आईएमएफ पेपर: भारत में डिजिटलीकरण सुधारों से एमएसएमई  की उत्पादकता में सुधार हुआ।

पाठ्यक्रम : जीएस-3/अर्थव्यवस्था 

सन्दर्भ

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक हालिया कार्यपत्र में यह बताया गया है कि भारत में लोक प्रशासन के डिजिटलीकरण से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की उत्पादकता में सुधार हुआ है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत में वर्ष 2010-11 से 2014-15 के बीच किए गए व्यापारिक परिवेश सुधार मुख्यतः व्यवसाय से जुड़े लोक प्रशासन के डिजिटलीकरण के माध्यम से किए गए।
  • इस अध्ययन में सुधारों को छह क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है: कर प्रणाली, निर्माण अनुमति, पर्यावरण एवं श्रम अनुपालन, निरीक्षण व्यवस्था, वाणिज्यिक विवाद तथा एकल खिड़की स्वीकृति प्रणाली।
  • जिन राज्यों ने इन सुधारों को अधिक लागू किया, वहाँ कुल कारक उत्पादकता अधिक पाई गई।
  • डिजिटल साधनों ने प्रशासनिक बोझ को कम किया, विशेष रूप से छोटे उद्यमों के लिए।

भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs)

  • एमएसएमई वे उद्यम होते हैं जिन्हें उनके निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर परिभाषित किया जाता है।
  • यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह रोजगार सृजन करता है, आय बढ़ाता है तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
  • वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे प्रमुख हिस्सा हैं, जो लगभग 90% उद्यमों का प्रतिनिधित्व करते हैं और 50% से अधिक रोजगार प्रदान करते हैं।

भारत में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान इस प्रकार है:

  • लगभग 35.4% विनिर्माण क्षेत्र में
  • लगभग 48.58% निर्यात में
  • लगभग 31.1% सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में
  • देश में 7.47 करोड़ से अधिक उद्यम हैं, जो 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
  • यह क्षेत्र कृषि के बाद भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है।

भारत में MSME क्षेत्र की चुनौतियाँ

वित्त तक पहुँच की कमी:

  • संपार्श्विक (जमानत) की कमी, सीमित ऋण इतिहास और औपचारिक वित्तीय संस्थानों तक सीमित पहुँच के कारण पूँजी प्राप्त करना कठिन होता है।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा:

  • बड़े और स्थापित उद्यमों की तुलना में एमएसएमई को संसाधनों और बाजार प्रभाव के कारण अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

तकनीकी ज्ञान की कमी:

  • कई एमएसएमई आधुनिक तकनीक अपनाने और उत्पादन प्रक्रियाओं को उन्नत करने में पीछे रह जाते हैं।

विपणन एवं नेटवर्किंग की सीमाएँ:

  • सीमित संसाधनों और नेटवर्क के कारण उत्पादों के प्रभावी विपणन में बाधा आती है।

नियामकीय बोझ:

  • कर कानूनों, श्रम नियमों और लाइसेंसिंग की जटिलताओं से संचालन कठिन हो जाता है।

कुशल श्रम की कमी:

  • प्रशिक्षित और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सीमित है।

बाह्य कारकों के प्रति संवेदनशीलता:

  • महामारी, मुद्रास्फीति और वैश्विक मंदी जैसे झटकों से यह क्षेत्र अधिक प्रभावित होता है।

MSME को समर्थन देने हेतु प्रमुख पहल

केंद्रीय बजट 2026-27 में एमएसएमई को “चैंपियन” बनाने के लिए त्रि-आयामी दृष्टिकोण प्रस्तावित किया गया है, जिसमें शामिल हैं:

  • पूँजी (इक्विटी) सहायता
  • तरलता (लिक्विडिटी) सहायता
  • व्यावसायिक एवं प्रबंधन सहायता
  • पीएम विश्वकर्मा योजना: 2023 में शुरू की गई यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसका संचालन वर्ष 2023-24 से वर्ष 2027-28 तक किया जा रहा है।
  • इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना, उनके उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना तथा उन्हें व्यापक बाजारों से जोड़ना है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना (CGSMSE):

  • यह योजना बिना किसी संपार्श्विक या तीसरे पक्ष की गारंटी के, सदस्य ऋण संस्थानों द्वारा दिए गए ऋण के लिए गारंटी सुरक्षा प्रदान करती है।
  • इसका उद्देश्य एमएसएमई को आसानी से ऋण उपलब्ध कराना है।

उद्यम पंजीकरण पोर्टल:

  • 2020 में शुरू किया गया यह पोर्टल सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए निःशुल्क, कागज-रहित और स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण प्रक्रिया प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP):

  • यह एक ऋण-संलग्न सब्सिडी योजना है, जो गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देती है।

एमएसएमई हैकथॉन 4.0 (2024):

  • यह 500 युवा उद्यमियों को नवाचार और इन्क्यूबेशन के लिए प्रति व्यक्ति 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

एमएसएमई-टीम योजना (2024):

  • 277.35 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह व्यापार सशक्तिकरण योजना है।
  • इसके अंतर्गत 5 लाख सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (जिनमें 2.5 लाख महिला-नेतृत्व वाले उद्यम शामिल हैं) को डिजिटल पंजीकरण, सूचीकरण, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग में सहायता दी जाती है।

खादी एवं ग्रामोद्योग:

  • सरकार खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को खादी एवं ग्रामोद्योग विकास योजना (KGVY) के माध्यम से प्रोत्साहित कर रही है, जो एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना:

  • यह एमएसएमई को वैश्विक बाजारों में प्रवेश कराने में सहायता करती है।
  • इसमें अंतर्राष्ट्रीय मेलों, प्रदर्शनियों और ज्ञान-साझा कार्यक्रमों में भागीदारी को प्रतिपूर्ति आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है।

निष्कर्ष

  • एमएसएमई भारत की विकास यात्रा में नवाचार, रोजगार सृजन और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • मजबूत नीतिगत समर्थन, डिजिटल साधनों और नए बाजारों तक पहुँच के साथ यह क्षेत्र समावेशी और सतत विकास का प्रमुख आधार बनता जा रहा है।

स्रोत : IMF

 

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