महाराष्ट्र द्वारा दही हांडी उत्सव के लिए यूनेस्को विरासत दर्जा की मांग
पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति
संदर्भ
- महाराष्ट्र सरकार दही हांडी उत्सव के लिए यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
- सरकार की योजना उत्सव के दौरान मानव पिरामिड बनाने वाले ‘गोविंदाओं’ को इस पारंपरिक प्रथा का प्रदर्शन करने के लिए स्पेन भेजने की भी है।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के बारे में
- इसमें वे प्रथाएँ, ज्ञान, अभिव्यक्तियाँ, वस्तुएँ और सांस्कृतिक स्थल शामिल होते हैं, जिन्हें समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं।
- यह विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है और समय के साथ विकसित होती रहती है, जिससे सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ होती है तथा सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान बढ़ता है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए यूनेस्को ने पेरिस में आयोजित अपने 32वें आम सम्मेलन के दौरान वर्ष 2003 में अभिसमय को अपनाया।
- भारत ने वर्ष 2005 में इस अभिसमय का अनुसमर्थन किया।
- यूनेस्को की विरासत सूची में भारत की प्रविष्टियाँ: अब तक भारत के 16 सांस्कृतिक तत्वों को यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है, जिनमें दीपावली, दुर्गा पूजा, कुंभ मेला और गरबा शामिल हैं।
दही हांडी उत्सव
- दही हांडी का आयोजन जन्माष्टमी के एक दिन पश्चात भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में किया जाता है। इसमें धार्मिक आस्था के साथ सामुदायिक भागीदारी और खेल भावना का समन्वय देखने को मिलता है।
- प्रतिभागी, जिन्हें गोविंदा कहा जाता है, ऊँचे मानव पिरामिड का निर्माण करते हैं और उसके शीर्ष तक पहुँचकर दही, मक्खन और दूध से भरे मिट्टी के मटके को तोड़ते हैं।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, बालकृष्ण या कान्हा और उनके मित्र मोहल्ले के घरों की छतों से लटकाए गए मटकों को तोड़ने तथा उनमें रखा दही और मक्खन चुराने के लिए मानव पिरामिड बनाया करते थे।
- यह परंपरा विशेष रूप से मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लोकप्रिय हुई है, जहाँ अब दही हांडी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है और इनमें पर्याप्त पुरस्कार राशि दी जाती है।
- राज्य सरकार दही हांडी में भाग लेने वाले प्रत्येक गोविंदा को ₹10 लाख का बीमा कवर भी प्रदान करती है।
भारत-स्पेन संबंध
- मानव पिरामिड और मानव टावर बनाने की पारंपरिक प्रथा दही हांडी उत्सव और स्पेन के बीच साझा सांस्कृतिक कड़ी है। स्पेन में समुदाय ‘कास्टेल्स’ नामक मानव टावर बनाने की परंपरा का पालन करते हैं।
- स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र के कास्टेल्स (मानव टावर) को पहले ही यूनेस्को द्वारा मान्यता प्रदान की जा चुकी है।
- स्पेन की टीमें दही हांडी उत्सव में भाग लेने के लिए नियमित रूप से मुंबई और ठाणे आती हैं।
स्रोत: CNBC TV18
सांप्रदायिक पुरस्कार (Communal Award)
पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
समाचार में
- हाल ही में सांप्रदायिक पुरस्कार (Communal Award) की घोषणा की वर्षगांठ मनाई गई।
सांप्रदायिक पुरस्कार
- अगस्त 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्ज़े मैकडोनाल्ड ने औपचारिक रूप से सांप्रदायिक पुरस्कार की घोषणा की।
- इसमें दलित वर्गों को अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता दी गई तथा उन्हें 20 वर्षों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल प्रदान किए गए।
- इस व्यवस्था के तहत प्रांतीय विधानसभाओं में उनके लिए 71 विशेष सीटें निर्धारित की गईं।
- इसके अतिरिक्त, मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियनों और यूरोपीय लोगों के लिए भी पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान किया गया। साथ ही, प्रांतीय विधानसभाओं में सांप्रदायिक आधार पर सीटों का आवंटन तथा अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के लिए अन्य सुरक्षा उपाय भी किए गए।
- मैकडोनाल्ड ने इस प्रस्ताव का समर्थन इस आधार पर किया कि पृथक निर्वाचक मंडल दलित वर्गों को स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करेंगे, जबकि सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में उनके मतदान के अधिकार अन्य हिंदुओं के साथ उनकी एकता बनाए रखेंगे।

महात्मा गांधी की प्रतिक्रिया
