कथकली महोत्सव
पाठ्यक्रम: GS1/कला एवं संस्कृति
समाचार में
- संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में कलाक्षेत्र फाउंडेशन द्वारा 17वें कथकली महोत्सव का आयोजन किया गया।
कथकली
- ‘कथकली’ शब्द मलयालम के “कथा” (कहानी) + “कली” (नाटक/अभिनय) से बना है।
- माना जाता है कि कथकली का विकास 17वीं शताब्दी में केरल में हुआ।
- कथकली में भक्ति, नाटक, नृत्य, संगीत, वेशभूषा और शृंगार का समन्वय होता है। इसके माध्यम से मुख्यतः भारतीय महाकाव्यों की प्राचीन एवं महान कथाओं को हस्त-मुद्राओं, चेहरे की भाव-भंगिमाओं और अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
- कथकली की प्रस्तुतियाँ आट्टकथा साहित्य पर आधारित होती हैं और इनमें नेत्र-संचालन, लयबद्ध पदचालन, शारीरिक गतियों तथा भावपूर्ण अभिनय को विशेष महत्त्व दिया जाता है।
- इसमें सोपान/अभिनय संगीत शैली के संगीत का प्रयोग किया जाता है तथा चेंडा, मड्डलम, चेंगिला और इलतालम जैसे वाद्य यंत्रों की संगति होती है।
- गायकों को पोन्नानी और शिंकिडी कहा जाता है।
- परंपरागत रूप से कथकली का मंचन पूरी रात किया जाता था, लेकिन वर्तमान में इसे प्रायः कम अवधि की प्रस्तुतियों के रूप में भी मंचित किया जाता है।
- परंपरागत रूप से यह पुरुषों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली कला रही है, किंतु वर्तमान में महिलाएँ भी कथकली में विभिन्न स्तरों पर भाग लेती हैं।
कलाक्षेत्र फाउंडेशन
फाउंडेशन भरतनाट्यम के विकास और प्रस्तुतीकरण के क्षेत्र में कार्य करता रहा है तथा शिक्षा और प्रदर्शन के माध्यम से स्वदेशी संगीत, नृत्य एवं शिल्प परंपराओं के हस्तांतरण को बढ़ावा दिया है।
रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा वर्ष 1936 में स्थापित कलाक्षेत्र फाउंडेशन ने भारत की शास्त्रीय कलाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अभ्यास तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
स्रोत: PIB
चिकित्सा दुकानों पर CCTV निगरानी
पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुदरा चिकित्सा दुकानों पर अनिवार्य CCTV निगरानी का प्रस्ताव रखा है, जिसके अंतर्गत रिकॉर्डिंग को तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
CCTV निगरानी की आवश्यकता
- इस प्रस्ताव का उद्देश्य अनुसूची H, H1 और X के अंतर्गत आने वाली दवाओं की अनधिकृत बिक्री और पहुँच को रोकना है। इनमें एंटीबायोटिक्स, मन:प्रभावी पदार्थ तथा अन्य केवल चिकित्सकीय पर्चे पर उपलब्ध दवाएँ शामिल हो सकती हैं।
- यह उपाय विशेष रूप से नाबालिगों को बिना चिकित्सकीय पर्चे के ऐसी दवाओं की बिक्री को रोकने तथा चिकित्सकीय पर्चे पर मिलने वाली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या से निपटने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
- औषधि परामर्श समिति (DCC) ने प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री से संबंधित जानकारी दर्ज करने के लिए एक केंद्रीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS)/औषधि पोर्टल स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है।
- शिकायतों या संदिग्ध उल्लंघनों की स्थिति में लेन-देन की पुष्टि के लिए CCTV फुटेज मुख्यतः एक सत्यापन तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
स्रोत: IE
अनुच्छेद 22 पर सर्वोच्च न्यायालय
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधारों की लिखित रूप में तथा ऐसी भाषा में, जिसे वह समझता हो, सूचना देना और उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत आवश्यक मौलिक अधिकार हैं।
अनुच्छेद 22
- अनुच्छेद 22 व्यक्ति की गिरफ्तारी और निरोध के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, ताकि उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके। इस कारण इसका अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अवधारणा से प्रत्यक्ष संबंध है।
- अनुच्छेद 22(1): प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को यथाशीघ्र ऐसी गिरफ्तारी के आधारों की सूचना दी जानी चाहिए तथा उसे अपनी पसंद के विधिक व्यवसायी से परामर्श करने और उसके द्वारा अपना बचाव कराने का अधिकार होगा।
- अनुच्छेद 22(2): गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर, यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर, निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। 24 घंटे से अधिक अवधि तक निरोध में रखने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है।
पुनः गिरफ्तारी और अनुच्छेद 22 पर सर्वोच्च न्यायालय
- सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत प्राप्त सुरक्षा उपायों को कमजोर नहीं किया जा सकता।
