पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचारों में
- महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026 के माध्यम से महाराष्ट्र महिलाओं के किसान सशक्तिकरण हेतु समर्पित विशेष कानून बनाने वाला भारत का प्रथम राज्य बन गया है।
महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026
- इस अधिनियम का उद्देश्य कृषि में महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान की उपेक्षा को दूर करना तथा भूमि स्वामित्व की परवाह किए बिना उन्हें सरकारी योजनाओं, ऋण, बीमा, कृषि विस्तार सेवाओं, प्रौद्योगिकी एवं बाजारों तक बेहतर पहुँच प्रदान करना है।
- इसमें “किसान” की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके अंतर्गत फसल उत्पादन, पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन, कृषि-वानिकी , मशरूम उत्पादन, वर्मी-कम्पोस्ट उत्पादन तथा प्राथमिक कृषि प्रसंस्करण से जुड़ी महिलाओं को, चाहे वे भूमि की स्वामिनी हों अथवा कृषि श्रमिक, किसान के रूप में मान्यता दी गई है।
- इसकी प्रमुख व्यवस्थाओं में से एक महिला किसान प्रमाण-पत्र (WFC) है, जो महिलाओं को भूमि का स्वामित्व न होने पर भी किसान के रूप में मान्यता प्रदान करता है तथा उन्हें सरकारी लाभ एवं संस्थागत सहायता प्राप्त करने का अधिकार देता है।
- अधिनियम के अंतर्गत महिला किसानों का डिजिटल रजिस्टर, एक समर्पित महिला किसान सशक्तिकरण कोष तथा राज्य, जिला एवं उप-जिला स्तर पर कार्यान्वयन तंत्र की व्यवस्था की गई है।
- इसके अतिरिक्त, कार्यान्वयन की निगरानी हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति तथा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शासी परिषद का गठन किया जाएगा।
कृषि में महिलाओं की भूमिका
- कृषि आज भी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 80 प्रतिशत महिलाएँ कृषि एवं इससे संबद्ध गतिविधियों में संलग्न हैं।
- इनमें से लगभग 33 प्रतिशत महिलाएँ कृषि श्रमिक हैं तथा 48 प्रतिशत महिलाएँ स्वरोज़गार आधारित किसान हैं।
- महिलाएँ कृषि मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण—फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, कृषि-वानिकी, कटाई उपरांत प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन—में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
महत्व
- ग्रामीण कार्यबल की रीढ़: महिला किसान भारत की कृषि प्रगति को गति प्रदान करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- पशुपालन की आधारशिला: महिलाएँ पशुपालन, डेयरी प्रबंधन तथा छोटे जुगाली करने वाले पशुओं के पालन की प्रमुख संचालक हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय को स्थिरता प्राप्त होती है।
- कृषि जैव-विविधता की संरक्षक: महिलाएँ प्रायः पारंपरिक कृषि ज्ञान एवं स्वदेशी बीजों के संरक्षण की प्रमुख संवाहक होती हैं।
- कटाई उपरांत प्रसंस्करण की प्रेरक: महिला सहकारी समितियाँ कटाई उपरांत गतिविधियों का संचालन एवं कच्चे उत्पादों को मूल्य संवर्धित वस्तुओं, जैसे मसाला प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन आदि में परिवर्तित कर खाद्य अपव्यय को कम करने तथा ग्रामीण बाजारों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।
महिला किसानों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- भूमि स्वामित्व का अभाव: अधिकांश महिला किसानों के नाम पर कृषि भूमि का स्वामित्व नहीं होता।
- भूमि का कानूनी स्वामित्व न होने के कारण उन्हें स्वतंत्र किसान के बजाय केवल “सहायक” माना जाता है, जिससे संस्थागत ऋण, फसल बीमा तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुँच सीमित हो जाती है।
- अत्यधिक शारीरिक श्रम: अधिकांश आधुनिक कृषि यंत्र एवं उपकरण पुरुषों की शारीरिक संरचना को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं।
- परिणामस्वरूप महिलाएँ आज भी पारंपरिक एवं कम दक्ष उपकरणों का उपयोग करने के लिए विवश हैं, जिससे अधिक शारीरिक श्रम तथा कम उत्पादकता की समस्या उत्पन्न होती है।
- आधुनिक कृषि ज्ञान तक सीमित पहुँच: उच्च उपज वाली किस्मों (HYV Seeds), जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों तथा डिजिटल कृषि उपकरणों की जानकारी एवं उपयोग से अधिकांश महिलाएँ अभी भी वंचित हैं।
- जलवायु परिवर्तन एवं संवेदनशीलता: सूखा एवं जल संकट जैसी परिस्थितियों में महिलाओं की देखभाल संबंधी जिम्मेदारियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं।
