भारत की वायु शक्ति और थिएटर कमान: भविष्य के लिए भारत को तैयार करना

पाठ्यक्रम: जीएस-3/रक्षा एवं सुरक्षा

सन्दर्भ

  • हाल के संघर्षों और वायु शक्ति में सुधार से जुड़ी चर्चाओं के बाद थिएटर कमान को लेकर बहस ने फिर से ध्यान आकर्षित किया है। भारतीय वायु सेना (IAF) ने सिद्ध परिचालन संरचनाओं को बाधित किए बिना एक संतुलित तरीके से एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

भारतीय सशस्त्र बल और वायु शक्ति का परिचय

  • भारत के सशस्त्र बलों में थल सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल हैं, जिन्हें अंतरिक्ष, साइबर और सूचना युद्ध जैसे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण क्षेत्रों का समर्थन प्राप्त है।
  • भारतीय वायु सेना (IAF) भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, आक्रामक अभियानों के संचालन, जमीनी बलों को सहायता प्रदान करने और रणनीतिक गतिशीलता को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • IAF के सिद्धांत की एक विशिष्ट विशेषता केंद्रीकृत नियंत्रण और परिचालन लचीलेपन को प्राथमिकता देना है।
  • भौगोलिक थिएटर कमानों को IAF की स्थायी रूप से तैनाती करने से लचीलापन कम हो सकता है और सीमित युद्धक संसाधनों का विखंडन हो सकता है, क्योंकि वायु संसाधन सीमित हैं और उन्हें तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पुनः तैनात किया जा सकता है।
  • पाकिस्तान से जुड़े अभियानों में IAF ने भारत की प्रभावी ढंग से सेवा की है, जिसमें बालाकोट (2019) और उसके बाद की आकस्मिक परिस्थितियाँ शामिल हैं।
  • हालांकि, चीन के साथ संभावित संघर्ष एक अलग प्रकार की चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि इसमें हिमालयी भू-भाग, अधिक विस्तृत भौगोलिक थिएटर, अधिक सैन्य क्षमता और एक साथ कई आकस्मिक परिस्थितियों की संभावना शामिल है।

आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति का महत्व

  • आधुनिक वायु शक्ति आज भी अत्यंत आवश्यक है, लेकिन हाल के युद्धों ने यह दिखाया है कि केवल वायु श्रेष्ठता (Air Superiority) विजय की गारंटी नहीं देती।
  • यूक्रेन ने एकीकृत वायु रक्षा (Integrated Air Defence) के महत्व को उजागर किया है।
  • आकाश पर प्रभुत्व अपने आप राजनीतिक या सैन्य सफलता में परिवर्तित नहीं होता।
  • आधुनिक युद्ध में लागत की विषमता (Cost Asymmetry) का महत्व बढ़ता जा रहा है। कम लागत वाले ड्रोन रक्षकों को महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
  • इसलिए, भविष्य की वायु शक्ति को थल, समुद्री, साइबर, अंतरिक्ष और खुफिया क्षमताओं के साथ एकीकृत किया जाना आवश्यक है, न कि उसे स्वतंत्र रूप से युद्ध जिताने वाले साधन के रूप में देखा जाए।

भारत की वायु शक्ति के लिए थिएटर कमान की ज़रूरत

  • प्रस्तावित एकीकृत थिएटर कमान (Integrated Theatre Commands—ITCs) का उद्देश्य विभिन्न सेनाओं के बलों को विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों के लिए एकीकृत परिचालन संरचनाओं के अंतर्गत लाना है।
  • इनका प्रमुख उद्देश्य संयुक्त सैन्य योजना में सुधार, तेजी से निर्णय लेना तथा सैन्य क्षमताओं का समन्वित उपयोग सुनिश्चित करना है।
  • भारत की वायु शक्ति के संदर्भ में, थिएटर कमान संयुक्तता (Jointness) की मौजूदा कमी को दूर करने में सहायक हो सकती हैं।
  • कारगिल युद्ध का अनुभव तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी रणनीतिक चुनौती वायु और थल सेनाओं के बीच एकीकृत योजना के महत्व को रेखांकित करती है।
  • हाल ही में, वायु सेना प्रमुख (Air Chief Marshal) ने जल्दबाजी में पुनर्गठन करने के बजाय सावधानीपूर्वक और क्रमिक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है।
  • इसलिए, थिएटर-आधारित पुनर्गठन (Theatre-isation) का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की विभिन्न थिएटरों में अपने संसाधनों को तैनात और पुनः तैनात करने की क्षमता को कमजोर करना नहीं, बल्कि मजबूत करना होना चाहिए।

प्रमुख लाभ एवं महत्व

कमान की एकता (Unity of Command):

  • एकल परिचालन कमांडर संकट के समय समय पर निर्णय ले सकता है।

बेहतर संयुक्तता (Enhanced Jointness):

  • थल सेना, नौसेना और वायु सेना शांतिकाल में एक साथ योजना बना सकती हैं और प्रशिक्षण एवं अभ्यास कर सकती हैं।

संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग (Optimal Resource Utilisation):

