मादक पदार्थों की समस्या और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए एक समान वैश्विक कानूनी ढाँचे, खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया।

भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या

  • AIIMS और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार:
    • 16 करोड़ से अधिक भारतीय शराब का सेवन करते हैं, जिनमें से 5.7 करोड़ को चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है।
    • 2.3 करोड़ से अधिक लोग कैनबिस और ओपिओइड्स का उपयोग करते हैं।
    • 10-75 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1.08% भारतीय (लगभग 1.18 करोड़ लोग) गैर-चिकित्सकीय, गैर-प्रिस्क्रिप्शन उपयोग हेतु सिडेटिव्स का सेवन करते हैं।
    • इनहेलेंट्स विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में चिंता का विषय हैं, जिनमें उपयोग की दर (1.17%) वयस्कों (0.58%) की तुलना में अधिक है।

भारत में मादक पदार्थों की समस्या के कारण

  • भौगोलिक स्थिति: भारत गोल्डन क्रेसेंट और गोल्डन ट्रायंगल जैसे प्रमुख वैश्विक मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों के निकट स्थित है।
    • पंजाब, मणिपुर और असम जैसे राज्यों में आसान सीमापार तस्करी से मादक पदार्थों का प्रवाह होता है।
  • युवाओं की संवेदनशीलता: साथियों का दबाव, तनाव, बेरोजगारी और जिज्ञासा युवाओं को मादक पदार्थों के उपयोग की ओर ले जाती है।
  • कमज़ोर प्रवर्तन: अपर्याप्त निगरानी, भ्रष्टाचार और भारित एजेंसियाँ प्रभावी नियंत्रण में बाधा डालती हैं।
  • आसान उपलब्धता: ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, स्थानीय विक्रेता और फ़ार्मेसी मादक पदार्थों को अधिक सुलभ बनाते हैं।
  • सामाजिक विघटन: टूटे परिवार, अलगाव और सामुदायिक समर्थन की कमी व्यसन के जोखिम को बढ़ाते हैं।

गोल्डन ट्रायंगल

  • इसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के क्षेत्र शामिल हैं।
  • यह दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख अफीम उत्पादन क्षेत्र है और यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका तक मादक पदार्थों की सबसे पुरानी आपूर्ति मार्गों में से एक है।

गोल्डन क्रेसेंट

  • इसमें अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं।
  • यह अफीम उत्पादन और वितरण का प्रमुख वैश्विक केंद्र है।

मादक पदार्थों के दुरुपयोग का प्रभाव

  • आर्थिक प्रभाव: उत्पादकता घटती है, स्वास्थ्य देखभाल लागत बढ़ती है और मानव पूँजी कमजोर होती है।
  • स्वास्थ्य प्रभाव: मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं, HIV/AIDS और हेपेटाइटिस फैलते हैं तथा शारीरिक क्षति होती है।
  • सामाजिक प्रभाव: परिवार टूटते हैं, घरेलू हिंसा बढ़ती है और सामाजिक अलगाव एवं कलंक उत्पन्न होता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाव: मादक पदार्थों का व्यापार नार्को-आतंकवाद, संगठित अपराध को बढ़ावा देता है और युवाओं की संलिप्तता राष्ट्रीय अखंडता को कमजोर करती है।

उठाए गए कदम

  • भारतीय पहलें:
    • नार्कोटिक ड्रग्स एंड सायकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज़ अधिनियम, 1985 (NDPS Act): अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन, नियंत्रण, बिक्री और सेवन पर रोक लगाता है तथा उल्लंघन पर दंड निर्धारित करता है।
    • नशा मुक्त भारत अभियान (2020): मादक पदार्थों के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और नशा मुक्त भारत को बढ़ावा देने हेतु शुरू किया गया।
    • एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फ़ोर्स (ANTF): कई राज्यों ने राज्य स्तर पर मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन को सुदृढ़ करने हेतु ANTF स्थापित किए।
    • डार्कनेट मॉनिटरिंग सेल: नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अंतर्गत ऑनलाइन मादक पदार्थ बिक्री की निगरानी करता है।
    • काशी घोषणा-पत्र: नशा मुक्त भारत हेतु पाँच वर्षीय रोडमैप, जो वाराणसी में युवा आध्यात्मिक सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित हुआ।
    • भारत ने 2047 तक नशा मुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • वैश्विक पहलें:
    • संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC): अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध वैश्विक संघर्ष में अग्रणी। यह अभियान मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय नार्कोटिक्स नियंत्रण बोर्ड (INCB): वैश्विक मादक पदार्थ स्थिति की निगरानी करता है और देशों की अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अनुपालन का आकलन करता है।

आगे की राह

  • वैश्विक शासन को सुदृढ़ करना: देशों को समन्वित मादक पदार्थ विरोधी कानून और मज़बूत प्रत्यर्पण संधियाँ अपनानी चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को मादक पदार्थ प्रवर्तन हेतु सामान्य प्रोटोकॉल विकसित करने चाहिए।
  • खुफिया सहयोग का विस्तार: एकीकृत डेटाबेस और वास्तविक समय खुफिया प्लेटफ़ॉर्म की स्थापना से रोकथाम प्रयासों में सुधार होगा।
  • प्रवर्तन के साथ पुनर्वास: सख्त प्रवर्तन के साथ-साथ सरकारों को पुनर्वास, जागरूकता अभियान, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और युवाओं की भागीदारी कार्यक्रमों पर ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष

  • भारत में बढ़ती मादक पदार्थों की समस्या जनस्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
  • हालाँकि, स्थायी सफलता के लिए सरकार, नागरिक समाज और समुदायों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक होंगे, जिसमें रोकथाम, पुनर्वास एवं युवाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाए, ताकि एक वास्तविक नशा मुक्त भारत का निर्माण हो सके।

Source: TH

 

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