शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 1/इतिहास
समाचार में
- प्रधानमंत्री ने शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय
- शरतचंद्र चट्टोपाध्याय एक बंगाली लेखक थे, जिनकी रचनाओं ने भाषाई सीमाओं को पार करते हुए पूरे भारत और विदेशों में भी व्यापक स्वीकृति प्राप्त की।
- उनका जन्म वर्ष 1876 में बंगाल के देवानंदपुर में हुआ था। बाद में वर्ष 1903 में वे रंगून (म्यांमार) चले गए, जहाँ वे वर्ष 1916 तक रहे।
- वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे तथा वर्ष 1921 से 1936 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की हावड़ा इकाई के अध्यक्ष रहे।
साहित्यिक कृतियाँ
- उन्हें कम आयु से ही लेखन में रुचि थी। युवावस्था में उन्होंने ‘कोरेल’ और ‘काशीनाथ’ जैसी कहानियाँ लिखीं। लेखन की यह प्रवृत्ति उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली थी।
- उन्होंने ‘परिणीता’ (1914), ‘बिराज बहू’ (1914) और ‘पल्ली समाज’ (1916) जैसी अपनी कुछ प्रमुख रचनाओं की रचना की।
- वे एक ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे, जिन्होंने सशक्त एवं स्वतंत्र महिलाओं का चित्रण किया तथा सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी।
- उदाहरण के लिए, ‘स्वामी’ और ‘चरित्रहीन’ दो अत्यंत प्रभावशाली कालजयी उपन्यास हैं, जिनमें अंधविश्वास, सामाजिक उत्पीड़न और कठोर सामाजिक मान्यताओं पर प्रहार किया गया है तथा निर्धन एवं वंचित वर्गों की समस्याओं को केंद्र में रखा गया है।
- उन्होंने ‘देवदास’, ‘पथेर दाबी’ और ‘श्रीकांत’ जैसे प्रसिद्ध उपन्यासों की भी रचना की।
- ‘देवदास’ उनके अपेक्षाकृत कम प्रशंसित उपन्यासों में से एक है, जो वर्ष 1917 में प्रकाशित हुआ था। ‘पथेर दाबी’ में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद तथा औपनिवेशिक शासन के विरोध को चित्रित किया गया है।
- ‘श्रीकांत’ का नाम इसके मुख्य पात्र श्रीकांत के नाम पर रखा गया है, जो एक घुमक्कड़ का जीवन व्यतीत करता है।
स्रोत: PIB
भारत–मर्कोसुर सहयोग
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- भारत और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर ने अपने वर्तमान अधिमान्य व्यापार समझौते के विस्तार के लिए वार्ता प्रारंभ की है। इसका उद्देश्य आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ करना तथा दोनों पक्षों के व्यवसायों के लिए अधिक अवसर उत्पन्न करना है।
मर्कोसुर के बारे में
- दक्षिणी साझा बाजार (मर्कोसुर) एक क्षेत्रीय समूह है, जिसमें अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे, उरुग्वे, वेनेजुएला और बोलीविया शामिल हैं।
- हालाँकि, वर्ष 2016 में वेनेजुएला को इस समूह से निलंबित कर दिया गया था।
भारत के संबंध
- वर्ष 2025-26 (अप्रैल-अक्टूबर) में भारत एवं मर्कोसुर के सदस्य देशों—अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे—के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 11.84 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 5.22 अरब अमेरिकी डॉलर तथा आयात 6.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- भारत का मर्कोसुर के साथ जून 2009 से अधिमान्य व्यापार समझौता है, किंतु इसका दायरा अभी सीमित है।
- मर्कोसुर के बाजार में भारतीय निर्यातकों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें उच्च शुल्क बाधाएँ, रसद संबंधी अक्षमताएँ, विनियामक जटिलताएँ तथा सांस्कृतिक अंतर शामिल हैं।
- वर्तमान समझौते में भारत की लगभग 450 शुल्क मदें तथा मर्कोसुर की 452 शुल्क मदें शामिल हैं, जिन पर 10% से 100% तक शुल्क रियायतें प्रदान की गई हैं।
स्रोत:HT
यूरोपीय संघ के कार्बन कर के लिए भारत की तैयारियाँ
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 2/अंतरराष्ट्रीय संबंध; सामान्य अध्ययन 3/पर्यावरण
समाचार में
- भारत ने निर्यातकों को यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र का अनुपालन करने के लिए अपनी तैयारियाँ तीव्र कर दी हैं। इसके लिए प्रमुख मंत्रालयों, नियामकों और उद्योग संगठनों को शामिल करते हुए यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र के लिए निर्यात तत्परता समिति का गठन किया गया है।
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र
- यह कुछ आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कार्बन आधारित कर है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करके कार्बन रिसाव को न्यूनतम करना है कि आयातित वस्तुओं पर कार्बन की लागत यूरोपीय संघ के निर्माताओं द्वारा वहन की जाने वाली कार्बन लागत के अनुरूप हो।
