पंपित भंडारण जलविद्युत(Pumped Storage Hydropower)

पाठ्यक्रम: GS3/बुनियादी ढांचा/ऊर्जा; पर्यावरणीय स्थिरता

संदर्भ 

  • भारत नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, विद्युत ग्रिड की स्थिरता तथा ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए पंपित भंडारण जलविद्युत (PSH) की क्षमता का विस्तार कर रहा है।

पंपित भंडारण जलविद्युत क्या है? 

  • पंपित भंडारण परियोजनाएँ (PSPs) बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ हैं, जो विद्युत ऊर्जा का भंडारण करने के लिए जल एवं गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करती हैं। इन्हें प्रायः “जल बैटरी” कहा जाता है।
  • एक सामान्य पंपित भंडारण परियोजना में अलग-अलग ऊँचाइयों पर स्थित दो जलाशय होते हैं। जब विद्युत की अतिरिक्त उपलब्धता होती है, तब जल को निचले जलाशय से पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है। विद्युत की माँग बढ़ने पर संचित जल को टर्बाइनों से प्रवाहित किया जाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
  • पंपित भंडारण परियोजनाएँ सौर एवं पवन ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने, विद्युत की अधिकतम माँग को पूरा करने तथा ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायता करती हैं।

पंपित भंडारण परियोजनाओं के प्रकार

  • नदी-आधारित पंपित भंडारण : दोनों जलाशय किसी नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होते हैं।
  • ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप : एक जलाशय नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होता है, जबकि दूसरा किसी बारहमासी प्राकृतिक जलधारा से दूर स्थित होता है।
  • ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप : दोनों जलाशय बारहमासी नदियों, जलधाराओं एवं नालों से दूर स्थित होते हैं। ऐसी परियोजनाएँ नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालाँकि, प्रत्येक स्थल के लिए विशिष्ट पर्यावरणीय आकलन आवश्यक रहता है।

भारत में पंपित भंडारण की क्षमता

  • संचालनरत क्षमता : अगस्त 2026 तक, भारत में 10 परियोजनाओं के माध्यम से पंपित भंडारण जलविद्युत की कुल 7.43 गीगावाट (GW) क्षमता संचालनरत है। इन परियोजनाओं की स्थापित क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है।
  • निर्माणाधीन/कार्यान्वयनाधीन परियोजनाएँ : देशभर में 11 पंपित भंडारण परियोजनाओं की अतिरिक्त 15.87 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन और/या कार्यान्वयनाधीन है।
  • आगामी चरण की परियोजनाएँ : 8 परियोजनाओं की कुल 10.40 गीगावाट क्षमता को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा सहमति प्रदान की गई है अथवा उसका मूल्यांकन किया गया है।

वैश्विक स्तर पर पंपित भंडारण की स्थापित क्षमता 

  • पंपित भंडारण जलविद्युत विश्व में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाने वाली ऊर्जा भंडारण की सबसे व्यापक तकनीक है। यह अन्य भंडारण तकनीकों की तुलना में इसकी स्थापित क्षमता, परिपक्वता एवं व्यापक उपयोग को दर्शाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत में वैश्विक पंपित जलविद्युत भंडारण की स्थापित क्षमता 159.8 गीगावाट थी।
  • इसमें चीन की हिस्सेदारी लगभग 66 गीगावाट थी। इसके पश्चात जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका क्रमशः लगभग 22 गीगावाट तथा 19 गीगावाट क्षमता के साथ दूसरे एवं तीसरे स्थान पर थे।
  • वर्ष 2025 के अंत में 7.18 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ भारत वैश्विक स्तर पर पंपित भंडारण क्षमता के मामले में चौथे स्थान पर था।

सरकारी पहलें 

  • पंपित भंडारण परियोजना विकास दिशानिर्देश : विद्युत मंत्रालय ने वर्ष 2023 में पंपित भंडारण परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए।
  •  टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बिडिंग: वर्ष 2025 में अधिसूचित दिशानिर्देश भंडारण क्षमता तथा संचित ऊर्जा की खरीद के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं।
  •  पारेषण शुल्क में छूट : वे पात्र पंपित भंडारण परियोजनाएँ, जिन्हें 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए आवंटित किया जाता है, वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ होने की तिथि से 25 वर्षों तक अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) के शुल्क में 100% छूट प्राप्त कर सकती हैं।
  • अनुमोदन प्रक्रिया में तीव्रता: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर सहमति प्रदान करने की समय-सीमा 90 दिनों से घटाकर 50 दिन कर दी गई है।
  • एकीकृत नियोजन : सरकार ग्रिड की लचीलता बढ़ाने तथा नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक क्षमता को समायोजित करने के लिए ऊर्जा भंडारण और पारेषण नियोजन को एकीकृत कर रही है।

पंपित भंडारण जलविद्युत का महत्त्व 

  • नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण : सौर एवं पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक होने की अवधि में उत्पन्न अतिरिक्त विद्युत का भंडारण करता है।
  •  ग्रिड की स्थिरता : विद्युत की आपूर्ति और माँग के बीच संतुलन स्थापित करने तथा अधिकतम भार के प्रबंधन में सहायता करता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा : नवीकरणीय ऊर्जा के परिवर्तनशील उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कम करता है।
  • दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण : लंबी अवधि तक बड़ी मात्रा में विद्युत ऊर्जा का भंडारण एवं स्थानांतरण करके बैटरी भंडारण प्रणालियों को पूरक सहायता प्रदान करता है।

चुनौतियाँ 

  • प्रारंभिक पूँजीगत लागत अधिक होना तथा निर्माण में लंबा समय लगना।
  • उपयुक्त ऊँचाई-अंतर, भूवैज्ञानिक परिस्थितियों और जल की उपलब्धता सहित भौगोलिक सीमाएँ।
  • वनों, जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों तथा स्थानीय समुदायों पर संभावित पर्यावरणीय प्रभाव।
  • पारेषण नेटवर्क से संयोजन, आवश्यक स्वीकृतियाँ तथा परियोजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन की आवश्यकता।

निष्कर्ष 

  • पंपित भंडारण जलविद्युत भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण उपलब्ध कराने, ग्रिड की लचीलता बढ़ाने तथा नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक प्रभावी एकीकरण को संभव बनाने में सहायक है।
  • हालाँकि, इस क्षेत्र का सफल विस्तार बुनियादी ढाँचे के विकास, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन स्थापित करने पर निर्भर करेगा।

स्रोत: PIB

 

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