- महात्मा गांधी दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के ब्रिटिश प्रस्ताव के प्रबल विरोधी थे। उनका तर्क था कि इससे समुदाय की सामाजिक समस्याओं का समाधान होने के बजाय हिंदू समाज में विभाजन उत्पन्न होगा।
- उन्होंने भारत सचिव सैमुअल होअर को चेतावनी दी कि वे इस कदम का अपने जीवन की कीमत पर भी विरोध करेंगे।
- उन्होंने 20 सितंबर 1932 को पुणे में आमरण अनशन शुरू किया। उन्होंने अस्पृश्यता समाप्त करने तथा सवर्ण हिंदुओं और दलित वर्गों के बीच सामाजिक सद्भाव स्थापित करने के अपने संकल्प की घोषणा की।
- एम.सी. राजाह और बी.जी. हॉर्निमैन जैसी प्रमुख हस्तियों ने भी पृथक निर्वाचक मंडल की निंदा की। उनका मानना था कि इससे दलित वर्गों और अन्य हिंदुओं के बीच दूरी और बढ़ सकती है।
बी.आर. अंबेडकर के विचार
- बी.आर. अंबेडकर दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के सबसे मुखर समर्थक थे। उनका मानना था कि गांधी जैसे उच्च जाति के सुधारक दलित वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व करने में सक्षम नहीं थे और उन्हें स्वायत्त राजनीतिक नेतृत्व एवं प्रतिनिधित्व की आवश्यकता थी।
- गांधी के अनशन की तिथि निकट आने पर मदन मोहन मालवीय ने हिंदू नेताओं और दलित वर्गों के नेताओं से वार्ता के लिए संपर्क किया। हालांकि, अंबेडकर ने प्रारंभ में इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि दलित वर्गों का हित गांधी के व्यक्तिगत अनशन से अधिक महत्वपूर्ण था।
पूना पैक्ट
- गांधी के पुणे अनशन के दौरान मदन मोहन मालवीय, तेज बहादुर सप्रू, एम.आर. जयकर, सी. राजगोपालाचारी और राजेंद्र प्रसाद सहित प्रमुख नेताओं ने पृथक निर्वाचक मंडल के विवाद को सुलझाने के लिए बी.आर. अंबेडकर के साथ वार्ता की।
- 24 सितंबर 1932 को हस्ताक्षरित पूना पैक्ट ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था को समाप्त कर संयुक्त निर्वाचक मंडल की व्यवस्था स्थापित की। इसके साथ ही प्रांतीय विधानसभाओं में आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 148 कर दी गई तथा केंद्रीय विधानमंडल में 18% सीटें आरक्षित की गईं।
- ब्रिटिश सरकार ने सांप्रदायिक पुरस्कार में संशोधन के रूप में पूना पैक्ट को स्वीकार कर लिया।
- आरक्षण की यह व्यवस्था स्वतंत्रता के बाद भी जारी रही। वर्तमान में लोकसभा की 84 सीटें अनुसूचित जातियों (SC) और 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित हैं।
स्रोत :IE
डेन्यूब बंदरगाह
पाठ्यक्रम: GS1/समाचार में स्थान
संदर्भ
- रूस के एक हमले में यूक्रेन के दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र के इज़माइल जिले में स्थित बंदरगाह अवसंरचना को निशाना बनाया गया।
- इज़माइल रोमानिया की सीमा के निकट स्थित है और यहाँ डेन्यूब नदी पर यूक्रेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है।
डेन्यूब नदी
- डेन्यूब एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नदी तथा यूरोप का एक महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जलमार्ग है, जो मध्य एवं पूर्वी यूरोप को काला सागर से जोड़ता है।
- उद्गम: जर्मनी का ब्लैक फॉरेस्ट क्षेत्र।
- इसकी लंबाई लगभग 2,850 किलोमीटर है और यह वोल्गा के बाद यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
- यह 10 देशों—जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, बुल्गारिया, रोमानिया, मोल्दोवा और यूक्रेन—से होकर प्रवाहित होती है।
- डेन्यूब अपनी विशिष्ट जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ अनेक संकटग्रस्त प्रजातियाँ पाई जाती हैं तथा यह अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास का कार्य करती है।
स्रोत: TH
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत प्रोत्साहन के लिए कुल ₹7,877 करोड़ मूल्य की परियोजनाओं को स्वीकृति दी।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम
- उद्देश्य: वैश्विक एवं घरेलू निवेश को आकर्षित करके एक सुदृढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना। इसका उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVCs) के साथ एकीकृत करते हुए संपूर्ण मूल्य शृंखला में विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देना है।
- योजना के अंतर्गत लक्षित खंडों की श्रेणियाँ:
- सब-असेंबली
- बेसिक कंपोनेंट्स
- चयनित बेसिक कंपोनेंट्स
- आपूर्ति शृंखला पारिस्थितिकी तंत्र एवं पूंजीगत उपकरण
- दूरसंचार संबंधी सब-असेंबली
- प्रोत्साहन के प्रकार:
- कारोबार से संबद्ध प्रोत्साहन
- पूंजीगत व्यय आधारित प्रोत्साहन