- न्यायालय ने पुनः गिरफ्तारी के लिए कठोर शर्तें निर्धारित कीं:
- आरोपी को सबसे पहले गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
- पुलिस को प्रस्तावित पुनः गिरफ्तारी के कारणों के साथ मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा तथा यह स्पष्ट करना होगा कि प्रारंभ में गिरफ्तारी के आधार क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
- आवेदन पर किसी वरिष्ठ अधिकारी का अनुमोदन/समर्थन होना चाहिए।
- जाँच किसी अन्य अधिकारी को हस्तांतरित की जानी चाहिए।
- जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू की जानी चाहिए।
- पुनः गिरफ्तारी के लिए न्यायिक स्वीकृति आवश्यक होगी। मजिस्ट्रेट को यह संतुष्ट होना होगा कि प्रारंभ में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध न करा पाने के पीछे वास्तविक एवं सद्भावनापूर्ण कारण थे तथा पुनः गिरफ्तारी आवश्यक है।
- न्यायालय ने उच्च न्यायालयों को प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के उल्लंघन के मामलों में उचित क्षतिपूर्ति प्रदान करने का भी निर्देश दिया।
स्रोत: TH
रोजगार मेला
पाठ्यक्रम: GS2/शासन, GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- राष्ट्रीय रोजगार मेले के 20वें संस्करण में सरकारी विभागों और संगठनों में नव नियुक्त युवाओं को 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।
राष्ट्रीय रोजगार मेले के बारे में
- राष्ट्रीय रोजगार मेला एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तीव्रता लाना तथा विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सरकारी संगठनों में रिक्तियों को भरना है।
- इसका उद्देश्य युवा सशक्तीकरण, समयबद्ध भर्ती और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना तथा सरकारी संस्थानों में मानव संसाधनों की उपलब्धता को सुदृढ़ करना है।
- इस पहल की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी।
रोजगार मेला क्या है?
- रोजगार मेला एक रोजगार-केंद्रित आयोजन है, जो नियोक्ताओं और संभावित रोजगार-प्रार्थियों को प्रत्यक्ष संवाद, आवेदन और भर्ती के लिए एक मंच पर लाता है।
- व्यापक रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), क्षेत्र कौशल परिषदों (SSCs) और प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (PMKKs) के सहयोग से रोजगार मेलों का आयोजन करता है।
- निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को इसमें भाग लेने तथा पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए संगठित किया जाता है।
- रोजगार मेले 18 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए आयोजित किए जाते हैं तथा विभिन्न शैक्षिक और कौशल पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 8वीं, 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी
- ITI और डिप्लोमा धारक
- स्नातक
- राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) के अनुरूप प्रशिक्षित और प्रमाणित अभ्यर्थी।
- रोजगार मेलों में कैरियर परामर्श, कौशल मेले, मुद्रा ऋण सुविधा और कौशल प्रदर्शनियों जैसी पूरक सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
स्रोत: PIB
LPG के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- देशभर के घरेलू LPG उपभोक्ताओं को 1 अक्टूबर, 2026 से सब्सिडी वाले सिलेंडर की रीफिल बुकिंग जारी रखने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (BAA) पूरा करना आवश्यक होगा।
प्रमुख बिंदु
- इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला LPG वास्तविक घरेलू परिवारों तक पहुँचे तथा घरेलू सिलेंडरों के वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग के लिए अवैध रूप से हस्तांतरण को रोका जा सके।
- इससे डुप्लिकेट और अपात्र LPG कनेक्शनों की पहचान करने तथा सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अब तक 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं, अर्थात कुल उपभोक्ताओं के 89.9%, ने प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी कर ली है।
- जिन उपभोक्ताओं ने BAA पूरा नहीं किया है, वे प्रमाणीकरण के बाद ही सब्सिडी वाली रीफिल बुक कर सकेंगे।
- BAA निम्नलिखित माध्यमों से पूरा किया जा सकता है:
- डिलीवरी के समय, जब डिलीवरी कर्मी संबंधित तेल विपणन कंपनी (OMC) के मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से प्रमाणीकरण कर सकते हैं;
- वितरक के शोरूम पर; या
- घर से OMC के मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से।
- जो उपभोक्ता BAA पूरा करने के इच्छुक नहीं हैं या ऐसा करने में असमर्थ हैं, वे LPG खरीद सकते हैं, लेकिन लागू व्यवस्थाओं के अधीन उन्हें सब्सिडी नहीं मिलेगी।
