नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्यबल (ANTF) का तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन

पाठ्यक्रम: GS3/आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्यबल (ANTF) के प्रमुखों के तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

परिचय

  • उन्होंने लखनऊ और देहरादून में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नए क्षेत्रीय परिसर के निर्माण की आधारशिला भी रखी।
  • दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा किया गया, जिसमें 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्यबल के प्रमुखों ने भाग लिया।

नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्यबल (ANTF)

  • यह राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने तथा स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के प्रवर्तन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए गठित एक समर्पित व्यवस्था है।
  • प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में एक समर्पित नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्यबल होता है, जिसका नेतृत्व सामान्यतः अपर पुलिस महानिदेशक या महानिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाता है।
  • यह राज्य पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो तथा अन्य केंद्रीय और राज्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में सहायता करता है।
  • इसके प्रमुख कार्यों में गुप्त सूचनाओं का संग्रह, जांच, नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना तथा अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करना शामिल है।
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की भूमिका: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो नशीले पदार्थों से संबंधित कानूनों के प्रवर्तन के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी है और केंद्रीय तथा राज्य एजेंसियों की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करता है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी

  • म्यांमार एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरा: वर्ष 2022 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद म्यांमार वैश्विक अफीम आपूर्ति के एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरा है।
    • वर्ष 2021 से 2023 के बीच म्यांमार में अवैध अफीम की खेती में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
    • म्यांमार का स्वर्ण त्रिभुज क्षेत्र अफीम-आधारित मादक पदार्थों के आपूर्तिकर्ता के साथ-साथ मेथामफेटामाइन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी विस्तारित हुआ है।
  • पूर्वोत्तर भारत सर्वाधिक प्रभावित: म्यांमार में नशीले पदार्थों के बढ़ते उत्पादन के कारण पूर्वोत्तर के मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड राज्यों पर इसका सबसे अधिक प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है।
  • सीमा व्यवस्था में कमजोरियाँ: भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवागमन व्यवस्था के कारण ऐसी परिस्थितियाँ बनी हैं, जिनमें ये राज्य सीमांत पारगमन क्षेत्रों से आगे बढ़कर नशीले पदार्थों के वितरण के सक्रिय केंद्र बन गए हैं।
  • अफगानिस्तान के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी: पाकिस्तान सीमा के पार से ड्रोन के माध्यम से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी में विगत पाँच वर्षों में पाँच गुना वृद्धि हुई है।
    • अफगानिस्तान के माध्यम से संचालित दक्षिण एशियाई नशीले पदार्थों का व्यापार पाकिस्तान से होकर भारत में पंजाब और राजस्थान की स्थल सीमा तथा गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों की समुद्री सीमा के माध्यम से प्रवेश करता है।

भारत को नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए क्यों निशाना बनाया जाता है?

  • भौगोलिक स्थिति: भारत दो प्रमुख नशीले पदार्थ उत्पादक क्षेत्रों से होने वाले अवैध नशीले पदार्थों के प्रवाह के बीच स्थित है। इनमें तथाकथित स्वर्ण अर्धचंद्र क्षेत्र, जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान के सीमावर्ती क्षेत्र शामिल हैं, तथा स्वर्ण त्रिभुज क्षेत्र, जिसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड शामिल हैं, प्रमुख हैं। भारत ऐतिहासिक रूप से दोनों दिशाओं से आने वाली हेरोइन की तस्करी से प्रभावित रहा है।
  • विस्तृत स्थल और समुद्री सीमाएँ: भारत की स्थल सीमाएँ 15,000 किलोमीटर से अधिक और तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है।
    • म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश के साथ लगी अपेक्षाकृत संवेदनशील सीमाएँ दुर्गम भू-भाग और अनौपचारिक मार्गों के माध्यम से सीमा-पार तस्करी को सुगम बनाती हैं।
  • बढ़ता घरेलू बाजार: भारत अब केवल नशीले पदार्थों के पारगमन का देश नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता बाजार भी बन गया है।
  • औषधि निर्माण का आधार: भारत विश्व के सबसे बड़े औषधि तथा पूर्वगामी रसायन उत्पादकों में से एक है।
    • यदि नियामकीय निगरानी कमजोर हो, तो पूर्वगामी रसायनों का अवैध उपयोग कृत्रिम नशीले पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है।
  • नशीला पदार्थ-आधारित आतंकवाद: नशीले पदार्थों की तस्करी से आतंकवादी संगठनों और उग्रवादी समूहों को वित्तीय सहायता मिलती है। नशीले पदार्थों से प्राप्त धन का उपयोग भारत-विरोधी गतिविधियों के वित्तपोषण में किया गया है, विशेषकर पश्चिमी सीमा के क्षेत्रों में।
  • बढ़ता समुद्री व्यापार: भारत के व्यस्त बंदरगाह और बढ़ता कंटेनर यातायात वैध माल के बीच नशीले पदार्थों को छिपाकर ले जाने के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
  • दुर्गम भू-भाग और सीमा संबंधी चुनौतियाँ: घने वन, पर्वतीय क्षेत्र, मरुस्थल तथा नदी-तटीय क्षेत्र निगरानी को कठिन बनाते हैं।
  • क्षेत्रीय अस्थिरता: पड़ोसी देशों के कुछ हिस्सों में राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर कानून-प्रवर्तन व्यवस्था भारत में एवं भारत के माध्यम से नशीले पदार्थों की खेती, उत्पादन तथा तस्करी को बढ़ावा देती है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का प्रभाव

