वर्ष 2028–29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सदस्यता हेतु भारत का अभियान 

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध; वैश्विक समूह

संदर्भ

  • भारत ने 2028–29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हेतु अपना अभियान शुरू कर दिया है। इसके लिए चुनाव जून 2027 में निर्धारित है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और इसकी संरचना

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग है। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं:
    • 5 स्थायी सदस्य: अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम। इन पाँचों देशों के पास वीटो का अधिकार है।
    • 10 अस्थायी सदस्य: इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। प्रत्येक वर्ष पाँच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होता है।
  • सीटों का वितरण विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के बीच इस प्रकार है:
    • अफ्रीका — 3
    • एशिया-प्रशांत — 2
    • लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र — 2
    • पश्चिमी यूरोप और अन्य देश — 2
    • पूर्वी यूरोप — 1
  • किसी उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए महासभा में उपस्थित होकर मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
  • चुनाव गुप्त मतदान के माध्यम से कराया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख उद्देश्य

  • संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र के अंतर्गत सुरक्षा परिषद का मुख्य उद्देश्य है:
    • अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।
    • विवादों की जाँच करना और उनके शांतिपूर्ण समाधान की सिफारिश करना।
    • आवश्यकता पड़ने पर प्रतिबंध लगाना और सामूहिक कार्रवाई को अधिकृत करना।
    • शांति स्थापना तथा अन्य आवश्यक कार्रवाई को अधिकृत करना।
    • संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नियुक्ति तथा नए सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र में शामिल किए जाने की सिफारिश करना।

भारत और सुरक्षा परिषद की सदस्यता

  • यदि भारत 2028–29 के लिए निर्वाचित होता है, तो वह नौवीं बार सुरक्षा परिषद का सदस्य बनेगा।
  • भारत इससे पहले निम्नलिखित अवधियों में अस्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में रह चुका है:
  • 1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और 2021–22।
  • भारत का एशियाई समूह में एकमात्र प्रतिद्वंद्वी ताजिकिस्तान है।
  • क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। 2027–28 में एशिया की दूसरी सीट पर किर्गिस्तान रहेगा, जो पाकिस्तान का स्थान लेगा।

भारत की सदस्यता के पीछे तर्क

  • वैश्विक शासन में अधिक प्रभावी भूमिका: सुरक्षा परिषद की सदस्यता भारत को संघर्ष, आतंकवाद, शांति स्थापना तथा उभरती सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को प्रभावित करने के लिए एक संस्थागत मंच प्रदान करती है।
  • विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व: भारत समान एवं न्यायसंगत वैश्विक शासन तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार से संबंधित विकासशील देशों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से सामने रख सकता है।
  • आतंकवाद-रोधी कूटनीति: सुरक्षा परिषद आतंकवाद, उसके वित्तपोषण से जुड़े नेटवर्क तथा प्रसार के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मंच बनी हुई है।
  • स्थायी सदस्यता का लक्ष्य: सुरक्षा परिषद के चुनावों में बार-बार सफलता भारत के स्थायी सदस्य बनने के दावे को सुदृढ़ कर सकती है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि भारत को व्यापक कूटनीतिक स्वीकार्यता प्राप्त है और वह संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम है।

संबंधित प्रयास एवं प्रमुख बाधाएँ

  • हाल के चुनाव यह दर्शाते हैं कि केवल वैश्विक प्रतिष्ठा किसी देश की जीत सुनिश्चित नहीं करती।
  • वर्ष 2026 में जर्मनी अपनी आर्थिक शक्ति के बावजूद पश्चिमी यूरोपीय समूह की सीट के लिए चुनाव हार गया, जबकि एशिया में किर्गिस्तान को मजबूत समर्थन प्राप्त हुआ।
  • यह स्थिति गठबंधन निर्माण, क्षेत्रीय एकजुटता और मुद्दा-आधारित कूटनीति के महत्व को रेखांकित करती है।
  • सुरक्षा परिषद में भारत के 2021–22 के कार्यकाल तथा विकासशील देशों के साथ उसके बढ़ते संपर्क ने उसकी कूटनीतिक स्थिति को सुदृढ़ किया है।
  • वर्ष 2010 में कजाकिस्तान से संबंधित चुनावी प्रतिस्पर्धा के दौरान भारत ने द्विपक्षीय कूटनीति के माध्यम से प्रत्यक्ष टकराव से बचने के लिए सफलतापूर्वक प्रयास किया और बाद में 187 मत प्राप्त किए।
  • हालाँकि, भारत के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। इनमें क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार, विकासशील देशों के बीच अलग-अलग हित, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तथा संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न समूहों में व्यापक समर्थन प्राप्त करने की आवश्यकता प्रमुख हैं।

आगे की राह

  • भारत को प्रारंभिक चरण से ही निरंतर और समावेशी अभियान चलाना चाहिए। इसके लिए द्विपक्षीय संपर्क के साथ-साथ क्षेत्रीय संगठनों और छोटे देशों तक प्रभावी पहुँच बनाना आवश्यक होगा।
  • भारत की कूटनीति का केंद्र विकास, आतंकवाद-रोधी प्रयास, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, शांति स्थापना तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे साझा मुद्दे होने चाहिए।
  • इसलिए 2028–29 का अभियान केवल एक और निर्वाचित कार्यकाल प्राप्त करने के प्रयास के रूप में नहीं, बल्कि भारत की इस क्षमता को प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए कि वह अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और बहुध्रुवीय संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था के निर्माण में रचनात्मक योगदान दे सकता है।

स्रोत: IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य; GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी संदर्भ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। इसके माध्यम से उपचार में होने वाली देरी को कम किया जा सकता है, चिकित्सक अधिक सूचित एवं बेहतर निर्णय ले सकते हैं तथा अधिक रोगियों को उपयुक्त स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं।...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन, GS3/पर्यावरण संदर्भ न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. पी. कटाके की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने मेघालय सरकार की व्यापक खदान बंदी नीति लागू करने में देरी तथा राज्य में अवैध चूहे के बिल जैसी संकरी सुरंगों वाली कोयला खनन पद्धति को रोकने में विफलता की आलोचना की है। पृष्ठभूमि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि संदर्भ भारत में विगत एक दशक के दौरान शहद के उत्पादन में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। हालांकि, इस मधु क्रांति की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि मधुमक्खियों का संरक्षण किस प्रकार किया जाता है, क्योंकि वे आवश्यक परागणकर्ता होने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में बिना पारिश्रमिक के महत्वपूर्ण भूमिका...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण/आपदा प्रबंधन संदर्भ केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने बताया कि ओडिशा की 564 किलोमीटर लंबी तटरेखा का लगभग 28 प्रतिशत भाग तटीय कटाव से प्रभावित हो रहा है। परिचय यह जानकारी राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) द्वारा किए गए एक अध्ययन पर आधारित है। केंद्र ने वर्ष 1990 से 2022 के...
Read More

श्री अरविंद पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री अरविंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री अरविंद का जन्म 15 अगस्त 1872 को हुआ था और उनका निधन 5 दिसंबर 1950 को हुआ। प्रारंभिक जीवन उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंग्लैंड में सेंट पॉल्स स्कूल, लंदन तथा किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज से प्राप्त की।...
Read More
scroll to top