भारत–यूएई आर्थिक गलियारा: उपलब्धि से गति की ओर

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक साझेदारी निर्धारित समय से पाँच वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर ली गई है और अब वर्ष 2032 तक 200 अरब डॉलर का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात संबंधों के बारे में

  • राजनीतिक एवं कूटनीतिक संबंध:1972 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए। 2017 में संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
    • इसमें नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय यात्राएँ और क्षेत्रीय स्थिरता व आतंकवाद-रोधी सहयोग शामिल है।
    • यूएई उन कुछ देशों में से है जहाँ भारतीय प्रधानमंत्री को यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ है।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध: यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
    • द्विपक्षीय व्यापार प्रतिवर्ष 80–85 अरब डॉलर से अधिक है।
    • यूएई भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रमुख स्रोत है।

नीतिगत आधार: CEPA और उससे आगे

  • CEPA समझौता (2022): भारत और यूएई ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर किए।
    • दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा।
    • इसने लगभग 90% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त कर दिया।
    • CEPA एक मुक्त व्यापार समझौता है जो आयात करों को कम या समाप्त करता है, व्यापार को सस्ता और तीव्र बनाता है, निवेश को प्रोत्साहित करता है और निर्यात को बढ़ावा देता है।
  • द्विपक्षीय निवेश संधि (2024): निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करती है।
  • रणनीतिक रक्षा साझेदारी: भू-राजनीतिक गहराई जोड़ती है।

आर्थिक पैमाना और रूपांतरण

  • तेल से परे व्यापार: दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार विगत वर्ष लगभग 20% बढ़कर 65 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
    • यह ऊर्जा-केंद्रित संबंध से विविधीकृत आर्थिक साझेदारी की ओर निर्णायक विकास का संकेत है।
  • भारतीय प्रवासी एवं संपर्क: लगभग 50 लाख भारतीय यूएई में निवास करते हैं और कार्य करते हैं।
    • हवाई संपर्क: प्रति सप्ताह 1,200 से अधिक उड़ानें, जो विश्व के सबसे व्यस्त हवाई गलियारों में से एक है।
    • विस्तृत आर्थिक गलियारा: भारत–यूएई संबंध अब विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, वित्त और उन्नत प्रौद्योगिकी तक विस्तारित हो चुके हैं, साथ ही तेल एवं ऊर्जा संबंध भी बने हुए हैं।
  • औद्योगिक एवं विनिर्माण विस्तार: भारतीय कंपनियों ने यूएई के साथ निम्न-कार्बन रसायन परियोजनाओं (2 अरब डॉलर से अधिक), इलेक्ट्रिक बस उत्पादन और सौर-प्लस-भंडारण परियोजनाओं में साझेदारी की है।
    • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने ऊर्जा सुरक्षा हेतु दीर्घकालिक LNG समझौते किए।
  • यूएई निवेश भारत में: यूएई कंपनियों ने भारत के अवसंरचना, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश किया है।
    • अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी गिफ्ट सिटी  में आधार स्थापित करने वाला प्रथम संप्रभु कोष बना।
    • 2000 से अब तक भारत में यूएई का निवेश: 22 अरब डॉलर से अधिक।
    • भारत का यूएई में निवेश: 16 अरब डॉलर से अधिक।
  • तृतीय बाज़ारों में विस्तार: भारत मार्ट (निर्माणाधीन) भारतीय वस्तुओं के लिए थोक केंद्र के रूप में कार्य करेगा और अफ्रीका, पश्चिम एशिया एवं यूरेशिया जैसे क्षेत्रों में भारत के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है।
    • दोनों देश संयुक्त डिजिटल अवसंरचना पहल, अफ्रीका में क्षमता-विकास परियोजनाएँ और सहयोगी व्यापार सुविधा तंत्र का अन्वेषण कर रहे हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन  की मेजबानी कर रहा है, जो वैश्विक दक्षिण का प्रथम वैश्विक एआई सम्मेलन है।
    • यह एआई शासन और परिनियोजन को आकार देने में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
    • यूएई ने 2017 में विश्व का पहला राज्य मंत्री (AI) नियुक्त किया और एआई अनुसंधान एवं अवसंरचना में भारी निवेश किया है।
    • उन्नत कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा केंद्र और एआई-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग पहले से ही जारी है।

