रू-सोम पुल (Ru-Soam Bridges)
पाठ्यक्रम: जीएस-1 / संस्कृति; जीएस-3 / पर्यावरण
सन्दर्भ
- यूनेस्को ने सिक्किम सरकार के साथ मिलकर रू-सोम (बाँस/बेत आधारित पुल निर्माण) की स्वदेशी इंजीनियरिंग परंपरा के दस्तावेजीकरण के लिए साझेदारी की है।
- यह परियोजना एयरबीएनबी(Airbnb) के सहयोग से खांगचेंदज़ोंगा (Khangchendzonga) बायोस्फीयर रिज़र्व में लागू की जा रही है।
रू-सोम पुल के बारे में
- रू-सोम पारंपरिक बेत (cane) से बने पुल हैं, जिनका निर्माण लेपचा समुदाय द्वारा किया जाता है।
- इन पुलों के निर्माण में स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री जैसे बाँस, बेत और लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
- ये संरचनाएँ पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल उच्च स्तर की पारिस्थितिक समझ और संरचनात्मक मजबूती को दर्शाती हैं।
- वर्ष 2023 में सिक्किम में आई सिक्किम ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड 2023 के दौरान इन पुलों ने अपनी मजबूती और लचीलापन सिद्ध किया।

स्रोत: IE
तंज़ानिया
पाठ्यक्रम : जीएस-1/भूगोल
समाचार में
- हाल ही में भारत–तंजानिया संयुक्त व्यापार समिति (JTC) का 5वाँ सत्र तंजानिया के दार एस सलाम में आयोजित किया गया।
भारत–तंजानिया संयुक्त व्यापार समिति (JTC)
यह भारत और तंजानिया के बीच व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक द्विपक्षीय मंच है।
इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है।
इस प्रकार की समितियाँ नियमित संवाद के माध्यम से व्यापार बाधाओं को दूर करने तथा सहयोग के नए अवसर विकसित करने में सहायक होती हैं।
तंज़ानिया
- यह पूर्वी अफ्रीका का एक देश है जो भूमध्य रेखा के ठीक दक्षिण में स्थित है।
- इसकी राजधानी डोडोमा है, और दार एस सलाम इसका सबसे बड़ा शहर और मुख्य बंदरगाह है।
- इसकी सीमाएँ उत्तर में युगांडा, केन्या और विक्टोरिया झील से; पूर्व में हिंद महासागर से; दक्षिण में मोज़ाम्बिक, मलावी, ज़ाम्बिया और न्यासा झील से; तथा पश्चिम में रवांडा, बुरुंडी और तांगानिका झील से मिलती हैं।
- भौगोलिक विशेषताएँ: माउंट किलिमंजारो तंजानिया में स्थित है,जो अफ्रीकी महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी है।
- तंजानिया में विक्टोरिया झील का भी एक हिस्सा शामिल है, जो अफ्रीका की सबसे बड़ी झील है और नील नदी का उद्गम स्थल है।
- तंजानिया से होकर कई नदियाँ बहती हैं, जिनमें ग्रेट रुहा, रुफिजी और कगेरा नदियाँ शामिल हैं।
- टांगानिका झील, तंजानिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ द कांगो के बीच सीमा बनाती है।
भारत–तंजानिया सहयोग
- भारत और तंजानिया ने अपने आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ किया है। वर्ष 2025–26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9.02 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष 8.64 अरब डॉलर था।
- दोनों देशों ने व्यापार तंत्र को बेहतर बनाने, स्थानीय मुद्रा में भुगतान की संभावनाओं की खोज, व्यवसायियों के लिए वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा शुल्क एवं नियामकीय बाधाओं को कम करने पर सहमति व्यक्त की है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
- औषधि उद्योग
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- खनन
- कृषि
- शिक्षा
- डिजिटल प्रौद्योगिकी
स्रोत : TH
आदर्श आचार संहिता (MCC)
पाठ्यक्रम: जीएस-2 / राजनीति एवं शासन
सन्दर्भ
- हाल ही में प्रधानमंत्री के प्रसारण के बाद यह बहस पुनः तेज हुई कि क्या आदर्श आचार संहिता चुनाव के दौरान सार्वजनिक संसाधनों और सरकारी मंचों के उपयोग को पर्याप्त रूप से नियंत्रित करती है।
आदर्श आचार संहिता क्या है?