- इसका उद्देश्य कार्बन रिसाव को रोकना है, ताकि आयातित वस्तुओं की कार्बन लागत उनके अंतर्निहित उत्सर्जन को प्रतिबिंबित करे। यह यूरोपीय संघ की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली का पूरक है तथा स्वच्छ उत्पादन को प्रोत्साहित करता है।
- यह तंत्र वर्ष 2023 से 2025 तक संक्रमणकालीन चरण में था और 1 जनवरी 2026 से अंतिम व्यवस्था के रूप में लागू हो गया है। इसमें आयातकों का अनुमोदन, उत्सर्जन की रिपोर्टिंग तथा कार्बन सीमा समायोजन प्रमाण-पत्रों की खरीद एवं समर्पण जैसी बाध्यताएँ शामिल हैं।
- यह सीमेंट, लौह एवं इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक, ऊर्जा और हाइड्रोजन क्षेत्रों में कुछ कार्बन-गहन आयातों पर लागू होता है।
विकासशील देशों का दृष्टिकोण
- भारत और चीन जैसे उभरते देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र को संभावित एकतरफा एवं भेदभावपूर्ण व्यापार उपाय के रूप में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है तथा जलवायु कार्रवाई का दायित्व उन पर अधिक पड़ सकता है।
- वे वैश्विक जलवायु व्यवस्था में साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व एवं संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत पर भी बल देते हैं।
स्रोत: ET
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 3/सिंचाई अवसंरचना
संदर्भ
- हाल ही में यमुना बेसिन के छह राज्यों ने लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे वर्षों से रुकी इस परियोजना के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
किशाऊ परियोजना के बारे में
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड–हिमाचल प्रदेश सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित एक बाँध परियोजना है।
- यह परियोजना 8 वर्षों से अधिक समय से लंबित थी तथा इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं।
- इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। जल घटक की लगभग 90% वित्तीय लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जबकि शेष 10% लागत यमुना जल समझौते (1994) के अनुसार संबंधित राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।
यमुना नदी बेसिन
- यमुना बेसिन गंगा नदी तंत्र के प्रमुख नदी बेसिनों में से एक है तथा सिंचाई, पेयजल, जलविद्युत, पारिस्थितिकी और अंतरराज्यीय जल बँटवारे की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- उद्गम: उत्तराखंड में बंदरपूँछ पर्वत श्रेणी के यमुनोत्री हिमनद से।
- बेसिन में शामिल प्रमुख राज्य/केंद्रशासित प्रदेश: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली।
- संगम: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी से संगम।
- प्रमुख सहायक नदियाँ: टोंस, गिरि, हिंडन, चंबल, सिंध, बेतवा और केन।
- ऊपरी बेसिन की प्रमुख परियोजनाएँ: लखवाड़, रेणुकाजी और किशाऊ सहित अन्य परियोजनाएँ।
कोबरा(CoBRA ) बटालियन
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 3/रक्षा
संदर्भ
- 2006 बैच की भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी संजुक्ता पाराशर, जिन्हें पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद-रोधी अभियानों में उनके योगदान के कारण लोकप्रिय रूप से ‘असम की लौह महिला’ कहा जाता है, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की विशिष्ट कोबरा इकाई का नेतृत्व करने वाली प्रथम महिला अधिकारी बन गई हैं।
कोबरा के बारे में
- कोबरा, अर्थात दृढ़ कार्रवाई के लिए कमांडो बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के सबसे विशिष्ट परिचालन संगठनों में से एक है।
- वर्ष 2008-09 में गठित इस बल को जंगल एवं गुरिल्ला युद्ध जैसी परिस्थितियों में उच्च जोखिम वाले अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अंतर्गत दीर्घ दूरी की गश्त, आसूचना-आधारित अभियान, घात लगाकर कार्रवाई, घात-रोधी कार्रवाई तथा ऐसे क्षेत्रों में अभियान चलाना शामिल है जहाँ तात्कालिक रूप से निर्मित विस्फोटक उपकरणों से गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
- इस बल को छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र में माओवादी-विरोधी अभियानों में व्यापक रूप से तैनात किया गया है, जहाँ कमांडो घने जंगलों एवं दुर्गम भू-भाग में अभियान संचालित करते हैं।
- कोबरा में 10 बटालियन शामिल हैं। इनका नेतृत्व एक महानिरीक्षक करते हैं, जो इनके प्रशासनिक नियंत्रण, चयन, प्रशिक्षण एवं रसद सहायता की देखरेख करते हैं।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड तथा सशस्त्र सीमा बल शामिल हैं। ये सभी गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं।
