पाठ्यक्रम: जीएस-3/ऊर्जा अवसंरचना
सन्दर्भ
- भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (India’s renewable capacity) तेजी से बढ़ रही है, जबकि पारेषण और ऊर्जा भंडारण अवसंरचना उसी गति से विकसित नहीं हो रही है। इसलिए विश्वसनीय और किफायती बिजली सुनिश्चित करने के लिए ग्रिड एकीकरण की आवश्यकता है।
भारत में विद्युत अवसंरचना और ग्रिड एकीकरण
- भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में उभरा है।
- भारत लगातार अपने विद्युत मिश्रण में बदलाव कर रहा है। वर्तमान में 297 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है, बड़ी मात्रा में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता विकास के अधीन है तथा आगे के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
- हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण केवल सौर पैनल और पवन टर्बाइन जोड़ने तक सीमित नहीं है।
- ग्रिड एकीकरण विद्युत प्रणाली की उस क्षमता को कहा जाता है, जिसके माध्यम से वह परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को अवशोषित, पारेषित, संतुलित और विश्वसनीय रूप से आपूर्ति कर सके।
- पारंपरिक विद्युत संयंत्रों के विपरीत, सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और दिन के समय के अनुसार बदलता रहता है।
- इसके लिए पारेषण नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण, लचीले विद्युत उत्पादन और कुशल विद्युत बाजारों से समर्थित आधुनिक ग्रिड की आवश्यकता होती है।
- इस प्रकार, भारत का ऊर्जा संक्रमण तेजी से केवल क्षमता वृद्धि से आगे बढ़कर क्षमता के उपयोग और एकीकरण की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
ग्रिड की वर्तमान स्थिति और महत्व
- भारत में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत अब बिजली उत्पादन में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं और दिन के समय उनकी हिस्सेदारी कभी-कभी 50% से अधिक भी हो गई है।
- यह नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती में बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।
- एक मजबूत और आधुनिक ग्रिड महत्वपूर्ण है क्योंकि यह:
- परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के दौरान स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है;
- अधिक नवीकरणीय ऊर्जा वाले क्षेत्रों से अधिक मांग वाले क्षेत्रों तक बिजली का स्थानांतरण कर सकता है;
- स्वच्छ ऊर्जा की कटौती को कम कर सकता है;
- बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने की समग्र लागत को कम कर सकता है;
- ऊर्जा सुरक्षा में सुधार कर सकता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर सकता है।
- भारत में जारी पारेषण विस्तार, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा निकासी अवसंरचना और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी पहल शामिल हैं, इसलिए देश के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक आवश्यक पूर्वापेक्षा है।
ग्रिड अवसंरचना में क्या समस्याएँ और चिंताएँ हैं?
- अनम्य और पुरानी ग्रिड संरचना: भारत का पारंपरिक ग्रिड मुख्य रूप से बड़े विद्युत उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक एकतरफा बिजली प्रवाह के लिए तैयार किया गया था।
- विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और रूफटॉप बिजली एक अधिक गतिशील और दो-तरफा प्रणाली की आवश्यकता पैदा करते हैं।
- पारेषण क्षमता में पिछड़ापन: नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ अपेक्षाकृत तेजी से शुरू की जा सकती हैं, जबकि भूमि अधिग्रहण, मंजूरी और निर्माण संबंधी समस्याओं के कारण पारेषण लाइनों में कभी-कभी देरी होती है।
- इससे नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन अप्रयुक्त रह सकता है या कम किया जा सकता है।
- अपर्याप्त ऊर्जा भंडारण और लचीलापन: तेजी से बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा क्षमता के लिए भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता अभी भी अपर्याप्त है।
- यदि सूर्यास्त के बाद बिजली की मांग बढ़ जाती है, तो दिन के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा के उत्पादन में कटौती करना आवश्यक हो सकता है।
- अपर्याप्त बाजार संकेत: भारत का विद्युत क्षेत्र अभी भी काफी हद तक दीर्घकालिक द्विपक्षीय अनुबंधों पर निर्भर है।
- मौजूदा बाजार मुख्य रूप से बिजली उत्पादन को पुरस्कृत करते हैं, जबकि प्रणाली के लचीलेपन, आरक्षित क्षमता, स्थिरता और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता के लिए सामान्यतः उपयुक्त मूल्य संकेतों का अभाव है।