  • खुफिया जानकारी, रसद तथा निगरानी परिसंपत्तियों को अधिक प्रभावी ढंग से साझा किया जा सकता है।

त्वरित प्रतिक्रिया (Faster Response):

  • पहले से स्थापित कमान व्यवस्था विभिन्न सेनाओं के बीच परामर्श के कारण होने वाली देरी को कम कर सकती है।

बहु-क्षेत्रीय युद्ध की तैयारी (Multi-domain Warfare Readiness):

  • थिएटर संरचनाएँ साइबर, अंतरिक्ष और सूचना संबंधी क्षमताओं को बेहतर ढंग से एकीकृत कर सकती हैं।
  • सबसे महत्वपूर्ण रूप से, संयुक्त संरचनाएँ यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि सीमित संख्या में उपलब्ध भारत के उच्च-मूल्य वाले सैन्य संसाधनों का उपयोग एक साथ उत्पन्न होने वाले कई संकटों के दौरान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप किया जाए।

थिएटर/संयुक्त कमान संरचना वाले देश 

संयुक्त राज्य अमेरिका:

  • यहाँ भौगोलिक और कार्यात्मक एकीकृत लड़ाकू कमानें (Unified Combatant Commands) हैं। वायु सेना के संसाधन संयुक्त कमान व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं, जबकि उनकी सेवा-स्तरीय संगठनात्मक संरचना बनी रहती है।

चीन:

  • चीन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की पाँच थिएटर कमानें हैं। पीएलए वायु सेना और अन्य सैन्य सेवाओं को थिएटर-स्तरीय अभियानों में एकीकृत किया गया है।

रूस:

  • रूस में संयुक्त रणनीतिक कमान/सैन्य जिले हैं, जिनकी संयुक्त परिचालन भूमिका है। एयरोस्पेस बलों का व्यापक संयुक्त सैन्य संरचनाओं के साथ समन्वय किया जाता है।

इज़राइल:

  • इज़राइल में अत्यधिक एकीकृत परिचालन कमान और संयुक्त योजना प्रणाली है। वायु शक्ति को केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया जाता है तथा इसे राष्ट्रीय स्तर के सैन्य अभियानों के साथ निकटता से एकीकृत किया जाता है।

संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ

  • थिएटर-आधारित पुनर्गठन जोखिम-मुक्त सुधार नहीं है। सबसे प्रमुख चिंता वायु संसाधनों के संभावित विभाजन की है, जिससे केंद्रीकृत नियंत्रण और परिचालनिक लचीलेपन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • भारत को कमान संबंधों, विभिन्न सैन्य सेवाओं की कार्य-संस्कृति, रैंक की समानता तथा कैरियर प्रगति से जुड़ी संस्थागत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • इसके अलावा, केवल संरचनात्मक पुनर्गठन से संयुक्तता स्थापित नहीं की जा सकती। यदि साझा सिद्धांत, संयुक्त प्रशिक्षण, परस्पर-संचालनीय संचार व्यवस्था तथा एकीकृत रसद प्रणाली विकसित न हो, तो थिएटर कमान केवल एक और प्रशासनिक स्तर बनकर रह सकती है।
  • चीन की चुनौती इन चिंताओं को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। पर्वतीय युद्ध, बिखरे हुए सैन्य बुनियादी ढाँचे तथा कम समय में बड़ी संख्या में सैन्य बलों को एक स्थान पर केंद्रित करने की आवश्यकता के लिए कमान की एकता और परिचालनिक लचीलेपन—दोनों की आवश्यकता है।

आगे की राह: भविष्य की चुनौतियों से निपटना

  • भारत को थिएटर-आधारित पुनर्गठन के लिए क्रमिक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
  • अपरिवर्तनीय संरचनात्मक बदलाव करने से पहले शांतिकाल में संयुक्त योजना, प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • थिएटर कमान की संरचना ऐसी होनी चाहिए जो भारतीय वायु सेना की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर वायु संसाधनों को केंद्रीय रूप से आवंटित करने तथा उन्हें तेजी से एक थिएटर से दूसरे थिएटर में पुनः तैनात करने की क्षमता को बनाए रखे।
  • बदलती युद्ध-व्यवस्था और युद्ध की बदलती अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए भारत को एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा, किफायती ड्रोन-रोधी प्रणालियों, सुदृढ़ वायुसेना अड्डों तथा स्वदेशी निगरानी क्षमताओं में निवेश करना चाहिए।
  • राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट रणनीतिक दिशा प्रदान करनी चाहिए। लक्ष्य ऐसी सैन्य क्षमता विकसित करना होना चाहिए जो संयुक्त रूप से युद्ध लड़ने में सक्षम हो, साथ ही भारत की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा वातावरण के अनुरूप आवश्यक परिचालनिक लचीलेपन को भी बनाए रखे।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत में एकीकृत थिएटर कमान की आवश्यकता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भविष्य के संघर्षों की तैयारी के लिए अधिक संयुक्तता की आवश्यकता और भारतीय वायु सेना की परिचालनिक लचीलेपन की आवश्यकता के बीच भारत किस प्रकार संतुलन स्थापित कर सकता है? 

स्रोत: TH

 

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