- जल एवं चारे की व्यवस्था हेतु उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कृषि प्रबंधन हेतु उपलब्ध समय कम हो जाता है।
कृषि में महिला किसानों हेतु सरकारी पहल
- एकीकृत कृषि विपणन योजना (ISAM): इस योजना के अंतर्गत कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) के माध्यम से ग्रामीण कृषि विपणन को सुदृढ़ करने हेतु गोदामों एवं भंडारण संरचनाओं के निर्माण एवं आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- महिला किसानों, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) प्रवर्तकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा उत्तर-पूर्व एवं पर्वतीय क्षेत्रों के लाभार्थियों को 33.33 प्रतिशत सब्सिडी, जबकि मैदानी क्षेत्रों के किसानों को 25 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- नमो ड्रोन दीदी योजना: यह वर्ष 2023-26 की अवधि हेतु ₹1,261 करोड़ के परिव्यय वाली एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- इसके अंतर्गत 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि सेवाओं हेतु ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- योजना के तहत ड्रोन खरीदने पर 80 प्रतिशत वित्तीय सहायता (अधिकतम ₹8 लाख) तथा ड्रोन पायलट एवं सहायक के प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जाती है।
- यह योजना कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के अनुरूप भी है, जिसके अंतर्गत महिला, लघु एवं सीमांत, SC/ST तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत सहायता (अधिकतम ₹5 लाख) प्रदान की जाती है।
- राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM): यह वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन क्षेत्र के समग्र विकास को प्रोत्साहित करने वाली एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): यह ग्रामीण निर्धनता उन्मूलन का प्रमुख कार्यक्रम है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाओं को स्वरोज़गार, कौशल विकास, कृषि आधारित उद्यमिता एवं आजीविका के अवसर प्रदान करता है।
- संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS): इस योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से ₹3 लाख तक के अल्पकालिक फसल ऋण 7 प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
- ऋण देने वाले संस्थानों को 1.5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाता है।
- एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH): यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य फल, सब्जियाँ, मसाले, पुष्प एवं बागान फसलों के उत्पादन तथा कटाई उपरांत प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
- अरहर आत्मनिर्भरता मिशन: वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक ₹11,440 करोड़ के परिव्यय वाला यह मिशन तूर, उड़द एवं मसूर के उत्पादन में वृद्धि हेतु प्रारम्भ किया गया है।
- इसके अंतर्गत जलवायु-अनुकूल बीज, खेती का विस्तार, कटाई उपरांत अवसंरचना तथा सुनिश्चित सरकारी खरीद की व्यवस्था की गई है।
- इस मिशन से महिला किसानों सहित सभी दलहन उत्पादकों को लाभ प्राप्त होगा।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): वर्ष 2019 में प्रारम्भ की गई यह केंद्रीय क्षेत्र योजना पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से उनके आधार-संबद्ध बैंक खातों में प्रदान करती है।
- कृषि सखी : यह एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
- इसका उद्देश्य महिला किसानों को प्रशिक्षण, जागरूकता तथा फसल बीमा में सहभागिता हेतु प्रोत्साहित करना है।
- कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2026 तक माहवार कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- कृषि क्षेत्र में महिलाओं का सशक्तिकरण कृषि उत्पादकता में वृद्धि, ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- लैंगिक संवेदनशील योजनाएँ, कौशल विकास कार्यक्रम, महिला-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियाँ तथा संस्थागत समर्थन जैसी लक्षित पहलें महिलाओं के श्रमभार को कम करने, उनकी आय में वृद्धि करने तथा उन्हें कृषि मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक स्तर पर नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
स्रोत : IE
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