सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि सांसदों और विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए गठित विशेष न्यायालय लंबित मामलों की संख्या को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफल नहीं हुए हैं।
पृष्ठभूमि
अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ (2017) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने वर्तमान एवं पूर्व सांसदों तथा विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए 10 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 12 विशेष न्यायालयों की स्थापना का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने इन न्यायालयों को पहले ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया, जिनमें आजीवन कारावास का दंड निर्धारित है तथा उसके बाद ऐसे अपराधों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता देने को कहा, जिनमें 5 वर्ष या उससे अधिक के कारावास का प्रावधान है।
इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने भारत में बाल यौन शोषण सामग्री को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल के साथ साझा करने पर सहमति व्यक्त की है।
परिचय
यह कदम मेटा की बढ़ती जाँच-पड़ताल के बीच सामने आया है। ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि सोशल मीडिया मंचों पर विज्ञापनों के माध्यम से बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री प्रदर्शित की जा रही थी।
इससे पहले, भारतीय एजेंसियाँ राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और लापता एवं शोषित बच्चों के लिए राष्ट्रीय केंद्र के बीच वर्ष 2019 में हुए समझौता ज्ञापन के माध्यम से ऐसी रिपोर्टों तक पहुँच प्राप्त करती थीं।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि उसने अंतरिक्ष में सक्रिय हथियार तैनात किए हैं। किसी भी देश द्वारा इस प्रकार की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रथम बार की गई है।
परिचय
अमेरिका ने तैनात किए गए हथियारों की प्रकृति अथवा उन्हें कब तैनात किया गया, इसका प्रकटीकरण नहीं किया है।
चीन और रूस की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की गई, जिन्हें अमेरिका अपने अंतरिक्ष संबंधी प्रतिद्वंद्वी मानता है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के कार्यान्वयन के लगभग तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस योजना ने 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
योजना के बारे में
वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। इसके लिए वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक की अवधि हेतु 13,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें बढ़ई, नाव निर्माता, कवच निर्माता, लोहार, हथौड़ा एवं औजार निर्माता, ताला बनाने वाला, स्वर्णकार, कुम्हार, मूर्तिकार/पत्थर तराशने वाला/पत्थर तोड़ने वाला, मोची/जूता निर्माता/पादत्राण कारीगर, राजमिस्त्री, टोकरी निर्माता/टोकरी बुनकर, चटाई निर्माता/नारियल रेशा बुनकर/झाड़ू निर्माता, पारंपरिक गुड़िया एवं खिलौना निर्माता, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी तथा मछली पकड़ने के जाल का निर्माता शामिल हैं।