- यह भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का एक समूह है, जो चुनाव अवधि के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रचार-प्रसार को नियंत्रित करता है।
- इसका उद्देश्य स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना, समान अवसर प्रदान करना तथा राजनीतिक आचरण में नैतिकता बनाए रखना है।
आदर्श आचार संहिता का विकास
- 1960 में इसे पहली बार केरल सरकार द्वारा चुनाव प्रचार को नियंत्रित करने के लिए तैयार किया गया था।
- 1968 में इसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक रूप से अपनाया गया, ताकि पूरे देश में एक समान रूप से लागू किया जा सके।
- 1974 में इसके दायरे का विस्तार करते हुए संशोधन किया गया।
- 1991 में टी. एन. शेषन के कार्यकाल में इसका कड़ाई से पालन शुरू हुआ, जिससे इसकी विश्वसनीयता में वृद्धि हुई।
संवैधानिक एवं विधिक आधार
- आदर्श आचार संहिता कोई विधिक कानून नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 324 से अपनी शक्ति प्राप्त करती है, जो निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने का अधिकार देता है।
- इसके कुछ प्रावधानों को अन्य कानूनों के माध्यम से लागू किया जा सकता है, जैसे:
- भारतीय दंड संहिता, 1860
- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951
- मोहिंदर सिंह गिल बनाम मुख्य निर्वाचन आयुक्त में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है।
- हरबंस सिंह जलाल बनाम भारत संघ में यह निर्णय दिया गया कि आदर्श आचार संहिता चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की तिथि से प्रभावी हो जाती है।
स्रोत: TH
सुप्रीम कोर्ट ने ज़बरन एसिड पिलाए जाने से बचे लोगों को ‘दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम’ के दायरे में लाया
पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन
सन्दर्भ
- सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि जबरन अम्ल (एसिड) सेवन के पीड़ितों को भी ‘अम्ल हमले के पीड़ित’ की परिभाषा में शामिल किया जाएगा, जो कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आता है।
परिचय
- 2016 के कानून में केवल अम्ल फेंकने (acid throwing) के पीड़ितों को मान्यता दी गई थी, जबरन अम्ल सेवन को इसमें शामिल नहीं किया गया था।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:
- जबरन अम्ल सेवन करने वाले पीड़ितों को भी ‘अम्ल हमले के पीड़ित’ माना जाएगा।
- यह प्रावधान अधिनियम के प्रारंभ (2016) से ही पूर्वव्यापी रूप से लागू माना जाएगा।
- इसमें वे सभी मामले भी शामिल होंगे जिनमें आंतरिक क्षति हुई हो, भले ही बाह्य विकृति (visible disfigurement) न हो।
- इस “मान्य मान्यता” (deemed recognition) से ऐसे पीड़ितों को दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत मिलने वाले लाभ प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
न्यायालय की टिप्पणी एवं निर्देश
- न्यायालय ने सुझाव दिया कि ऐसे पीड़ितों की सुरक्षा हेतु एक व्यापक नीति ढाँचा तैयार किया जाए।
- क्योंकि जीवित बचे पीड़ितों को दीर्घकालिक और निरंतर चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता होती है।
महत्त्व
- यह निर्णय पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करता है।
- यह विधिक परिभाषा को विस्तृत कर न्याय और पुनर्वास तक पहुँच को सशक्त बनाता है।
- यह दिव्यांग अधिकारों की समावेशी व्याख्या की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्रोत: TH
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 दिशा-निर्देश
पाठ्यक्रम : जीएस-2/शासन
सुर्खियों में क्यों ?
- हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह घोषणा राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अच्छे अभ्यासों और नवाचारों पर आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान की गई।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK)
- यह एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य बच्चों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना और समुदाय में सभी बच्चों को व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है।
- इसके अंतर्गत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की चार प्रकार की स्थितियों की स्क्रीनिंग की जाती है, जिन्हें “4D” कहा जाता है:
- जन्मजात दोष (Defects at birth)
- रोग (Diseases)
- पोषण की कमी (Deficiencies)
- विकास संबंधी विलंब (Developmental delays)
- इस कार्यक्रम में 32 सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों की पहचान कर प्रारंभिक उपचार तथा निःशुल्क उपचार एवं प्रबंधन की सुविधा दी जाती है, जिसमें तृतीयक स्तर पर शल्य चिकित्सा भी शामिल है।
- चिन्हित बच्चों को जिला स्तर पर प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाएँ तथा अनुवर्ती देखभाल प्रदान की जाती है।
RBSK 2.0 दिशा-निर्देश
4D दृष्टिकोण का सुदृढ़ीकरण:
- इसमें जन्मजात दोष, रोग, पोषण की कमी और विकासात्मक विलंब के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ और व्यवहार संबंधी मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
समग्र देखभाल दृष्टिकोण:
- यह रोकथाम, संवर्धन और उपचार तीनों को शामिल करता है तथा जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास पर बल देता है।
स्क्रीनिंग एवं पहचान का विस्तार:
- विकासात्मक विकारों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और गैर-संचारी रोगों के जोखिम कारकों को भी शामिल किया गया है।
- सेवाएँ आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में मोबाइल स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से दी जाएँगी।
डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली:
- डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, वास्तविक समय डेटा प्रणाली और एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और साक्ष्य-आधारित निर्णय को बढ़ावा दिया गया है।
अंतर-क्षेत्रीय समन्वय:
- स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास क्षेत्रों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है, जिसमें स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक मंचों के माध्यम से संयुक्त स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।
स्रोत :PIB
हँतावायरस प्रकोप
पाठ्यक्रम: जीएस-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज़ जहाज पर संदिग्ध हँतावायरस प्रकोप के बाद तीन यात्रियों की मृत्यु हुई, जिसकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी।
परिचय
- हन्ता वायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ज़ूनोटिक रोग (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला रोग) है। यह हँताविरिडी परिवार का आरएनए वायरस है।
- यह मुख्यतः चूहों और मूषकों जैसे कृंतकों (rodents) द्वारा फैलता है।
- संक्रमण संक्रमित चूहों के मूत्र या मल से उत्पन्न वायुजनित कणों को साँस के माध्यम से लेने से या दूषित सतहों को छूने से होता है।
- मानव से मानव में संक्रमण सामान्यतः अत्यंत दुर्लभ होता है।
रोग के लक्षण
- संक्रमण के बाद 1 से 8 सप्ताह के भीतर सामान्यतः बुखार और थकान जैसे फ्लू-सदृश लक्षण दिखाई देते हैं।
- गंभीर अवस्था में यह फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है, जिसे हँटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है।
- इससे श्वसन तंत्र में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है और यह घातक भी हो सकता है।
उपचार
- इस रोग के लिए कोई विशिष्ट औषधि उपलब्ध नहीं है।
- उपचार मुख्यतः सहायक देखभाल पर आधारित होता है, जिसमें गंभीर मामलों में श्वसन सहायता के लिए वेंटिलेटर का उपयोग शामिल है।
स्रोत: DTE
गिरमिटिया समुदाय
पाठ्यक्रम: विविध
सन्दर्भ
- विदेश मंत्री ने जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा प्रारम्भ की है।
- इन देशों का भारत से विशेष संबंध है क्योंकि वहाँ गिरमिटिया समुदायों की उपस्थिति है।
परिचय
- “गिरमिटिया” वे भारतीय मज़दूर थे, जो 19वीं शताब्दी के मध्य से अंत तक ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भारत से गए थे और बाद में वहीं बस गए।
- “गिरमिट” शब्द “एग्रीमेंट” (Agreement) का अपभ्रंश है, जो उनके प्रवासन के अनुबंध को दर्शाता है।
- इन श्रमिकों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, दक्षिण अफ्रीका जैसे उपनिवेशों में ले जाया गया था।
- इन समुदायों की सांस्कृतिक और भाषाई जड़ें मुख्यतः बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं, विशेषकर भोजपुरी भाषा एवं परंपराओं से।
स्रोत: AIR