पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET-UG) 2026 को प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया। इस घटना ने भारत की परीक्षा प्रशासन प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर किया है और प्रणाली की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित करना अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।
भारत में प्रश्नपत्र लीक के प्रमुख कारण
- प्रश्नपत्र लीक का अर्थ है परीक्षा प्रश्नपत्रों का परीक्षा से पूर्व अनधिकृत रूप से सार्वजनिक होना, जिससे निष्पक्षता, योग्यता और जनविश्वास प्रभावित होता है।
- यह भारत की परीक्षा प्रणाली में एक प्रमुख प्रशासनिक एवं संस्थागत चुनौती के रूप में उभरा है।
- उच्च-दांव वाली परीक्षा प्रणाली: भारत की प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थी सीमित सीटों या रोजगार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- उदाहरण: NEET, JEE, CUET, SSC, रेलवे भर्ती परीक्षा, तथा राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाएँ।
- इस तीव्र प्रतिस्पर्धा से संगठित नकल नेटवर्क को प्रोत्साहन मिलता है।
- कमज़ोर संस्थागत क्षमता: अनेक परीक्षा संस्थाएँ खराब प्रशासनिक योजना, अपर्याप्त स्टाफ, पेशेवर विशेषज्ञता की कमी और एजेंसियों के बीच कमजोर समन्वय से ग्रस्त हैं।
- बड़े पैमाने की परीक्षाओं के लिए उन्नत प्रबंधन प्रणाली आवश्यक होती है, जो प्रायः अनुपस्थित रहती है।
- अंदरूनी मिलीभगत: प्रश्नपत्र लीक में प्रायः प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी, परीक्षा अधिकारी, पर्यवेक्षक, आईटी स्टाफ और परिवहन कर्मी शामिल होते हैं।
- आंतरिक पहुँच प्रश्नपत्रों को परीक्षा शुरू होने से पहले ही असुरक्षित बना देती है।
- कमज़ोर साइबर सुरक्षा एवं तकनीकी अंतराल: डिजिटलाइजेशन के बढ़ने से परीक्षा प्रणाली हैकिंग, सर्वर उल्लंघन, डेटा चोरी और मैलवेयर हमलों जैसी जोखिमों का सामना करती है।
- यदि एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा उपाय कमजोर हों तो इलेक्ट्रॉनिक रूप से संग्रहीत या प्रेषित प्रश्नपत्र असुरक्षित हो जाते हैं।
- संगठित नकल नेटवर्क: आपराधिक गिरोह कोचिंग संस्थानों, दलालों, साइबर विशेषज्ञों और भ्रष्ट अधिकारियों को शामिल कर परिष्कृत प्रश्नपत्र लीक रैकेट चलाते हैं।
- ये नेटवर्क लीक हुए प्रश्नपत्रों को भारी धनराशि में बेचते हैं।
- सुरक्षित परीक्षा अवसंरचना का अभाव: कई परीक्षा केंद्रों में CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, सुरक्षित इंटरनेट प्रणाली और मानकीकृत प्रक्रियाएँ नहीं होतीं।
- कमजोर अवसंरचना से कदाचार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
- अपर्याप्त निगरानी और ऑडिट: अनेक परीक्षा एजेंसियाँ स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट, वास्तविक समय निगरानी, आकस्मिक निरीक्षण और प्रश्नपत्रों की संपूर्ण ट्रैकिंग नहीं करतीं।
- कमजोर पर्यवेक्षण से लीक तब तक अनदेखा रह जाता है जब तक परीक्षा समाप्त नहीं हो जाती।
- विलंबित कानूनी प्रवर्तन: यद्यपि कानून मौजूद हैं, लेकिन धीमी जाँच, कमजोर अभियोजन और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण दंड अक्सर विलंबित होता है।
- कम दोषसिद्धि दर से निवारक प्रभाव घट जाता है।
- कोचिंग संस्कृति और व्यावसायीकरण: विशाल कोचिंग उद्योग सफलता के लिए अत्यधिक दबाव उत्पन्न करता है और अनैतिक प्रथाओं के लिए व्यावसायिक प्रोत्साहन देता है।
- कुछ कोचिंग नेटवर्क कथित रूप से लीक सिंडिकेट से जुड़े होते हैं।
- परीक्षाओं का अति-केंद्रीकरण: राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ, जिनमें लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, जोखिम को एक ही प्रणाली में केंद्रित कर देती हैं।
- एक बार की चूक पूरे देश की परीक्षाओं, प्रवेश और भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
NEET का महत्व
- अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सीमित सीटें: NEET भारत में चिकित्सा शिक्षा का प्रवेश द्वार है। प्रतिवर्ष 20 लाख से अधिक छात्र लगभग 1,20,000 MBBS सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- इससे गंभीर मांग-आपूर्ति असंतुलन उत्पन्न होता है।
सीटों की कमी के परिणाम
