भारत का ईवी संक्रमण और कैफ़े मानकों का शिथिलीकरण 

पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप; GS3/ऊर्जा

संदर्भ

  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा प्रस्तावित हालिया कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानक भारत की दीर्घकालिक ईवी महत्वाकांक्षाओं को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करते हैं।

कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानक क्या हैं?

  • ये ऐसे विनियम हैं जो ऑटोमोबाइल निर्माताओं को देश में विक्रय किए जाने वाले वाहनों की औसत ईंधन दक्षता में सुधार करने के लिए बाध्य करते हैं।
  • उद्देश्य: जीवाश्म ईंधन की खपत कम करना, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाना, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना, विद्युत गतिशीलता को प्रोत्साहित करना और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • इन मानकों को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा लागू किया जाता है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)

  • यह ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
  • 2002 में परिचालन शुरू हुआ और यह केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

BEE के उद्देश्य

  • भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को कम करना।
  • विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना।
  • ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • सतत विकास का समर्थन करना।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना।

BEE के प्रमुख कार्य

  • ऊर्जा दक्षता नीतियाँ बनाना: ऊर्जा संरक्षण, ईंधन दक्षता और औद्योगिक ऊर्जा उपयोग से संबंधित मानक एवं विनियम तैयार करना।
  • मानक और लेबलिंग कार्यक्रम: उपकरणों के लिए स्टार-रेटिंग प्रणाली लागू करना, जिससे उपभोक्ता ऊर्जा दक्ष उत्पादों की पहचान कर सकें।
  • कवर किए गए उत्पाद: एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, पंखे, LED बल्ब, गीजर आदि।
  • CAFE मानक: ऑटोमोबाइल के लिए ईंधन दक्षता मानक लागू करना।
  • PAT योजना (प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार): औद्योगिक ऊर्जा दक्षता सुधार हेतु बाज़ार-आधारित तंत्र।
    • कवर किए गए क्षेत्र: ताप विद्युत संयंत्र, सीमेंट, इस्पात, उर्वरक, एल्युमिनियम आदि।
    • ऊर्जा दक्ष उद्योगों को ऊर्जा बचत प्रमाण पत्र(ESCerts) प्रदान किए जाते हैं।
  • ECBC (ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता): वाणिज्यिक भवनों और शहरी अवसंरचना के लिए ऊर्जा दक्षता मानक विकसित करना।
  • ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना: ईवी चार्जिंग अवसंरचना मानक, ऊर्जा दक्ष परिवहन नीतियाँ और स्वच्छ गतिशीलता पहल।

भारत के लिए ईवी अपनाना क्यों महत्वपूर्ण है?

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत कच्चे तेल आयात पर भारी विदेशी मुद्रा व्यय करता है। ईवी अपनाने से तेल आयात पर निर्भरता घटेगी, चालू खाते का संतुलन सुधरेगा और रणनीतिक स्वायत्तता सुदृढ़ होगी।
    • विकसित भारत 2047 की दृष्टि स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण पर बल देती है।
  • जलवायु प्रतिबद्धताएँ: भारत ने पेरिस समझौते के अंतर्गत उत्सर्जन तीव्रता घटाने, गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और 2070 तक नेट-ज़ीरो हासिल करने का संकल्प लिया है।
    • परिवहन क्षेत्र शहरी प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में बड़ा योगदान देता है। ईवी जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।
  • आर्थिक अवसर: नीति आयोग के अनुसार भारत का ईवी पारिस्थितिकी तंत्र $200 बिलियन का आर्थिक अवसर सृजित कर सकता है, जिसमें बड़े पैमाने पर विनिर्माण रोजगार, घरेलू बैटरी और सेमीकंडक्टर उद्योग शामिल हैं।
    • FAME इंडिया योजना, PLI योजना (ACC बैटरियों हेतु), PM E-Drive पहल इस संक्रमण को समर्थन देती हैं।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: विश्व के कई देश तीव्रता से ईवी अपना रहे हैं – नेपाल (लगभग 75%), सिंगापुर (40% से अधिक), वियतनाम (40% से अधिक), थाईलैंड (23%), इंडोनेशिया (20%), दक्षिण कोरिया (15% से अधिक), ब्राज़ील (लगभग 10%), जबकि भारत (लगभग 2.5%)।
    • यदि भारत विद्युतीकरण में विलंब करता है तो यह पुरानी प्रौद्योगिकियों का बाज़ार बनने का जोखिम उठाता है।

