भारत में निःशुल्क लाभ वितरण/फ्रीबीज़(freebies) एवं प्रत्यक्ष नकद अंतरण

पाठ्यक्रम: GS3/भारतीय अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में नकद हस्तांतरण, मुफ्त बिजली, परिवहन और वस्तुओं के वादे किए गए, जिन्हें जनकल्याणकारी उपाय माना गया। ये समावेशी विकास, गरीबी उन्मूलन और माँग सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, साथ ही वित्तीय अनुशासनहीनता के प्रति सावधानी भी आवश्यक है।

मुफ्त सुविधाएँ एवं नकद हस्तांतरण क्या हैं?

  • फ्रीबीज़(Freebies): वस्तुएँ या सेवाएँ जो राजनीतिक या कल्याणकारी उद्देश्यों हेतु मुफ्त या अत्यधिक सब्सिडी दरों पर प्रदान की जाती हैं। इसमें मुफ्त बिजली, जल, लैपटॉप, साइकिल और मुफ्त परिवहन शामिल हैं।
  • नकद हस्तांतरण : लाभार्थियों को सीधे धनराशि हस्तांतरित करना, सामान्यतः प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से। 2010 के बाद भारत की सामाजिक नीति में यह केंद्रीय भूमिका निभाता है, जिससे आधार-संलग्न प्रणालियों द्वारा वितरण दक्षता में सुधार हुआ।
  • केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा प्रमुख नकद हस्तांतरण योजनाएँ:
  • PM-KISAN (₹6,000 वार्षिक): किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): खाद्य सुरक्षा योजना (लगभग ₹2 लाख करोड़ वार्षिक)।
  • मनरेगा (MGNREGA): रोजगार गारंटी योजना (₹80,000 करोड़ – ₹1 लाख करोड़ प्रति वर्ष)।

प्रमुख उपकरण/तंत्र

  • DBT: आधार-संलग्न बैंक खातों में हस्तांतरण, जिसका उद्देश्य रिसाव और भ्रष्टाचार कम करना है।
  • JAM त्रिमूर्ति (जनधन, आधार, मोबाइल): कल्याणकारी वितरण की रीढ़।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): सब्सिडी वाले अनाज द्वारा खाद्य सुरक्षा।
  • मनरेगा (MGNREGA): मजदूरी आधारित हस्तांतरण (रोजगार गारंटी)।
  • केंद्रीय प्रायोजित योजनाएँ: PM-KISAN, PMGKAY, पेंशन, छात्रवृत्तियाँ।

नकद हस्तांतरण एवं मुफ्त सुविधाओं के लाभ

  • गरीबी उन्मूलन: प्रत्यक्ष आय सहायता न्यूनतम उपभोग स्तर को सुधारती है। COVID के दौरान PMGKAY ने अत्यधिक गरीबी को रोकने में सहायता की।
  • माँग सृजन: गरीब परिवारों की उपभोग प्रवृत्ति अधिक होती है, जिससे ग्रामीण माँग, FMCG क्षेत्र और MSMEs को बढ़ावा मिलता है।
    • NSSO उपभोग सर्वेक्षणों में खाद्य से गैर-खाद्य व्यय की ओर बदलाव दिखता है, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है।
    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं ने महिला गतिशीलता और शिक्षा में सुधार दिखाया है।
  • समावेशी विकास: असमानताओं को कम करता है और कमजोर वर्गों को समर्थन देता है।
  • महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को नकद हस्तांतरण वित्तीय स्वायत्तता और घरेलू कल्याण में सुधार करता है; मुफ्त परिवहन से विद्यालय छोड़ने की दर घटती है तथा महिला श्रम भागीदारी बढ़ती है।
  • सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षा जाल: संकट के समय स्वतः स्थिरकारी की भूमिका निभाता है; मनरेगा ग्रामीण आजीविका को समर्थन देता है।
  • दक्ष वितरण: DBT रिसाव और मध्यस्थों को कम करता है; डिजिटलीकरण द्वारा समर्थित।

प्रमुख चिंताएँ एवं मुद्दे

  • राजकोषीय भार: उच्च सब्सिडी राज्य बजट पर दबाव डालती है; FRBM सीमा (3 – 3.5% GSDP) से अधिक होने का जोखिम।
  • लोकलुभावनवाद बनाम उत्पादकता: राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अस्थिर वादों को जन्म देती है; दीर्घकालिक निवेश की बजाय अल्पकालिक लाभ को प्राथमिकता।
  • पूँजीगत व्यय का समझौता: अवसंरचना, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए निधि कम हो जाती है, जिससे दीर्घकालिक विकास प्रभावित होता है।
  • नैतिक जोखिम: कार्य प्रोत्साहन में कमी और निर्भरता संस्कृति का खतरा।
  • लक्ष्यीकरण समस्याएँ: समावेशन/बहिष्करण त्रुटियाँ; कुछ लाभ गैर-योग्य समूहों तक पहुँचते हैं।
  • अप्रभावी संसाधन आवंटन: मुफ्त बिजली से भूजल का अत्यधिक उपयोग; बाज़ार संकेतों में विकृति।
  • दीर्घकालिक स्थिरता: एक बार शुरू होने पर योजनाओं को वापस लेना कठिन।

आगे की राह

  • लक्षित कल्याण, न कि सार्वभौमिक फ्रीबीज़: आवश्यकता-आधारित हस्तांतरण पर ध्यान; डेटा-आधारित पहचान का उपयोग।
  • सार्वभौमिक मूल आय (UBI) (क्रमिक दृष्टिकोण): आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 द्वारा सुझाया गया। यह अनेक सब्सिडियों को मूल आय सहायता से प्रतिस्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
  • पूँजीगत व्यय एवं कल्याण में संतुलन: विकास (पूँजीगत व्यय) और समानता (हस्तांतरण) बनाए रखना।
  • DBT पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना: वित्तीय समावेशन और डिजिटल अवसंरचना में सुधार।
  • राजकोषीय अनुशासन एवं पारदर्शिता: मेरिट सब्सिडी बनाम मुफ्त सुविधाओं का स्पष्ट वर्गीकरण; स्वतंत्र राजकोषीय परिषदें।
  • परिणाम-आधारित कल्याण: शिक्षा (शर्तीय नकद हस्तांतरण) और स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ना।
  • रोजगार सृजन: दीर्घकालिक समाधान जैसे कौशल विकास, विनिर्माण वृद्धि; हस्तांतरण पर निर्भरता कम करना।

निष्कर्ष

  • नकद हस्तांतरण को मात्र ‘मुफ्त सुविधा’ कहना एक जटिल नीति उपकरण को सरल बना देता है। जब इन्हें लक्षित और वित्तीय रूप से प्रबंधित किया जाए, तो ये उपभोग माँग बढ़ाते हैं, सामाजिक समानता को प्रोत्साहित करते हैं तथा आर्थिक स्थिरकारी की भूमिका निभाते हैं।
  • भारत में, जहाँ संरचनात्मक असमानताएँ और रोजगार अंतराल बने हुए हैं, नकद हस्तांतरण केवल राजनीतिक साधन नहीं बल्कि आर्थिक आवश्यकता हैं—कम से कम तब तक जब तक विकास अधिक रोजगार-प्रधान न हो जाए।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न: नकद हस्तांतरण और सब्सिडियों की समावेशी विकास को बढ़ावा देने में भूमिका का परीक्षण कीजिए। संबंधित चुनौतियों को रेखांकित कीजिए और एक संतुलित नीतिगत दृष्टिकोण सुझाइए।

स्रोत: BL

 

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