- कोचिंग संस्कृति का उदय: छात्र वर्षों तक महंगे कोचिंग संस्थानों के माध्यम से तैयारी करते हैं। परिवार प्रायः जीवनभर की बचत निवेश करते हैं।
- मनोवैज्ञानिक दबाव: तीव्र प्रतिस्पर्धा तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ाती है। परीक्षा दबाव से जुड़ी छात्र आत्महत्याएँ गंभीर चिंता का विषय हैं।
- विदेश में चिकित्सा शिक्षा: सीटों की कमी के कारण हजारों भारतीय छात्र रूस, यूक्रेन, चीन और फिलीपींस जैसे देशों में MBBS की पढ़ाई करते हैं।
सरकारी उपाय एवं उनका महत्व
- चिकित्सा सीटों का विस्तार: केंद्र सरकार ने पाँच वर्षों में 75,000 चिकित्सा सीटें जोड़ने की घोषणा की है।
- यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात सुधरेगा, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा घटेगी, विदेशी चिकित्सा शिक्षा पर निर्भरता कम होगी और परिवारों पर वित्तीय दबाव घटेगा।
- तथापि, केवल सीट विस्तार से परीक्षा प्रशासन की प्रणालीगत विफलताएँ दूर नहीं होंगी।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA): इसे 2017 में शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त एवं विशेषीकृत परीक्षा निकाय के रूप में स्थापित किया गया।
- इसका उद्देश्य पारदर्शी एवं मानकीकृत परीक्षा आयोजित करना, वैज्ञानिक एवं तकनीक-आधारित मूल्यांकन पद्धति अपनाना, प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं को कम करना और वैश्विक मानकों वाली परीक्षा प्रणाली बनाना था।
- वर्तमान में यह NEET-UG, JEE Main, CUET-UG और UGC-NET जैसी प्रमुख परीक्षाएँ आयोजित करती है।
- राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें: NEET 2024 विवाद के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की।
- समिति ने reportedly 101 सिफारिशें दीं, जिनमें प्रश्नपत्रों का एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रसारण, AI-आधारित निगरानी प्रणाली, मानकीकृत परीक्षा केंद्र, सुदृढ़ CCTV निगरानी, उन्नत साइबर सुरक्षा, स्टाफ प्रशिक्षण और जवाबदेही तंत्र शामिल थे।
- किंतु इनका केवल आंशिक क्रियान्वयन हुआ है।
- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024: इस अधिनियम में 10 वर्ष तक की कठोर कारावास और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना जैसी कठोर सजाएँ निर्धारित की गईं।
- यह प्रभावी नहीं हो पाया क्योंकि प्रवर्तन क्षमता कमजोर है, संगठित नकल नेटवर्क सक्रिय हैं, अंदरूनी मिलीभगत है, निगरानी प्रणाली कमजोर है और जाँच में विलंब होता है।
- यह दर्शाता है कि केवल दंडात्मक कानून परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं कर सकते, जब तक संस्थागत सुधार न किए जाएँ।
आगे की राह
- संस्थागत पुनर्गठन (NTA): राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को व्यापक सुधार की आवश्यकता है, जिसमें पेशेवर एवं स्थायी स्टाफिंग, स्वतंत्र पर्यवेक्षण तंत्र, पारदर्शी ऑडिट प्रणाली और अधिक परिचालन विकेंद्रीकरण शामिल हो।
- तकनीकी सुरक्षा उपाय: भारत को प्रश्नपत्रों का संपूर्ण एन्क्रिप्शन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित असामान्यता पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन और वास्तविक समय साइबर सुरक्षा निगरानी को सुदृढ़ करना होगा।
- विकेंद्रीकृत परिचालन क्षमता: एक संकर मॉडल जिसमें केंद्रीय स्तर पर मानक निर्धारण और राज्य स्तर पर लॉजिस्टिक क्रियान्वयन शामिल हो, प्रशासनिक भार कम करने और उत्तरदायित्व बढ़ाने में सहायक होगा।
- मानसिक स्वास्थ्य एवं छात्र कल्याण: परीक्षा सुधारों में परामर्श सहायता, परीक्षा दबाव में कमी, बहु-परीक्षण अवसर और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली को शामिल करना आवश्यक है।
- शैक्षिक क्षमता का विस्तार: दीर्घकालिक सुधार के लिए अधिक चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना, सुलभ उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य एवं शिक्षा अवसंरचना में बेहतर सार्वजनिक निवेश आवश्यक है।
- अभाव को कम करने से एकल परीक्षा पर असमान्य भार घटेगा।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत में प्रश्नपत्र लीक के प्रमुख कारणों पर चर्चा कीजिए। ऐसे विफलताओं के लिए उत्तरदायी संस्थागत खामियों की जाँच कीजिए तथा सार्वजनिक परीक्षाओं में विश्वसनीयता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही बहाल करने हेतु उपाय सुझाइए। |
स्रोत: BS