पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास के साथ, अनेक नियमित व्हाइट कॉलर कार्य, विशेषकर आईटी सेवाओं, वित्त, ग्राहक सहायता और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में, तीव्रता से स्वचालित हो रहे हैं। इससे रोजगार विस्थापन और भविष्य के रोजगारों को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोजगार विस्थापन
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: तकनीकी क्रांतियों ने ऐतिहासिक रूप से कुछ रोजगारों को समाप्त किया है, जबकि नई संभावनाएँ भी उत्पन्न की हैं।
- औद्योगिक क्रांति ने मशीनों के माध्यम से श्रम को प्रतिस्थापित किया।
- कंप्यूटरीकरण ने लिपिकीय कार्यों को कम किया।
- हालाँकि, पूर्ववर्ती व्यवधानों के दौरान अर्थव्यवस्थाएँ विस्तारित हुईं और विस्थापित श्रमिकों को समाहित कर लिया।
- वर्तमान AI क्रांति भिन्न है क्योंकि:
- AI संज्ञानात्मक और विश्लेषणात्मक कार्य कर सकती है।
- स्वचालन अभूतपूर्व गति से हो रहा है।
- भू-राजनीतिक अस्थिरता आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ा रही है।
- प्रवेश-स्तर की व्हाइट कॉलर रोजगार अधिक असुरक्षित हो रही हैं।
AI द्वारा उत्पन्न अवसर
- उभरते क्षेत्र: AI नैतिकता एवं विनियमन, डेटा विश्लेषण, मानव-AI सहयोग, स्वास्थ्य तकनीक, हरित तकनीक और रोबोटिक्स रखरखाव में रोजगार उत्पन्न कर सकती है।
- उत्पादकता लाभ: शासन दक्षता, कृषि पूर्वानुमान, स्वास्थ्य सेवा, न्यायिक प्रशासन और आपदा प्रबंधन में सुधार संभव है।
- वैश्विक नेतृत्व क्षमता: भारत के पास विशाल आईटी कार्यबल, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और युवा जनसंख्या जैसी ताकतें हैं। उचित नीति समर्थन से भारत वैश्विक AI केंद्र बन सकता है।
- एजेंटिक AI का उदय: ‘एजेंटिक AI’ ऐसे सिस्टम हैं जो स्वतंत्र रूप से कार्यों की पहचान और निष्पादन कर सकते हैं।
- उन्नत AI उपकरण जैसे चैटजीपीटी, क्लाउड और एंटरप्राइज AI सिस्टम अब कोड लिखने, कानूनी दस्तावेज तैयार करने, ग्राहक सहायता संभालने, HR संचालन प्रबंधित करने और वित्तीय विश्लेषण करने में सक्षम हैं।
- इससे बड़े मानव दलों पर निर्भरता घटती है।
- रक्षा अनुप्रयोग: देश स्वायत्त ड्रोन, AI-सहायता प्राप्त निगरानी और रोबोटिक युद्ध प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं।
- सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने ड्रोन प्रयोगशालाएँ स्थापित की हैं और प्रशिक्षण एवं अनुसंधान हेतु IITs के साथ सहयोग किया है। यह दर्शाता है कि AI केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।
संबंधित चिंताएँ एवं चुनौतियाँ
- प्रवेश-स्तर रोजगारों में कमी: कॉल सेंटर, डेटा प्रोसेसिंग, कोडिंग सहायता और प्रशासनिक सहयोग में भर्ती घट सकती है।
- कौशल असंगति: AI विशेषज्ञों, डेटा वैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और रोबोटिक्स इंजीनियरों की मांग बढ़ रही है, परंतु अनेक स्नातकों में उन्नत डिजिटल कौशल का अभाव है।
- बढ़ती असमानता: उच्च कौशल वाले श्रमिकों को अधिक लाभ मिलेगा, जबकि मध्यम कौशल वाले बेरोजगारी का सामना करेंगे।
- जनसांख्यिकीय लाभ पर दबाव: यदि उत्पादक रोजगार उपलब्ध नहीं होंगे तो भारत का जनसांख्यिकीय लाभ दायित्व बन सकता है।
