पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- न्यूनतम वेतन की माँग; सामाजिक सुरक्षा के दायरे के विस्तार; तथा रोजगारों के ठेकेदारीकरण के विरुद्ध अनेक आंदोलनों की पृष्ठभूमि में ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर चर्चा सामने आई है।
ट्रेड यूनियन
- ट्रेड यूनियन श्रमिकों तथा नियोक्ताओं की स्वैच्छिक संगठनात्मक इकाइयाँ होती हैं, जिनका गठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा और संवर्धन के लिए किया जाता है।
- ये संगठन नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संबंधों को संतुलित एवं सुधारने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माने जाते हैं।
- श्रमिक वेतन और कार्य परिस्थितियों पर अपनी सौदेबाज़ी शक्ति बनाए रखने तथा उसे सुधारने के लिए एकजुट होते हैं।
- भारत में [प्रथम संगठित ट्रेड यूनियन मद्रास लेबर यूनियन वर्ष 1918 में गठित हुई।
- 1926: ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 का अधिनियमन (कानूनी मान्यता)।
- प्रमुख ट्रेड यूनियन संगठन:
- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस
- मज़दूर संघ
- सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स
- हिंद मज़दूर सभा
ट्रेड यूनियनों की भूमिका
- सामूहिक सौदेबाज़ी: नियोक्ताओं के साथ वेतन, बोनस और सेवा शर्तों पर वार्ता।
- श्रमिक अधिकारों की रक्षा: अनुचित बर्खास्तगी, शोषण और वेतन कटौती से सुरक्षा।
- विवाद समाधान: हड़ताल/तालेबंदी रोकने हेतु श्रमिकों और प्रबंधन के बीच मध्यस्थता।
- कल्याणकारी गतिविधियाँ: स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा में सहयोग।
- जागरूकता एवं शिक्षा: श्रमिकों को अधिकारों, कानूनों और जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना।
- नीति समर्थन: श्रम कानूनों और सरकारी नीतियों को प्रभावित करना।
- संगठन एवं आंदोलन: आवश्यकता पड़ने पर विरोध, हड़ताल और आंदोलन आयोजित करना।
- संचार सुविधा: प्रबंधन और श्रमिकों के बीच सेतु का कार्य करना।
हाल की चिंताएँ
- सौदेबाज़ी शक्ति में गिरावट: 1991 से पूर्व सार्वजनिक क्षेत्र में यूनियनों की शक्ति अपेक्षाकृत अधिक थी। उदारीकरण के बाद श्रम बाज़ार के अनौपचारिक होने से यूनियनों की शक्ति घटती गई।
- विखंडन और बहुलता: एक ही उद्योग या उद्यम में अनेक यूनियनों का अस्तित्व आपसी प्रतिद्वंद्विता और कमजोर सौदेबाज़ी का कारण बनता है।
- राजनीतिक हस्तक्षेप: कई यूनियनें राजनीतिक दलों से संबद्ध होती हैं, जिससे ध्यान श्रमिक कल्याण से हटकर राजनीतिक एजेंडे पर चला जाता है।
- नई अर्थव्यवस्था में सीमित पहुँच: गिग वर्कर, प्लेटफ़ॉर्म वर्कर और फ़्रीलांसरों का प्रतिनिधित्व कमजोर है, जिससे बिखरे एवं डिजिटल कार्यस्थलों में संगठन कठिन हो जाता है।
- श्रमिकों में कम जागरूकता: प्रवासी और अनौपचारिक श्रमिक प्रायः अधिकारों से अनभिज्ञ रहते हैं, जिससे यूनियन सदस्यता एवं भागीदारी सीमित होती है।
ट्रेड यूनियनों से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा
- मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 19(1)(c) संघ या यूनियन बनाने का अधिकार देता है। परंतु यह अधिकार पूर्ण नहीं है; अनुच्छेद 19(4) सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में युक्तिसंगत प्रतिबंध की अनुमति देता है।
- संविधान हड़ताल का अधिकार नहीं देता। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यूनियन बनाने का अधिकार हड़ताल का अधिकार नहीं है।
- राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSPs) श्रम कल्याण में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं:
- अनुच्छेद 38: न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 39: पर्याप्त आजीविका सुनिश्चित करना और शोषण रोकना।
- अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार।
- अनुच्छेद 42: न्यायसंगत और मानवीय कार्य परिस्थितियाँ, मातृत्व राहत।
- अनुच्छेद 43: जीवन निर्वाह योग्य वेतन और सम्मानजनक जीवन स्तर।
- अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी।
आगे की राह
- सरकार को अनौपचारिक और गिग क्षेत्रों में यूनियनकरण के विस्तार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- श्रमिक संरक्षण हेतु कानूनी ढाँचे को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
- सरकार, नियोक्ता और श्रमिकों के बीच सामाजिक संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए।
Source: TH
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