संशोधित उड़ान योजना : भारत के क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना

संदर्भ

  • हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2035–36 की अवधि के लिए 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ संशोधित उड़ान (UDAN) योजना को स्वीकृति प्रदान की है।

उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के बारे में

  • क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS) – उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) का शुभारंभ वर्ष 2016 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य विशेष रूप से असेवित एवं अल्पसेवित क्षेत्रों में हवाई यात्रा को किफायती, सुलभ तथा व्यापक बनाना है।
  • प्रमुख विशेषताएँ: चयनित क्षेत्रीय हवाई मार्गों पर किरायों की अधिकतम सीमा निर्धारित करना।
    • विमानन कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) उपलब्ध कराना।
    • अनुपयोगी हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों तथा जल हवाई अड्डों का पुनरुद्धार।
    • केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय तथा परिचालन संबंधी सहायता।
    • क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS) उपकर के माध्यम से वित्तपोषण, जो भारत की एक विशिष्ट क्षेत्र-आधारित वित्तीय व्यवस्था है।

उड़ान योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ (2016–2026)

  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनकर उभरा।
  • परिचालित हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर जुलाई 2026 तक 165 हो गई तथा 679 उड़ान मार्ग संचालित हो रहे हैं।
  • 3.58 लाख से अधिक उड़ानों का संचालन किया गया, जिससे 1.68 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ प्राप्त हुआ।
  • तेजपुर, पासीघाट, पिथौरागढ़, दीव तथा राउरकेला जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर हवाई संपर्क स्थापित हुआ।
  • उड़ान यात्री कैफ़े, फ्लाईब्ररी तथा निःशुल्क वाई-फाई जैसी यात्री-केंद्रित पहलों ने हवाई अड्डों पर यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाया।

संशोधित उड़ान योजना की आवश्यकता का कारण

  • उड़ान योजना के क्रियान्वयन के दौरान अनेक चुनौतियाँ सामने आईं, जैसे—
    • अनेक क्षेत्रीय हवाई अड्डे निरंतर घाटे में संचालित हो रहे थे।
    • संचालन एवं रखरखाव की लागत अत्यधिक थी।
    • अल्प दूरी के क्षेत्रीय मार्गों के लिए उपयुक्त विमानों की उपलब्धता सीमित थी।
    • दूरस्थ क्षेत्रों में हवाई अड्डों की आधारभूत संरचना अपर्याप्त थी।
    • पर्वतीय, द्वीपीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई संपर्क अपेक्षाकृत कमजोर था।
    • निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी तथा योजना की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी।

संशोधित उड़ान योजना (2026)

  • यह योजना आगामी दस वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2035–36) के लिए भारत की क्षेत्रीय विमानन नीति का आगामी चरण है।
  • मुख्य फोकस क्षेत्र: आधारभूत संरचना का विस्तार।
    • हवाई अड्डों का सतत संचालन।
    • विमानन कंपनियों की वित्तीय व्यवहार्यता।
    • हेलीकॉप्टर संपर्क का विस्तार।
    • विमानन क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता का विकास।
    • क्षेत्रों का समावेशी विकास।

प्रमुख घटक

  • हवाई अड्डों का विकास: वर्तमान में अनुपयोगी हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 नए हवाई अड्डों, 441 हवाई पट्टियों तथा 200 आधुनिक हेलीपोर्टों का विकास किया जाएगा।
    • इसका उद्देश्य क्षेत्रीय विमानन आधारभूत संरचना का विस्तार करना, छोटे नगरों को राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क से जोड़ना तथा यात्रियों एवं माल के आवागमन को सुगम बनाना है।
  • संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहायता: छोटे हवाई अड्डों के संचालन एवं रखरखाव हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी—
    • प्रत्येक हवाई अड्डे के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 3.06 करोड़ रुपये
    • प्रत्येक हेलीपोर्ट अथवा जल हवाई अड्डे के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 0.90 करोड़ रुपये
  • विमानन कंपनियों के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): विमानन कंपनियों को अधिकतम पाँच वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
    • तीसरे वर्ष से सहायता राशि क्रमिक रूप से कम की जाएगी।
    • किसी मार्ग पर विशेष परिचालन अधिकार की अवधि अधिकतम तीन वर्ष होगी।
    • इसका उद्देश्य विमानन कंपनियों को तब तक क्षेत्रीय मार्गों पर सेवाएँ संचालित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जब तक वे व्यावसायिक रूप से लाभकारी न बन जाएँ।
  • आत्मनिर्भर भारत एवं स्वदेशी विमानन क्षमता का सुदृढ़ीकरण: योजना के अंतर्गत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित दो ध्रुव हेलीकॉप्टरपवन हंस को तथा दो डोर्नियर विमानएलायंस एयर को उपलब्ध कराए जाएँगे।
    • इसका उद्देश्य स्वदेशी विमान निर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा दुर्गम क्षेत्रों में विमानन सेवाओं की क्षमता को सुदृढ़ करना है।

स्रोत: PIB

 

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