बाजरा की ओर उभरता हुआ कृषि पुनर्संरेखण” 

पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि

संदर्भ

  • ईरान–पश्चिम एशिया संघर्ष, संभावित कमजोर मानसून और उर्वरक आपूर्ति की अनिश्चितताओं के कारण भारतीय किसान कम-इनपुट, जलवायु-सहिष्णु फसलों जैसे बाजरा की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

भारतीय कृषि को प्रभावित करने वाले वर्तमान कारक

  • उर्वरक आपूर्ति: भारत फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के आयात पर अत्यधिक निर्भर है।
    • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ के आसपास की बाधाएँ उर्वरक उपलब्धता और कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
    • पेट्रोलियम-आधारित रासायनिक इनपुट, जो कीटनाशक निर्माण में प्रयुक्त होते हैं, महंगे हो सकते हैं।
  • कमजोर मानसून: सामान्य से कम मानसून की आशंका खरीफ बुवाई और फसल उत्पादकता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।
    • कमजोर वर्षा की स्थिति सिंचाई पर दबाव और भूजल दोहन को बढ़ा सकती है।
  • आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता: भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वस्तु और शिपिंग बाज़ारों को बाधित किया है।
    • अधिक मालभाड़ा और लॉजिस्टिक्स लागत कृषि इनपुट आयात को प्रभावित कर सकती है।

भारतीय कृषि की वर्तमान समस्याएँ

  • कपास की खेती में जोखिम: हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कपास किसान गुलाबी सुंडी  के कारण गंभीर हानि का सामना कर रहे हैं।
    • कपास की खेती में अनेक कीटनाशक छिड़काव और उच्च उर्वरक उपयोग की आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है।
    • कपास चुनाई में श्रम लागत बढ़ने से लाभप्रदता और घट गई है।
  • जल-गहन फसलों पर चिंता: कमजोर मानसून की स्थिति धान और गन्ने जैसी जल-गहन फसलों की खेती को जोखिमपूर्ण बनाती है, जिससे किसान सूखा-सहिष्णु बाजरा की ओर दृष्टिकोण कर रहे हैं।

किसान बाजरा की ओर क्यों बढ़ रहे हैं?

  • कम इनपुट आवश्यकता: बाजरा महंगे आयातित उर्वरकों जैसे DAP और पोटाश पर कम निर्भर है, जिससे वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के समय यह अधिक किफायती है।
  • जलवायु सहिष्णुता: बाजरा सूखा-प्रतिरोधी है और उच्च तापमान व अनियमित वर्षा परिस्थितियों को सहन कर सकता है।
  • लचीला फसल पैटर्न: बाजरा की अवधि लगभग 90–95 दिन होती है, जिससे किसान कटाई के बाद सरसों और ग्रीष्मकालीन मूंग जैसी अतिरिक्त फसलें उगा सकते हैं।
    • बाजरा भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाता है और वार्षिक कृषि आय में वृद्धि करता है।

बाजरा क्या है?

  • बाजरा छोटे दानेदार अनाजीय खाद्य फसलों का समूह है, जिन्हें पोषक-अनाज (Nutri-cereals) कहा जाता है।
  • प्रकार: ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कोदो, सांवा, चेना, छोटा बाजरा और छद्म बाजरा जैसे कुट्टू व राजगिरा।

भारत में बाजरा उत्पादन

  • भारत विश्व का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक है। 2024–25 में कुल 180.15 लाख टन बाजरा का उत्पादन हुआ।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड।

बाजरा की खेती की परिस्थितियाँ

  • जलवायु: बाजरा उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में 2,100 मीटर की ऊँचाई तक उगाया जाता है।
    • वृद्धि के दौरान 26–29°c का औसत तापमान उपयुक्त है।
  • मृदा : बाजरा गरीब से लेकर उपजाऊ मिट्टी तक में उग सकता है और कुछ सीमा तक क्षारीयता सहन कर सकता है।
    • सर्वोत्तम मृदा: जल निकासी वाली दोमट, बलुई और जलोढ़ मृदा।

बाजरा विस्तार की चुनौतियाँ

  • कमजोर खरीद और बाज़ार अवसंरचना: बाजरा की खरीद प्रणाली धान और गेहूँ की तुलना में कमजोर है। भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य-श्रृंखला अवसंरचना अपर्याप्त है।
  • उपभोक्ता प्राथमिकता: सार्वजनिक उपभोग पैटर्न धान और गेहूँ को प्राथमिकता देते हैं। सीमित जागरूकता और अपर्याप्त ब्रांडिंग बाजरा की माँग को बाधित करती है।
  • नीतिगत पक्षपात: वर्तमान सब्सिडी और खरीद प्रणाली धान एवं गेहूँ को प्राथमिकता देती है। किसानों को पारंपरिक अनाजों के लिए अधिक संस्थागत समर्थन मिलता है।

भारत द्वारा बाजरा उत्पादन को बढ़ावा देने के कदम

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित कराने का नेतृत्व किया।
  • उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु ज्वार, बाजरा और रागी के लिए उच्च MSP घोषित किया गया।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन – पोषक-अनाज: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पोषक-अनाज पर उप-मिशन चला रहा है।
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLISMBP):
    • बाजरा आधारित रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों को बढ़ावा देना।
    • बाजरा आधारित खाद्य पदार्थों में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना।
    • बाजरा उत्पादकों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ना।

निष्कर्ष  

  • भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मानसून जोखिम का संगम भारतीय कृषि को अधिक सतत फसल पैटर्न की ओर धकेल रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष से उत्पन्न गति अब बाजरा को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और जलवायु-सहिष्णु फसल के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाने में परिवर्तित हो सकती है।
  • प्रभावी खरीद समर्थन और नीतिगत सहयोग के साथ, 2026 भारत में बाजरा-आधारित कृषि परिवर्तन का निर्णायक वर्ष बन सकता है।

स्रोत: IE

 

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