आशा है कि भारत चाबहार का विकास जारी रखेगा: ईरान के विदेश मंत्री 

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध

संदर्भ

  • ईरान के विदेश मंत्री ने चाबहार बंदरगाह को “स्वर्णिम द्वार” बताया और आशा व्यक्त की कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह का विकास जारी रखेगा।

परिचय

  • भारत और ईरान ने 2015 में शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह, चाबहार के संयुक्त विकास हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
  • उद्देश्य: एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र का विकास करना, जिससे भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशियाई देशों और रूस के बाजारों तक पहुँच मिल सके।
  • चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट:
  • प्रथम छूट (2018): अमेरिका ने भारत को चाबहार से संबंधित प्रतिबंधों से मुक्त किया, इसके मानवीय और क्षेत्रीय संपर्क लाभों को स्वीकार करते हुए।
  • नवीनीकृत छूट: आगे भी छूट दी गई, जिससे भारत शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल और संबंधित संपर्क परियोजनाओं में संचालन जारी रख सका।
  • भारत ने अपने 2026-27 के केंद्रीय बजट में ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया।
    • विगत कुछ वर्षों में भारत इस परियोजना के लिए प्रतिवर्ष ₹100 करोड़ का प्रावधान करता रहा है।

चाबहार बंदरगाह

  • ईरान का चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर स्थित है और यह देश का एकमात्र समुद्री (ओशैनिक) बंदरगाह है।
  • यह सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के चाबहार शहर में स्थित है।
  • यह ऊर्जा-समृद्ध फारस की खाड़ी के दक्षिणी तट तक पहुँच प्रदान करता है और पाकिस्तान को दरकिनार करता है।
  • गुजरात का कांडला बंदरगाह सबसे निकट है, जो 550 नौटिकल मील दूर है, जबकि चाबहार और मुंबई के बीच की दूरी 786 नौटिकल मील है।

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व

  • भूराजनीतिक महत्व: यह दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और मध्य पूर्व के संगम पर रणनीतिक रूप से स्थित है। यह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान एवं मध्य एशिया तक सीधी समुद्री पहुँच प्रदान करता है।
    • यह बंदरगाह मध्य एशियाई देशों और अफगानिस्तान के बीच माल यातायात हेतु होरमुज़ जलडमरूमध्य से एक वैकल्पिक मार्ग भी प्रदान करता है। इससे भारत की रणनीतिक स्थिति सुदृढ़ होती है।
  • INSTC का प्रवेश द्वार: चाबहार बंदरगाह भारत की ईरान तक पहुँच को बढ़ाएगा, जो अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का प्रमुख द्वार है। इसमें भारत, रूस, ईरान, यूरोप और मध्य एशिया के बीच समुद्री, रेल और सड़क मार्ग शामिल हैं।
  • चीन का सामना: चाबहार बंदरगाह भारत को अरब सागर में चीन की उपस्थिति का मुकाबला करने में सहायता करता है, जहाँ चीन पाकिस्तान को ग्वादर बंदरगाह विकसित करने में सहायता कर रहा है।
  • व्यापार लाभ: चाबहार बंदरगाह के कार्यशील होने से भारत में लौह अयस्क, चीनी और चावल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
    • तेल के आयात की लागत भी काफी कम होगी।
  • भारत का निवेश: 2024 के समझौते के अंतर्गत, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने बंदरगाह को सुसज्जित करने हेतु 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश करने का वचन दिया है।
    • इसके अतिरिक्त, भारत ने चाबहार से जुड़ी अवसंरचना विकास के लिए 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा भी प्रदान की है।

आगे की राह

  • क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए, भारत का चाबहार में निरंतर निवेश मध्य एशिया और अफगानिस्तान में दीर्घकालिक संपर्क एवं आर्थिक हितों के लिए आवश्यक है।
  • चाबहार बंदरगाह का विकास भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय पहुँच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए अमेरिका एवं ईरान दोनों के साथ सावधानीपूर्वक राजनयिक वार्ता आवश्यक होगी।

Source: IE

 

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