- हालाँकि, असम राइफल्स गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है, किंतु इसका परिचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है।
स्रोत: IE
सैन्य अभ्यास “युद्ध अभ्यास”
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 3/रक्षा
संदर्भ
- भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह उत्तराखंड के चमोली जिले के औली में आयोजित किया गया।
परिचय
- यह भारत और अमेरिका के बीच आयोजित होने वाला वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसका प्रारंभ वर्ष 2002 में हुआ था।
- इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं की संयुक्त परिचालन क्षमता को बढ़ाना है, ताकि वे पर्वतीय एवं अर्द्ध-पर्वतीय भू-भाग में समेकित युद्धक समूहों का प्रभावी उपयोग कर सकें। इसमें मुख्य रूप से पैदल सेना-केंद्रित अभियानों पर बल दिया जाता है।
- अमेरिका के साथ अन्य सैन्य अभ्यास:
- युद्ध अभ्यास — थल सेना
- वज्र प्रहार — विशेष बल
- मालाबार — नौसेना
- कोप इंडिया — वायु सेना
- टाइगर ट्रायम्फ — तीनों सेनाओं का संयुक्त अभ्यास
- बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास: भारत और अमेरिका जिन बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में भाग लेते हैं, उनमें रेड फ्लैग, रिमपैक, कटलेस एक्सप्रेस, सी ड्रैगन तथा मिलन प्रमुख हैं।
स्रोत: AIR
हिमालय एक निर्णायक पर्यावरणीय सीमा की ओर
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन 3/पर्यावरण
संदर्भ
- एक हालिया अध्ययन ने चेतावनी दी है कि हिमालयी हिमनदों के तीव्र गति से हो रहे क्षरण के कारण यह क्षेत्र सदी के मध्य तक ‘चरम जल उपलब्धता’ की स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जिसके जल सुरक्षा एवं आपदा जोखिमों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
चरम जल उपलब्धता के बारे में
- चरम जल उपलब्धता उस स्थिति को संदर्भित करती है, जब हिमनदों के पिघलने से प्रारंभ में नदियों में जल प्रवाह बढ़ता है, किंतु अंततः यह अधिकतम स्तर पर पहुँच जाता है। इसके बाद हिमनदों के आयतन में कमी आने के कारण नदियों का जल प्रवाह घटने लगता है।
- अर्थात, हिमनदों का अधिक पिघलना सदैव अधिक जल उपलब्धता का कारण नहीं बनता। जब हिमनद पर्याप्त रूप से सिकुड़ जाते हैं, तब नदियों में उनके योगदान में कमी आने लगती है।
प्रमुख निष्कर्ष
- हिमनदों का क्षरण: सिस्टमिक अध्ययन के अनुसार, हिमालयी हिमनदो का क्षरण एक दशक पूर्व की तुलना में 65% अधिक तीव्र गति से हो रहा हैं।
- सीमित निगरानी: हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में अनुमानतः 40,000 हिमनद हैं, किंतु वर्तमान में केवल 21 हिमनदों की स्थल-आधारित निगरानी की जा रही है।
- आर्थिक महत्त्व: हिमालयी प्रणालियाँ भारत के 20% से अधिक सकल घरेलू उत्पाद को आधार प्रदान करती हैं। इसलिए यह क्षेत्र भारत की जल, खाद्य एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- आपदा के प्रति संवेदनशीलता: हिमालयी क्षेत्र भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 18% है, किंतु देश की प्राकृतिक आपदाओं में इसका योगदान लगभग 35% है।
स्रोत: TH
एशिया कप
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
भारत ने दुबई में महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में श्रीलंका को पराजित कर रिकॉर्ड आठवीं एशिया कप उपाधि प्राप्त की।
एशिया कप (क्रिकेट)
- यह एक द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता है, जिसमें एशिया की राष्ट्रीय टीमें महाद्वीपीय चैंपियनशिप के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
- इसका प्रथम संस्करण 1984 में आयोजित किया गया था। इसका आयोजन 1983 में एशियाई क्रिकेट सम्मेलन की स्थापना के बाद हुआ था, जो आगे चलकर एशियाई क्रिकेट परिषद का पूर्ववर्ती संगठन बना।
- वर्ष 2016 से एशिया कप में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय तथा ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों को बारी-बारी से अपनाया जाता है।
- एशियाई क्रिकेट परिषद ने वर्ष 2004 में महिला एशिया कप की शुरुआत की थी।
- वर्ष 2026 तक, भारतीय क्रिकेट टीम ने सर्वाधिक पुरुष एशिया कप उपाधियाँ जीती हैं, जिसके बाद श्रीलंका का स्थान है।
- एशिया कप को एशिया की प्रमुख क्रिकेट प्रतियोगिता माना जाता है। इसमें एशियाई क्रिकेट परिषद के सदस्य देशों के साथ-साथ चयनित सहयोगी सदस्य देशों की टीमें भी भाग लेती हैं।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 16-09-2026