नए मसौदा कैफ़े मानकों से जुड़ी चिंताएँ

  • ईवी लक्ष्यों का शिथिलीकरण: मसौदा मानकों से ईवी महत्वाकांक्षा का क्रमिक कमजोर होना स्पष्ट होता है, जो भारत की घोषित नीतिगत दिशा के विपरीत है।
    • 2024 मसौदे में ईवी हिस्सेदारी 14–15% लक्षित थी।
    • 2025 मसौदे में इसे घटाकर 11–12% किया गया।
    • 2026 मसौदे में इसे और घटाकर 2032 तक 8–9% कर दिया गया।
  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) को अत्यधिक प्रोत्साहन: मसौदा 22.3% कार्बन न्यूट्रैलिटी लाभ और अतिरिक्त सुपर क्रेडिट्स प्रदान करता है।
    • समस्या यह है कि वास्तविक उत्सर्जन में कमी केवल 1–3% है।
    • भारत में E85 ईंधन अवसंरचना नगण्य है।
    • परिणामस्वरूप अनुपालन आसान हो जाता है, किंतु पर्यावरणीय लाभ नगण्य रहते हैं।
  • प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों (PHEVs) का अति-प्रचार: मसौदा PHEVs को 2.5 का गुणक देता है, जो लगभग बैटरी ईवी के बराबर है।
    • यूरोपीय संघ, अमेरिका और चीन के अनुभव बताते हैं कि PHEVs वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में प्रयोगशाला परीक्षणों की तुलना में कहीं अधिक उत्सर्जन करते हैं।
    • कई देश ऐसे प्रोत्साहनों को घटा रहे हैं, जबकि भारत इन्हें बढ़ाता हुआ प्रतीत होता है।
  • मौजूदा प्रौद्योगिकियों को पुरस्कृत करना: मानक स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम, माइल्ड हाइब्रिड और LED लाइटिंग जैसी तकनीकों के लिए क्रेडिट प्रदान करते हैं।
    • ये तकनीकें पहले से ही वाहनों में सामान्य हैं और कोई परिवर्तनकारी नवाचार नहीं दर्शातीं।
    • इससे उन्नत स्वच्छ गतिशीलता को प्रोत्साहित करने के बजाय यथास्थिति को सब्सिडी मिलती है।
  • भारत की नीतिगत दृष्टि से विरोधाभास: शिथिल कैफ़े मानक प्रधानमंत्री के 2030 तक ईवी बिक्री में आठ गुना वृद्धि के आह्वान के विपरीत हैं।
    • यह नीति आयोग के ईवी रोडमैप और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं से भी विरोधाभासी है।

कमजोर ईवी विनियमों के रणनीतिक जोखिम

  • प्रौद्योगिकीय अप्रचलन: यदि भारत संक्रमण में विलंब करता है, तो पारंपरिक ऑटोमोबाइल निर्माता पुरानी ICE तकनीकें बेचते रहेंगे।
    • भारत अप्रचलित वाहनों का डंपिंग ग्राउंड बन सकता है।
  • विनिर्माण नेतृत्व का नुकसान: वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र एक सदी में सबसे बड़े परिवर्तन से गुजर रहा है।
    • ईवी में आक्रामक निवेश करने वाले देश बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र और हरित प्रौद्योगिकी निवेश आकर्षित कर रहे हैं।
    • कमजोर विनियमन से भारत इस अवसर को खो सकता है।
  • आर्थिक और व्यापारिक असुरक्षा: जीवाश्म ईंधन पर निरंतर निर्भरता भारत को तेल मूल्य आघातों, भू-राजनीतिक अस्थिरता और मुद्रा दबावों के प्रति संवेदनशील बनाए रखती है।
    • ईवी समय के साथ इन कमजोरियों को अत्यंत सीमा तक कम कर सकते हैं।

आगे की राह

  • कैफ़े मानकों को सुदृढ़ करना: महत्वाकांक्षी उत्सर्जन कमी लक्ष्य निर्धारित करना और मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना।
  • बैटरी ईवी को प्राथमिकता देना: शून्य-उत्सर्जन वाहनों पर प्रोत्साहन केंद्रित करना और संक्रमणकालीन तकनीकों को अत्यधिक रियायतें देने से बचना।
  • चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी, शहरी और राजमार्ग चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना: बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना, स्वदेशी R&D को प्रोत्साहित करना और ईवी पारिस्थितिकी तंत्र में MSMEs का समर्थन करना।
  • स्थिर और पूर्वानुमेय नीतिगत ढाँचा: उद्योग को दीर्घकालिक नियामक निश्चितता, स्पष्ट ईवी संक्रमण समयसीमा और सतत वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न : भारत का विद्युत गतिशीलता (Electric Mobility) की ओर संक्रमण एक सामरिक और आर्थिक अनिवार्यता है। भारत में कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानकों के शिथिलीकरण से जुड़ी चिंताओं की विवेचना कीजिए। 

स्रोत: HT

 

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