  • आर्थिक प्रभाव: नशीले पदार्थों का दुरुपयोग उत्पादकता को कम करता है, स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले व्यय को बढ़ाता है तथा मानव पूंजी को कमजोर करता है।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: इससे मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं, एचआईवी/एड्स और हेपेटाइटिस का प्रसार हो सकता है तथा शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट आती है।
  • सामाजिक प्रभाव: यह परिवारों को प्रभावित करता है, घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे सकता है तथा सामाजिक अलगाव और कलंक की स्थिति उत्पन्न करता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव: नशीले पदार्थों का व्यापार नशीला पदार्थ-आधारित आतंकवाद और संगठित अपराध को बढ़ावा देता है तथा युवाओं की इसमें संलिप्तता राष्ट्रीय एकता और अखंडता को कमजोर करती है।

सरकारी पहल

  • तीन वर्षीय कार्ययोजना: केंद्रीय गृह मंत्री ने वर्ष 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना प्रस्तुत की। यह कार्ययोजना चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
    • प्रथम, गुप्त सूचना और अभियान-आधारित प्रवर्तन; दूसरा, पूर्वगामी रसायनों और कृत्रिम नशीले पदार्थों पर नियंत्रण; तीसरा, नशीले पदार्थों की मांग में कमी और उनके दुष्प्रभावों को कम करना; तथा चौथा, क्षमता निर्माण और समन्वय।
    • सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारतीय तटरक्षक बल, सीमा शुल्क विभाग और राजस्व आसूचना निदेशालय भूमि सीमाओं, बंदरगाहों, हवाई अड्डों तथा माल परिवहन केंद्रों पर जोखिम-आधारित पहचान और जांच करेंगे तथा निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जांच उपकरण स्थापित करेंगे।
    • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, विदेश मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन भगोड़ों को वापस लाने के लिए समन्वित प्रयास करेंगे।
    • प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई और बैंकिंग व्यवस्था नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह का पता लगाएगी।
  • स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985: यह अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाता है तथा उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करता है।
  • नशा मुक्त भारत अभियान: वर्ष 2020 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना और नशामुक्त भारत को बढ़ावा देना है।
    • सरकार द्वारा नशीले पदार्थों से प्रभावित लोगों के उपचार, निवारक शिक्षा, जागरूकता निर्माण, प्रेरक परामर्श, विषहरण एवं नशामुक्ति उपचार, उपचारोत्तर देखभाल तथा सामाजिक मुख्यधारा में पुनः एकीकरण के लिए 350 एकीकृत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को सहायता प्रदान की जा रही है।
  • काशी घोषणा: यह नशामुक्त भारत के लिए पाँच वर्षीय कार्ययोजना है, जिस पर वाराणसी में आयोजित युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
    • भारत ने वर्ष 2047 तक नशामुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
    • भारत ने नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों तथा रासायनिक पूर्वगामी पदार्थों की अवैध तस्करी और संबंधित अपराधों से निपटने के लिए 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते, 16 देशों के साथ समझौता ज्ञापन तथा 2 देशों के साथ सुरक्षा सहयोग समझौते किए हैं।
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अंतर्गत अंधकारमय अंतर्जाल निगरानी प्रकोष्ठ: यह इंटरनेट के गुप्त माध्यमों के जरिए होने वाली नशीले पदार्थों की बिक्री पर निगरानी रखता है।
    • महत्वपूर्ण और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी से संबंधित जांच की निगरानी के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया गया है।

निष्कर्ष

  • भारत में नशीले पदार्थों का बढ़ता संकट जनस्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है।
  • हालाँकि, निरंतर सफलता के लिए सरकार, नागरिक समाज और समुदायों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक होंगे। इसके साथ ही रोकथाम, पुनर्वास और युवाओं के सशक्तीकरण पर विशेष बल देना होगा, ताकि वास्तविक अर्थों में नशामुक्त भारत का निर्माण किया जा सके।

स्रोत: PIB

 

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