- हाइब्रिड प्रोत्साहन
योजना की अवधि
- कारोबार से संबद्ध प्रोत्साहन: एक वर्ष की प्रारंभिक अवधि सहित छह वर्ष।
- पूंजीगत व्यय आधारित प्रोत्साहन: पाँच वर्ष।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में ₹1.90 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में अनुमानित ₹13.11 लाख करोड़ हो गया है, जो लगभग सात गुना वृद्धि दर्शाता है।
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में इनका निर्यात 47.96 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- भारत मोबाइल फोन के शुद्ध आयातक देश से विकसित होकर अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है।
स्रोत: TH
रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में भारत स्थित रक्षा स्टार्ट-अप डी-प्रोपल्स(D-Propulse) ने हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक सुविधा में रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन का सफल प्रदर्शन करने की घोषणा की।
रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन के बारे में
- रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन (RDE) एक उन्नत इंजन है, जो प्रणोद उत्पन्न करने के लिए पारंपरिक दहन के स्थान पर डेटोनेशन (विस्फोटन) का उपयोग करता है।
- महत्त्व: इस इंजन की संरचना पारंपरिक रॉकेट इंजनों की तुलना में ईंधन का अधिक दक्षता से उपयोग करने की क्षमता रखती है। यदि कम ईंधन की आवश्यकता होती है, तो बचाए गए द्रव्यमान का उपयोग अतिरिक्त उपग्रह पेलोड ले जाने के लिए किया जा सकता है।
- पारंपरिक इंजन में ईंधन डिफ्लेग्रेशन के माध्यम से जलता है, जिसमें ज्वाला की गति ध्वनि की गति से कम होती है।
- इसके विपरीत, RDE में ईंधन-वायु या ईंधन-ऑक्सीडाइज़र मिश्रण डेटोनेशन की प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें एक शक्तिशाली आघात तरंग अतिध्वनिक गति से आगे बढ़ती है।
- यह डेटोनेशन तरंग लगातार वलयाकार दहन कक्ष के चारों ओर घूमती रहती है।
- इस प्रक्रिया से उत्पन्न उच्च-दाब वाली गैसों को नोजल के माध्यम से बाहर प्रवाहित किया जाता है, जिससे प्रणोद उत्पन्न होता है।
स्रोत: TH
समुद्री निगरानी के लिए नौसेना लीज पर लेगी दो MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B सी गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्यूरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) को लीज पर लेने के लिए अमेरिका कीजनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
परिचय
- MQ-9B सी गार्जियन HALE RPAS एक मानवरहित हवाई वाहन है, जिसे खुफिया, निगरानी एवं टोही (ISR) तथा सटीक हमले जैसे अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।
- यह 30 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है, 40,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर संचालन कर सकता है तथा विशाल समुद्री और स्थलीय क्षेत्रों को कवर करने में सक्षम है।
- अनुबंध के तहत भारत में एक वैश्विक रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहाल (MRO) सुविधा स्थापित की जाएगी। इसके अंतर्गत भारत में कुछ MQ-9B विमानों का असेंबली कार्य भी किया जाएगा, जिससे भारत की दीर्घकालिक स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने के लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।
- ड्रोन के कुछ घटकों की घरेलू स्तर पर खरीद की जाएगी।
स्रोत: IE
अभ्यास MAITREE-XV (2026)
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
समाचार में
- भारतीय सेना की टुकड़ी भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास MAITREE-XV (2026) के 15वें संस्करण में भाग लेने के लिए थाईलैंड रवाना हुई। यह अभ्यास थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावदी रंगसित कैंप में आयोजित किया जा रहा है।
अभ्यास MAITREE
- इस अभ्यास की शुरुआत 2006 में हुई थी। यह भारत और थाईलैंड के बीच सर्वोत्तम सैन्य प्रथाओं के आदान-प्रदान तथा सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
- यह दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता , आपसी समझ और सौहार्द को बढ़ाता है तथा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करता है।
- यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त आतंकवाद-रोधी एवं उग्रवाद-रोधी अभियानों को संचालित करने के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक होगा।
स्रोत :PIB
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