पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे की प्रथम द्विपक्षीय यात्रा की है, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा 43 वर्षों बाद हुई है।
बैठक की प्रमुख विशेषताएँ
- हरित रणनीतिक साझेदारी: भारत और नॉर्वे ने द्विपक्षीय संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी में उन्नत करने की घोषणा की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु लचीलापन, नीली अर्थव्यवस्था और हरित शिपिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
- नॉर्वे का इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में सम्मिलन: नॉर्वे ने औपचारिक रूप से भारत के IPOI ढाँचे (2019 में प्रारंभ) में शामिल होकर मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
- त्रिकोणीय सहयोग समझौता: भारत और नॉर्वे मिलकर भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) (आधार-यूपीआई-कोविन स्टैक) को ग्लोबल साउथ के देशों को उपलब्ध कराएँगे।
- राजनयिक परिणाम: नॉर्वे ने पुनः भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के समर्थन की पुष्टि की।
- सम्मान: प्रधानमंत्री मोदी को नॉर्वे के राजा हेराल्ड V द्वारा ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया, जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों हेतु नॉर्वे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- हस्ताक्षरित समझौते: स्वच्छ ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा, स्थिरता, भू-विज्ञान और शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु समझौते किए गए।
नॉर्वे
- नॉर्वे उत्तरी यूरोप का एक संकीर्ण देश है, जो स्वीडन और फ़िनलैंड के साथ स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप साझा करता है।
- नॉर्वे का समुद्री तट फ्योर्ड्स (समुद्री खाड़ी) के लिए प्रसिद्ध है, जो हिमनदों द्वारा निर्मित हैं।
- यद्यपि नॉर्वे यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, परंतु यह यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा है और नाटो का सदस्य है।
- राष्ट्रीय आय का सबसे बड़ा स्रोत अपतटीय तेल और गैस का उत्खनन एवं निर्यात है।
- अन्य प्रमुख उद्योगों में मत्स्य पालन, इस्पात, शिपिंग और पर्यटन शामिल हैं।

भारत-नॉर्वे द्विपक्षीय संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- भारत और नॉर्वे ने 1947 में द्विपक्षीय संबंध स्थापित किए।
- इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन प्रारूप ने प्रधानमंत्री स्तर पर नियमित और संरचित संवाद को संभव बनाया।
- प्रथम शिखर सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम में आयोजित हुआ।
- संयुक्त आयोग बैठक (JCM) विदेश मंत्रियों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय तंत्र है, जो दोनों देशों के संबंधों के संपूर्ण आयामों को कवर करता है।
- नॉर्वे भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का समर्थन करता रहा है।
- द्विपक्षीय व्यापार: 2024-25 में यह US $1.05 बिलियन रहा। भारत ने US $630 मिलियन मूल्य का निर्यात किया और US $420 मिलियन मूल्य का आयात किया।
- सेवाओं में व्यापार लगभग US $1 बिलियन रहा।
- भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) — जिसमें नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं — ने 2024 में व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) पर हस्ताक्षर किए।
- निवेश: नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (GPFG) ने 2025 तक भारतीय पूँजी बाज़ार में लगभग US $28 बिलियन का निवेश किया।
- 2000 से 2025 तक नॉर्वे से FDI प्रवाह US $764 मिलियन रहा।
- आर्कटिक/ध्रुवीय सहयोग: भारत ने 2008 में नॉर्वे के स्वालबार्ड में अपना प्रथम स्थायी अनुसंधान केंद्र हिमाद्रि स्थापित किया।
- राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) प्रतिवर्ष आर्कटिक में अनेक वैज्ञानिक अभियानों का संचालन करता है।
- भारत 2013 से आर्कटिक परिषद में पर्यवेक्षक राज्य है।
- अंतरिक्ष सहयोग: इसरो नॉर्वे के स्वालबार्ड ग्राउंड स्टेशन का उपयोग IRS उपग्रहों से डेटा प्राप्त करने हेतु करता है।
- KSAT भी स्वालबार्ड में इसरो का एंटीना स्थापित कर रहा है।
भारत के लिए नॉर्वे का महत्व
- समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था सहयोग: नॉर्वे शिपिंग, मत्स्य पालन, अपतटीय ऊर्जा और महासागर प्रबंधन में वैश्विक अग्रणी है।
- भारत सतत महासागर शासन, बंदरगाह आधुनिकीकरण और समुद्री प्रौद्योगिकी में नॉर्वे की विशेषज्ञता से लाभ उठा सकता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: नॉर्वे विश्व के प्रमुख कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस निर्यातकों में से एक है।
- भारत की ऊर्जा माँग बढ़ने के साथ नॉर्वे ऊर्जा आयात के विविधीकरण हेतु एक स्थिर और विश्वसनीय भागीदार हो सकता है।
- आर्थिक और निवेश संबंध: नॉर्वे भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, समुद्री सेवाओं और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण निवेशक है।
- नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल विश्व के सबसे बड़े संप्रभु निधियों में से एक है, जिसके निवेश भारतीय कंपनियों में हैं।
- भारत–EFTA व्यापार समझौता: 2024 में हस्ताक्षरित TEPA व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने की अपेक्षा है।
- आर्कटिक सहयोग: नॉर्वे भारत की आर्कटिक नीति के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है। भारत और नॉर्वे आर्कटिक अनुसंधान, जलवायु अध्ययन, ध्रुवीय विज्ञान एवं सतत विकास में सहयोग करते हैं।
- यूरोप में रणनीतिक महत्त्व: उत्तरी यूरोप और आर्कटिक क्षेत्र में नॉर्वे का स्थान भारत को उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्रों में उभरते भू-राजनीतिक और व्यापार मार्गों तक रणनीतिक पहुँच प्रदान करता है।
निष्कर्ष
- नॉर्वे भारत का एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है — समुद्री सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्कटिक अनुसंधान, जलवायु कार्रवाई, व्यापार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में।
- भारत-नॉर्वे संबंधों को सुदृढ़ करना भारत की आर्थिक वृद्धि, हरित संक्रमण और आर्कटिक एवं यूरोपीय क्षेत्रों में रणनीतिक सहभागिता को समर्थन देगा।
स्रोत: TH