पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत और वियतनाम ने हाल ही में भारतीय रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन सहित रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की है। यह सहमति हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच बनी है।
भारत–वियतनाम संबंध
- भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो सभ्यतागत संबंधों, समान रणनीतिक हितों तथा स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
- वियतनाम भारत की पूर्व की ओर देखो नीति, MAHASAGAR दृष्टिकोण तथा आसियान के साथ भारत के संबंधों का एक प्रमुख आधार है।
- मई 2026 में वियतनाम के महासचिव एवं राष्ट्रपति तो लाम की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया। इसके साथ ही वियतनाम इस स्तर की द्विपक्षीय साझेदारी वाला क्षेत्र का भारत का पहला देश बन गया।
ऐतिहासिक विकास एवं वर्तमान स्थिति
- दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1972 में स्थापित हुए। इन संबंधों की नींव दीर्घकालीन सभ्यतागत एवं उपनिवेशवाद-विरोधी संपर्कों में निहित थी।
- वर्ष 2007 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तथा वर्ष 2016 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग की सह-अध्यक्षता में आयोजित 19वीं भारत–वियतनाम संयुक्त आयोग बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के समग्र स्वरूप की समीक्षा की गई।
- दोनों मंत्रियों ने उल्लेख किया कि दो वियतनामी राजकीय यात्राओं सहित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की है।
- दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की 55वीं वर्षगाँठ के अवसर पर वर्ष 2027 को भारत–वियतनाम मैत्री वर्ष के रूप में मनाने पर सहमति व्यक्त की।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- रक्षा एवं सुरक्षा: रक्षा सहयोग उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख आधार है।
- यह सहयोग रक्षा संबंधी आदान-प्रदान से आगे बढ़कर तीनों सेनाओं के बीच सैन्य संवाद, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण तक विस्तृत हो गया है।
- भारत ने वर्ष 2023 में स्वदेश निर्मित मिसाइल पोत आईएनएस कृपाण वियतनाम को प्रदान किया।
- वर्ष 2022 में 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की भारतीय ऋण सहायता के अंतर्गत 12 उच्च गति वाली गश्ती नौकाएँ वियतनाम को सौंपी गईं।
- वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच क्रमशः 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 18 करोड़ अमेरिकी डॉलर की दो अतिरिक्त ऋण सहायता व्यवस्थाओं पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका वर्तमान में क्रियान्वयन किया जा रहा है।
- दोनों देश अब भारतीय रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे रक्षा उद्योग में सहयोग तथा आपूर्ति शृंखला की दृढ़ता को बढ़ावा मिल सकता है।
- व्यापार, संपर्क एवं आर्थिक सहयोग: दोनों देश व्यापार, निवेश तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी आपूर्ति शृंखलाओं के विस्तार के साथ-साथ भारतीय समुद्री एवं कृषि उत्पादों तथा औषधियों के लिए अधिक बाजार पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
- सहयोग के अंतर्गत वित्तीय, बंदरगाह एवं हवाई संपर्क भी शामिल हैं।
- उभरते एवं सामाजिक क्षेत्र: सहयोग के नए क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष सहयोग, विरासत संरक्षण, नाविकों के मानक, क्षमता निर्माण तथा जन-जन संपर्क शामिल हैं।
- वियतनाम की भारत की हिंद-प्रशांत MAHASAGAR पहल में भागीदारी तथा वियतनाम में योग की बढ़ती लोकप्रियता दोनों देशों के सामाजिक एवं रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ कर रही है।
चिंताएँ एवं मुद्दे
- चीन कारक: दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ वियतनाम के क्षेत्रीय विवाद तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता दोनों देशों के बीच रणनीतिक समानता को बढ़ावा देने के साथ-साथ भू-राजनीतिक संवेदनशीलताएँ भी उत्पन्न करती हैं।
- व्यापार असंतुलन एवं बाजार तक पहुँच से संबंधित बाधाएँ ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- सीमित संपर्क-सुविधाएँ तथा अपेक्षाकृत कम आर्थिक एकीकरण द्विपक्षीय व्यापार की पूर्ण क्षमता के उपयोग में बाधक हैं।
- रक्षा सहयोग में अधिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्वदेशी विनिर्माण तथा सुदृढ़ एवं संस्थागत आपूर्ति शृंखलाओं की आवश्यकता है।
रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत के प्रयास
- भारत ने पूर्व की ओर देखो नीति, उन्नत रक्षा सहयोग, ऋण सहायता, रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से वियतनाम को प्राथमिकता प्रदान की है।
- आसियान के नेतृत्व वाली व्यवस्थाओं तथा हिंद-प्रशांत MAHASAGAR पहल के माध्यम से सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक हिंद-प्रशांत व्यवस्था में और अधिक सुदृढ़ता से स्थापित करता है।
आगे की राह
- भारत और वियतनाम को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को ठोस रक्षा संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं, सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं तथा सुदृढ़ समुद्री सहयोग में परिणत करना चाहिए।
- ऋण सहायता व्यवस्थाओं का त्वरित क्रियान्वयन, बेहतर संपर्क-सुविधाएँ, व्यापार का अधिक विविधीकरण, अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा में सहयोग तथा आसियान एवं बहुपक्षीय मंचों पर बेहतर समन्वय द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा कर सकते हैं।
- भारत–वियतनाम संबंध एक स्थिर, सुरक्षित एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य कर सकते हैं तथा भारत की व्यापक पूर्व की ओर देखो नीति एवं MAHASAGAR दृष्टिकोण के उद्देश्यों की प्राप्ति में योगदान दे सकते हैं।
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संक्षिप्त समाचार 14-09-2026