LPG सब्सिडी की लागत
- घरेलू LPG को लागत से कम मूल्य पर बेचा जाता है। घरेलू LPG को किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में OMCs को ₹22,000 करोड़ का मुआवजा दिया था तथा वित्त वर्ष 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ₹30,000 करोड़ का भुगतान कर रही है।
- इसके बावजूद, 31 अगस्त, 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र की OMCs द्वारा घरेलू LPG पर संचित अवसूली ₹62,000 करोड़ से अधिक हो गई थी।
स्रोत: PIB
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मेथनॉल संबंधी नियम निरस्त
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र विष नियम, 1972 के उन प्रावधानों को निरस्त कर दिया, जिनके तहत गैर-औषधि निर्माताओं को बेचने से पूर्व मेथनॉल में रंगकारक और कड़वाहटकारक मिलाना अनिवार्य था।
पृष्ठभूमि
- महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 1991 में मुंबई में हुई एक जहरीली शराब त्रासदी के बाद मेथनॉल पर अधिक सख्त नियंत्रण लागू किए थे। इस घटना में मेथनॉल युक्त मिलावटी शराब के सेवन से लगभग 93 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
- वर्ष 2011 में महाराष्ट्र ने अपने विष नियमों में संशोधन किया और नियम 18A तथा 18B को शामिल किया।
- इन नियमों के तहत मेथनॉल की खरीद पर प्रतिबंध लगाए गए तथा गैर-औषधि निर्माता को बिक्री से पहले मेथनॉल में कड़वाहटकारक और रंगकारक मिलाना अनिवार्य किया गया।
- इसके अतिरिक्त, नियम 18B के तहत फॉर्म A में लाइसेंस के बिना मेथनॉल रखना जब्ती योग्य माना गया है।
मेथनॉल (मिथाइल अल्कोहल) CH₃OH
- यह एक रंगहीन, जल में मिश्रणीय और अत्यधिक ज्वलनशील द्रव है, जिसका क्वथनांक लगभग 65°C होता है।
- पूर्व में इसका उत्पादन लकड़ी के विनाशकारी आसवन द्वारा किया जाता था।
- वर्तमान में इसका अधिकांश उत्पादन उत्प्रेरकों की सहायता से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन (सिनगैस) से किया जाता है। इसके लिए बायोमास से प्राप्त सिनगैस का भी उपयोग किया जाता है।
- इसका उपयोग फॉर्मल्डिहाइड, कृत्रिम रेजिन, रंगों, औषधियों और इत्र के उत्पादन में व्यापक रूप से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग विलायक, एंटीफ्रीज़ और ईंधन के रूप में भी होता है।
- मेथनॉल का उपयोग फॉर्मल्डिहाइड, पैराफॉर्मल्डिहाइड, पेंट, रेजिन तथा अन्य रसायनों सहित विभिन्न उत्पादों के निर्माण में औद्योगिक कच्चे माल के रूप में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
- यह अत्यंत विषैला होता है (एथेनॉल के विपरीत) और इसका सेवन अंधापन या मृत्यु का कारण बन सकता है।
स्रोत:TH
अभ्यास नोमैडिक एलीफेंट
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास नोमैडिक एलीफेंट के 18वें संस्करण का उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुभारंभ हुआ।
अभ्यास के बारे में
- अभ्यास नोमैडिक एलीफेंट एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन वर्ष 2006 से भारत और मंगोलिया में बारी-बारी से किया जा रहा है। इस अभ्यास का विगत संस्करण वर्ष 2025 में मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित किया गया था।
- इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अंतर्गत अर्ध-शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में उग्रवाद-रोधी अभियानों को संचालित करने के लिए दोनों पक्षों की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है।
स्रोत: PIB
‘आंग’ (Angh) ने TIFF प्लेटफॉर्म पुरस्कार जीता
पाठ्यक्रम: विविध
समाचार में
- नागालैंड के फिल्म निर्माता तेजा रियो की प्रथम फीचर फिल्म ‘आंग’ (Angh) ने वर्ष 2026 के टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (TIFF) में प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म पुरस्कार जीता।
प्रमुख बिंदु
- 1960 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में भारत-म्यांमार सीमा के निकट स्थापित यह फिल्म आंगबा, जो एक कोन्याक गाँव का मुखिया है, और उसके परिवार की कहानी प्रस्तुत करती है, जहाँ पारंपरिक मान्यताओं का सामना ईसाई धर्म तथा आधुनिक प्रभावों से होता है।
- फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से कोन्याक भाषा में की गई है। इसमें स्थानीय गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ स्कॉटिश अभिनेता डगलस हेंशल ने भी अभिनय किया है।
- यह फिल्म नागा समाज में होने वाले सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संक्रमण को दर्शाती है, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों और पहचान के क्रमिक क्षरण को भी रेखांकित किया गया है।
स्रोत: AIR