- वितरण स्तर पर सीमित डिजिटल निगरानी: कई वितरण कंपनियों (DISCOMs) के पास उपभोक्ता मांग, नेटवर्क की स्थिति, रूफटॉप सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग से संबंधित पर्याप्त विस्तृत जानकारी नहीं है। इससे वास्तविक समय में ग्रिड प्रबंधन कमजोर होता है।
संबंधित प्रयास और पहल
भारत ने अपनी विद्युत अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई उपाय लागू किए हैं:
- अंतर-राज्यीय पारेषण नेटवर्क का विस्तार, ताकि अधिक नवीकरणीय ऊर्जा वाले क्षेत्रों को अधिक मांग वाले क्षेत्रों से जोड़ा जा सके;
- नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजनाएँ;
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) और पंप्ड स्टोरेज की स्थापना को बढ़ावा देना;
- विद्युत क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत स्मार्ट मीटर की स्थापना;
- विद्युत एक्सचेंजों और सहायक सेवाओं के बाजारों का विकास;
- नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धी नीलामी और मूल्य निर्धारण को बेहतर बनाने के लिए नए साधनों का विकास।
ये परियोजनाएँ एक अधिक लचीली और बाजार-उन्मुख विद्युत प्रणाली की ओर लगातार हो रहे बदलाव को दर्शाती हैं।
आगे की राह: हरित ग्रिड को मजबूत करना
- उन्नत ग्रिड प्रौद्योगिकियों को अपनाना: भारत को मौजूदा पारेषण लाइनों के पुनःसंवाहकीकरण (Reconductoring), गतिशील ग्रिड प्रबंधन, ग्रिड-फॉर्मिंग इन्वर्टर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ बैटरी भंडारण के सह-स्थापन पर ध्यान देना चाहिए।
- इस प्रकार के उपाय अतिरिक्त अवसंरचना का निर्माण किए बिना क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं।
- ऊर्जा भंडारण और लचीली क्षमता का निर्माण: बैटरी भंडारण, पंप्ड हाइड्रो और लचीले ताप विद्युत उत्पादन का विस्तार करने की आवश्यकता है।
- राज्य के स्वामित्व वाली ताप विद्युत सुविधाएँ संक्रमण के दौरान आरक्षित क्षमता और संतुलन सेवाएँ प्रदान कर सकती हैं।
- विद्युत बाजारों में सुधार: बाजारों को केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि क्षमता, लचीलापन और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता को भी पुरस्कृत करना चाहिए।
- अल्पकालिक क्षमता बाजार और नए प्रकार के अनुबंध नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में सहायता करने वाले संसाधनों में निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
- प्रौद्योगिकी-तटस्थ खरीद को अपनाना: सौर, पवन, ताप विद्युत और भंडारण को अलग-अलग खरीदने के बजाय, विद्युत वितरण कंपनियों को आवश्यक सेवाओं—क्षमता, लचीलापन और विश्वसनीयता—का निर्धारण करना चाहिए तथा विभिन्न प्रौद्योगिकियों को न्यूनतम लागत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने देना चाहिए।
- डिजिटलीकरण और उपभोक्ता भागीदारी में तेजी लाना: स्मार्ट मीटर, वास्तविक समय की डेटा प्रणालियाँ और समय-आधारित विद्युत मूल्य निर्धारण उपयोगकर्ताओं को ग्रिड पर दबाव वाले समय से अपनी बिजली खपत को अन्य समय में स्थानांतरित करने में सक्षम बना सकते हैं।
- उपभोक्ताओं के लिए बनाए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म बिजली की कीमतों और खपत के संबंध में पारदर्शिता बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
- भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार में उल्लेखनीय सफलता प्रदर्शित की है। लेकिन, ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण केवल जोड़ी गई मेगावाट क्षमता से नहीं, बल्कि प्रभावी रूप से एकीकृत की गई मेगावाट क्षमता से निर्धारित होगा।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रत्येक घर, किसान और उद्यम तक विश्वसनीय और किफायती बिजली के रूप में पहुँचे, एक आधुनिक ग्रिड, लचीले संसाधन, कुशल बाजार और डिजिटल अवसंरचना आवश्यक हैं।
- इसलिए, भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण की वास्तविक कसौटी उसकी ऐसी विद्युत प्रणाली बनाने की क्षमता होगी, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा क्षमता केवल निर्मित ही न हो, बल्कि उसका पूर्ण उपयोग भी किया जाए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि से नहीं, बल्कि उसके विद्युत ग्रिड द्वारा इसे कुशलतापूर्वक एकीकृत करने की क्षमता से निर्धारित होगा। चर्चा कीजिए। |
स्रोत: BS
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