भारत–यूएई संबंधों में संबोधित किए जाने योग्य चिंताएँ एवं मुद्दे

  • ऊर्जा व्यापार पर अत्यधिक निर्भरता: यद्यपि CEPA के अंतर्गत गैर-तेल व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, फिर भी हाइड्रोकार्बन आर्थिक संबंध का प्रमुख घटक बने हुए हैं।
    • दोनों देशों को नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्रों में विविधीकरण को तीव्र करना होगा ताकि आर्थिक गलियारे को भविष्य-सुरक्षित बनाया जा सके।
  • श्रम और कल्याण संबंधी चिंताएँ: सुधारों ने श्रमिक संरक्षण को बेहतर बनाया है, किंतु अनुबंध पारदर्शिता, वेतन विवाद, कुछ क्षेत्रों में कार्य परिस्थितियाँ और कौशल गतिशीलता जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
    • चूँकि प्रवासी समुदाय इस साझेदारी की मानवीय रीढ़ है, श्रम-संबंधी चिंताएँ शीघ्र ही कूटनीतिक संवेदनशीलता का रूप ले सकती हैं।
  • खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता:यूएई एक रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जो स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ के निकट है—वैश्विक ऊर्जा प्रवाह का प्रमुख मार्ग।
    • जोखिमों में ईरान से संबंधित क्षेत्रीय तनाव, समुद्री सुरक्षा खतरे और व्यापक मध्य-पूर्व संघर्षों से उत्पन्न प्रभाव शामिल हैं।
    • भारत खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात और प्रेषण प्रवाह पर अत्यधिक निर्भर है। किसी भी अस्थिरता से आपूर्ति श्रृंखला एवं वित्तीय प्रवाह प्रभावित हो सकते हैं।
  • व्यापार असंतुलन और बाज़ार पहुँच संबंधी मुद्दे: यद्यपि व्यापार मात्रा बढ़ रही है, कुछ क्षेत्रों को गैर-शुल्कीय उपायों (नियामक मानक, प्रमाणन नियम), लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन लागत और लॉजिस्टिक्स बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
    • CEPA ने लगभग 90% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त कर दिया है, किंतु क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
  • वित्तीय प्रणाली का जोखिम: संप्रभु कोषों और बैंकिंग अधिग्रहणों के माध्यम से बड़े निवेश प्रवाह के कारण वित्तीय परस्पर-निर्भरता बढ़ रही है।
    • संभावित चिंताओं में वैश्विक वित्तीय आघातों का प्रभाव, मुद्रा अस्थिरता और बैंकिंग क्षेत्र में नियामक समन्वय शामिल हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, सीमा-पार बैंकिंग निवेशों के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच सुदृढ़ नियामक समन्वय आवश्यक है।
  • प्रौद्योगिकी और डेटा शासन: जैसे-जैसे सहयोग एआई, फिनटेक और डिजिटल अवसंरचना तक विस्तारित हो रहा है, नई जटिलताएँ उत्पन्न हो रही हैं—जैसे डेटा स्थानीयकरण नियम, साइबर सुरक्षा समन्वय, बौद्धिक संपदा संरक्षण एवं नैतिक एआई शासन।
  • बहुध्रुवीय विश्व में रणनीतिक संतुलन: भारत और यूएई दोनों विविध वैश्विक संबंध बनाए रखते हैं:
    • भारत अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ और इंडो-पैसिफिक साझेदारों से जुड़ा है।
    • यूएई पश्चिमी देशों, चीन और क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखता है।
      • चुनौती यह है कि द्विपक्षीय एकीकरण को गहरा करते हुए रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा जाए।

आगे की राह

  • भारत का वैश्विक क्षण: भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका GDP लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है।
    • इसकी ताकतों में उद्यमशीलता की गहराई, विस्तारित विनिर्माण क्षमता और विश्व-स्तरीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना शामिल हैं।
    • भारतीय व्यवसाय तीव्रता से वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की ओर अग्रसर हैं।
  • रणनीतिक अभिसरण: हाल ही में दिल्ली घोषणा में भारत और अरब विदेश मंत्रियों ने 2028 तक राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी एवं सुरक्षा में विस्तारित सहयोग का खाका प्रस्तुत किया।
    • भारत–यूएई साझेदारी का मूल्यांकन आर्थिक एकीकरण की गहराई, संयुक्त वैश्विक पहुँच के पैमाने और एआई तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता से किया जाएगा।
    • विकास तब तीव्र होता है जब नीतिगत समन्वय, पूँजी की शक्ति और रणनीतिक क्रियान्वयन एक साथ आते हैं।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत–यूएई आर्थिक गलियारा ऊर्जा-आधारित संबंध से विकसित होकर बहु-क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित हो गया है। विवेचना कीजिए।

Source: TH

 

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