नीति-निर्माताओं के समक्ष चुनौतियाँ
- नैतिक एवं विनियामक मुद्दे: एल्गोरिथ्मिक पक्षपात, डेटा गोपनीयता, निगरानी जोखिम और स्वायत्त प्रणालियों में जवाबदेही प्रमुख चिंताएँ हैं।
- सामाजिक स्थिरता: शिक्षित युवाओं में व्यापक बेरोजगारी आर्थिक संकट, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, सामाजिक अशांति और राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न कर सकती है।
भारत के लिए निहितार्थ
- आईटी और आउटसोर्सिंग क्षेत्र पर खतरा: भारत की आर्थिक प्रगति आईटी सेवाओं, BPO, KPO और बैक-ऑफिस संचालन पर अत्यंत सीमा तक निर्भर रही है। इन क्षेत्रों ने मध्यमवर्गीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न किया।
- व्हाइट कॉलर रोजगार पेशेवर, प्रबंधकीय, प्रशासनिक या कार्यालय-आधारित कार्यों को संदर्भित करती हैं, जो मुख्यतः मानसिक या बौद्धिक श्रम पर आधारित होती हैं।
- हालाँकि, AI इस मॉडल को चुनौती दे रही है क्योंकि स्वचालित प्रणालियाँ अब स्रोत पर ही अनेक दोहराए जाने वाले डिजिटल कार्य कर सकती हैं, जिससे आउटसोर्सिंग की आवश्यकता घट रही है।
सरकारी पहल एवं नीतिगत प्रतिक्रिया
- IndiaAI मिशन: इसका उद्देश्य AI अवसंरचना, नवाचार और कौशल को सुदृढ़ करना है। इसमें AI कंप्यूटिंग क्षमता का विकास, स्टार्टअप समर्थन, AI अनुसंधान को बढ़ावा तथा स्वदेशी AI मॉडल का निर्माण शामिल है।
- स्किल इंडिया मिशन: कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं को डिजिटल साक्षरता, AI एवं मशीन लर्निंग प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा और उद्योग साझेदारी के माध्यम से उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार करते हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: NEP 2020 आलोचनात्मक चिंतन, बहुविषयक शिक्षा, कोडिंग एवं डिजिटल कौशल और शिक्षा में लचीलापन पर बल देती है। ये सुधार AI-प्रेरित श्रम बाजार के अनुकूलन हेतु महत्वपूर्ण हैं।
आगे की राह
- व्यापक पुनः-कौशल कार्यक्रम: सतत् अधिगम को कार्यबल नीति का केंद्रीय तत्व बनाना होगा।
- मानव-केंद्रित AI को बढ़ावा: AI को मानव क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए, न कि पूरी तरह प्रतिस्थापित करना।
- सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना: बेरोजगारी बीमा और संक्रमण समर्थन तंत्र आवश्यक हैं।
- अनुसंधान एवं नवाचार में निवेश: भारत को AI अनुसंधान एवं विकास, सेमीकंडक्टर निर्माण और डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- समावेशी संक्रमण की आवश्यकता: AI-प्रेरित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में सामाजिक सुरक्षा, पुनः-कौशल कार्यक्रम, श्रम बाजार सुधार और सार्वजनिक-निजी सहयोग सुनिश्चित होना चाहिए।
- नैतिक AI ढाँचा: उत्तरदायी AI परिनियोजन सुनिश्चित करने हेतु सशक्त विनियमन आवश्यक है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत में व्हाइट कॉलर रोजगारों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव पर चर्चा कीजिए। AI-प्रेरित स्वचालन से उत्पन्न चुनौतियों की समीक्षा कीजिए तथा समावेशी एवं सतत् रोजगार सृजन सुनिश्चित करने हेतु उपाय सुझाइए। |
स्रोत: BL
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