाने में सहायता करना तथा साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आगे की राह
- आँकड़ा संरक्षण में सुधार: आँकड़ों का कूटलेखन, बहु-कारक प्रमाणीकरण, सुरक्षित विन्यास प्रबंधन और नियमित लेखा-परीक्षण को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- ग्राहक जागरूकता सुनिश्चित करना: बैंकों को प्रभावित ग्राहकों को संबंधित जोखिमों के बारे में शीघ्र सूचित करना चाहिए तथा धोखाधड़ी वाले फोन कॉल और संदेशों की पहचान करने के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन देना चाहिए।
- जवाबदेही को सुदृढ़ करना: जाँच के माध्यम से आँकड़ों के उजागर होने के स्रोत और उसकी सीमा का पता लगाया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सुधारात्मक उपाय प्रभावी रूप से लागू हों।
स्रोत: TH
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